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पिछला परिवर्तन-Wednesday, 07 Feb 2018 04:28:06 AM

महँगाई के डर से RBI ने नहीं घटाई ब्याज दर

मुंबई। रिजर्व बैंक (आरबीआई) की मौद्रिक नीति समिति ने बढ़ती महँगाई के डर से नीतिगत ब्याज दरों को यथावत बनाये रखा है। इससे आवास तथा वाहन ऋण सस्ते होने की आस लगाये बैठे लोगों के साथ उद्योगों की सस्ती पूँजी की उम्मीद को भी झटका लगा है। समिति की दो दिवसीय बैठक के बाद आरबीआई के गवर्नर उर्जित पटेल ने बताया कि रेपो दर छह प्रतिशत पर स्थिर रखी गयी है। इससे रिवर्स रेपो दर 5.75 प्रतिशत पर तथा मार्जिनल स्टैंडिंग फसिलिटी और बैंक रेट 6.25 प्रतिशत पर यथावत हैं। साथ ही नकद आरक्षी अनुपात (सीआरआर) चार प्रतिशत पर बरकरार रखने का फैसला किया गया है।
विशेषकर अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल के दाम में हो रही लगातार वृद्धि के मद्देनजर चालू वित्त वर्ष के लिए विकास अनुमान 6.7 प्रतिशत से घटाकर 6.6 प्रतिशत कर दिया है। रिजर्व बैंक का यह अनुमान सरकार के आर्थिक सर्वेक्षण की तुलना में भी कम है जिसमें कहा गया था कि चालू वित्त वर्ष में विकास दर 6.75 प्रतिशत रहेगी। आरबीआई की मौद्रिक समिति नीति की दो दिवसीय बैठक के बाद आज यहाँ जारी बयान में कहा गया है कि कमोडिटी - विशेषकर कच्चा तेल - की ऊँची कीमत के कारण माँग में कमी आ सकती है।
समिति का मत है कि ऋण उठाव बढ़ा है जिससे निवेश में सुधार के शुरुआती संकेत मिलते हैं। पूँजीगत वस्तुओं के उत्पादन तथा आयात में सुधार के संकेत हैं। बड़े सार्वजनिक बैंकों का पुन:पूँजीकरण शुरू हो गया है। दिवालिया कानून के पारित होने और जोखिम में पड़े बड़े ऋणों के लिए समाधान प्रक्रिया शुरू होने से ऋण उठाव और बढ़ेगा।

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