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क्रिकेटर राहुल द्रविड़ इस कारण से हैं प्रेरणादायक

इंटरनेट डेस्क। एशिया महाद्वीप पर क्रिकेट का जुनून बच्चों से लेकर अधेड़ों के सिर पर चढक़र बोलता है। यह आम बात हो जाती है जब क्रिकेट का स्कोर बच्चे से लेकर वृद्ध भी बिना किसी संकोच के पूछ बैठता है। वह दौर भी लोगों ने देखा है जब रेडियो पर कमेंट्री सुनने के लिए एक अच्छी संख्या में भीड़ का सैलाब लगा रहता था। जिसके पास रेडियो होता था उसकी खातिरदारी राजा से कम नहीं होती थी।
इस क्रिकेट महानतम खिलाड़ी राहुल द्रविड़ के नाम बिना अधूरा रहेगा। इस खिलाड़ी के लिए कहा जाता था कि यह मात्र टेस्ट ही खेल सकता है। लेकिन उसकी लग्न व मेहनत से द्रविड़ का जादू एक दिवसीय खेल में भी सिर चढ़ कर बोला। आज के युवा इस महानतम खिलाड़ी के जीवन से प्रेरणा लेनी चाहिए। उनका स्वभाव बिलकुल शांत रहना लोगों को मन को उचेटता था। जब वे भारतीय टीम के कप्तान रहे, टीम जीत रही है तो सामान्य रहना उनके परिपक्वता को दर्शाता था।
उन्होंने 164 टेस्ट मैचों में 52.31 के औसत से 13,288 रणों का एक अम्बार खड़ा कर दिया। उन्होंने अपने जीवन में 36 शतक और 63 अद्र्धशतक लगाकर आलोचकों के मुंह पर करार तमाचा लगाने जैसा साबित किया। टेस्ट मैच में उनका सर्वेश्रेष्ठ 270 रन रहे हैं। यदि हम उनके एकदिवसीय मैचों के स्कोर पर नजर लगाए तो 334 एक दिवसीय मैच में 10,899 रन बनाए। उन्होंने 12 बार सैकड़ा जड़ा और 83 अद्र्धशतक बनाने में कामयाब रहे हैं।
राहुल द्रविड़ ने पाकिस्तान के विकेट कीपर मोहसीन खान की तरह विकेटकीपिंग का जिम्मा भी बखूबी से निभाया था। उन्होंने टेस्ट और वनडे में अन्तरराष्ट्रीय मैचों में 406 खिलाडिय़ों के कैंच लपकर उनको पैवलिन भेज दिया और 14 बार स्टंपिंग का जौहर दिखाया।

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