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अशरफ गनी ने आत्मघाती हमले के विरुद्ध जारी फतवे का किया समर्थन

Afghanistan

काबुल। अफगानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ ने सोमवार को काबुल में मौलवियों के शांति शिविर पर हुए आत्मघाती हमले की कड़ी निंदा की तथा उनकी ओर से (मौलवियों द्वारा) ऐसे हमलों के जारी फतवे का समर्थन किया है। गनी ने मंगलवार को कहा कि हमलावरों ने इस्लाम के सिद्धांतों का भी उल्लंघन किया है। उन्होंने वीडियो पर अपने संबोधन में कहा कि देश भर से धर्म गुरुओं और धार्मिक विद्वानों की बड़ी सभा को लक्षित करने वाला यह हमला वास्तव में इस्लाम के भविष्यवक्ता और इस्लाम के मूल्यों के वारिस के खिलाफ हमला था। उन्होंने कहा कि दुर्भाग्य से, हर दिन अफगानिस्तान में थोपे गए युद्ध में हमारे निर्दोष बच्चों की जान लेता है।
गौरतलब है कि इस आत्मघाती हमले में सात मौलवियों सहित 14 लोग मारे गए थे। यह घटना आगामी 20 अक्टूबर को प्रस्तावित संसदीय और जिला परिषद के चुनावों से पूर्व सुरक्षा व्यवस्था में गिरावट को भी दर्शाती है। हमले की जिम्मेदारी आतंकवादी संगठन इस्लामिक स्टेट (आईएस) ने ली है, लेकिन उसने कोई साक्ष्य नहीं दिया है। देश भर के 2000 से अधिक धार्मिक विद्वान वर्षाें से जारी संघर्ष की निंदा करने के लिए रविवार और सोमवार को लोया जिरगा (विराट परिषद) शिविर में एकत्र हुए थे। इन विद्वानों ने शांति बहाल करने को लेकर तालिबान आतंकवादियों और विदेशी जवानों को जाने की इजाजत देने को लेकर एक फतवा जारी किया तथा आत्मघाती हमलों की निंदा की।
अमेरिका समर्थित जवानों द्वारा 2001 में तालिबान को सत्ता से हटाए जाने के बाद यह संगठन फिर से देश में कठोर इस्लामिक शासन स्थापित करने के प्रयास में है। काबुल में हाल केे महीनों में बम विस्फोट की कई घटनाएं हो चुकी हैं जिसमें अनेक लोग मारे जा चुके हैं तथा मुसलमानों के पवित्र रमजान के दौरान भी ऐसी घटनाओं से मुक्ति के आसार नजर नहीं आ रहे हैं।

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