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शिक्षा

पिछला परिवर्तन-Friday, 16 Sep 2016 02:35:52 AM

संस्कृत पढऩे वाले छात्रों को वितीय सहायता देगी सरकार : वीरभद्र

शिमला। हिमाचल सरकार संस्कृत में उच्च शिक्षा के इच्छुक विद्यार्थियों को वित्तीय सहायता प्रदान करेगी। मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने कहा है कि राज्य सरकार संस्कृत भाषा को प्रोत्साहित करने के लिए प्रतिवद्ध है और स्कूलों में संस्कृत को छठी से आठवीं कक्षा तक अनिवार्य बनाया गया है।
श्री वीरभद्र सिंह ने कहा कि उनकी इच्छा है कि राज्य के प्रत्येक जिले में संस्कृत महाविद्यालय अथवा संस्थान होने चाहिए। राजकीय संस्कृत महाविद्यालय सोलन में राष्ट्रीय संस्कृत कार्यशाला के अवसर पर वीरभद्र सिंह ने कहा कि देववाणी अथवा देवताओं की भाषा मानी जाने वाली संस्कृत हमें प्राचीन भारतीय सभ्यताओं के उद्भव एवं विकास को समझने में मदद करती है, जिसकी भारत को विश्व गुरु बनाने में अहम भूमिका है।
वीरभद्र सिंह ने कहा कि यहां तक कि विदेशी भी संस्कृत भाषा व इसके इतिहास को अच्छी तरह समझने के लिए भाषा में गहरी रूचि दर्शाते हैं तथा मूल संस्कृत ग्रंथों का अनुसंधान करते हैं, क्योंकि इनमें प्राचीन समय के विचार एवं रहस्य छिपे हैं।
उन्होंने कहा कि देश की सभी भाषाओं की उत्पत्ति संस्कृत से हुई है। संस्कृत साहित्य विविधताओं का द्योतक हैं और हमारी प्राचीन परम्पराओं व संस्कृति के साथ-साथ इसका संरक्षण भी समय की आवश्यकता है। मुख्यमंत्री ने युवाओं की भाषा में घटती रुचि पर चिंता जाहिर की तथा पारम्परिक भारतीय भाषाओं में और अधिक अध्ययन एवं अनुसंधान के लिए उनका आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि सभी संस्कृत ज्ञाताओं को इस पर चिंतन व विवेचन करना चाहिए कि भाषा के विकास के लिए क्या किया जाना चाहिए। संस्कृत का अध्यापन आकर्षक होना चाहिए, इसकी गुणवत्ता में सुधार होना चाहिए तथा संस्कृत में अनुसंधान और अधिक व्यावहारिक व क्रियाशील होना चाहिए।

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