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शिक्षा

पिछला परिवर्तन-Tuesday, 20 Sep 2016 02:25:39 AM

सरकरी स्कूलों में चरमाई पठन-पाठन व्यवस्था

भोपाल। प्रदेश के अधिकांश सरकारी स्कूलों में पठन-पाठन इस कदर बिगड़ा हुआ है कि न तो शिक्षक पढ़ाना चाहते हैं, न ही बच्चे स्कूल जाना चाहते हैं। गिरता शिक्षा का स्तर समाज एवं सरकार के लिए चिंता का विषय बनता जा रहा है। सरकारी की लाख कोशिशों के बाद भी स्कूल की व्यवस्थाएं सुधारने का नाम नहीं ले रही हैं।
प्रदेश में शासकीय स्कूलों की शिक्षा प्रणाली पूरी तरह से बेपटरी हो गई है। स्कूलों में छात्र तो समय पर आ जाते हैं, लेकिन शिक्षक कब आते, स्कूल पहुंचते भी हैं या नहीं इसका पता किसी को नहीं रहता। ऐसे एक नहीं, राज्य में कई स्कूल हैं, जहां स्कूल प्रशासन को बच्चों की पढाई से कोई मतलब ही नहीं है। केवल अपनी नौकरी करते हैं, ताकि समय पर वेतन मिलता रहे। देखने मे आया है कि शिक्षक पढाने में कम, इधर उधर की गौतड़ी करते नजर ज्यादा नजर आते हैं, जिससे पठन पाठन कार्य चौपट हो गया है।
वहीं सुविधाओं के नाम पर स्कूल परिसर में शौचालय न के बराबर है, कहीं-कही एक ही शौचालय में शिक्षक, कर्मचारी व छात्रों को जाना पड़ता है, कई जगह स्कूल की बिल्डिंग क्षतिग्रस्त हो गई हैं, कमरो का फर्श उखड़ गया है, बिल्डिंग की छत से पानी टपकता है व दीवार फट गई है, जो किसी बड़े हादसे की ओर इंगित कर रही है। सरकारी स्कूले धीरे धीरे बंद होने की कगार पर पहुंच रहे हैं। स्कूलों में पठन पाठन व शैक्षणिक व्यवस्था की बदहाली के चलते प्राईवेट स्कूल चांदी काट रहे हैं।

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