ads
आज है: September 22, 2018

राष्ट्रीय

पिछला परिवर्तन-Wednesday, 13 Dec 2017 01:29:40 AM

उम्‍मीद है, मेरे आंदोलन से अब कोई 'अरविंद केजरीवाल' पैदा नहीं होगा : अन्ना

उत्तर प्रदेश

आगरा। समाजसेवी अन्ना हजारे ने कहा कि वर्ष 2011 में भ्रष्टाचार के खिलाफ उनके आंदोलन के बाद अरविंद केजरीवाल ने जब आम आदमी पार्टी बना ली तो उन्होंने उनसे कोई वास्ता नहीं रखा। उन्होंने कहा कि 23 मार्च 2018 से वह एक और आंदोलन शुरू करने वाले हैं और उम्मीद करते हैं कि इससे कोई नया 'केजरीवाल' पैदा नहीं होगा। उन्होंने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि 23 मार्च 2018 से दिल्ली के रामलीला मैदान में होने जा रहे तीन सूत्रीय आंदोलन में लोकपाल की नियुक्ति, किसानों की समस्या, चुनाव सुधार को लेकर जनता में जागरूकता पैदा करने का लक्ष्य है। उन्होंने कहा कि अब जो भी कार्यकर्ता आंदोलन के दौरान उनसे मिलेंगे, स्‍टांप पेपर पर लिखकर देंगे कि वह कोई पार्टी नहीं बनायेंगे। साथ ही उन्होंने घोषणा की कि वह न तो किसी पार्टी का समर्थन करेंगे और ना ही किसी पार्टी से किसी को चुनाव लड़वाएंगे।
इससे पहले 29 नवंबर को सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे ने घोषणा करते हुए कहा था कि जनलोकपाल और किसानों के मुद्दों को लेकर अगले साल दिल्ली में 23 मार्च से आंदोलन शुरू करेंगे। लोकपाल आंदोलन का चेहरा रहे हजारे ने कहा कि उन्होंने आंदोलन शुरू करने के लिए 23 मार्च की तारीख चुनी है, क्योंकि उस दिन 'शहीद दिवस' मनाया जाता है। उस दौरान महाराष्ट्र के अहमदनगर जिले के रालेगण सिद्धि गांव में अपने समर्थकों की एक बैठक को संबोधित करते हुए हजारे ने कहा था, 'जनलोकपाल, किसानों की समस्या और चुनाव में सुधारों के लिए यह एक सत्याग्रह होगा। गांधीवादी हजारे ने कहा कि वह इन मुद्दों को लेकर प्रधानमंत्री को खत लिखते रहे हैं, लेकिन उन्हें अभी तक कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली है।
उन्होंने कहा, 'पिछले 22 वर्षों में कम से कम 12 लाख किसानों ने आत्महत्या की है। मैं जानना चाहता हूं कि इस कालखंड में कितने उद्योगपतियों ने आत्महत्या की। भ्रष्टाचार पर रोक लगाने के लिए हजारे जनलोकपाल का गठन करने की मांग करते रहे हैं। उन्होंने कहा कि, लोकसभा में फिलहाल विपक्ष का कोई नेता नहीं है इसलिए समिति का गठन नहीं हो सकता है। ऐसे में लोकपाल की नियुक्ति भी नहीं हो सकती है। उन्होंने इसके लिए साल 2011 में 12 दिन का अनशन किया था। उनकी मांगो को संप्रग (यूपीए) सरकार ने सैद्धांतिक तौर पर स्वीकार कर लिया था। इसके बाद हजारे ने फिर से अनशन किया था, इस दौरान उन्हें पूरे देश से समर्थन भी मिला। इसके बाद संप्रग सरकार ने लोकपाल विधेयक पारित किया. हजारे के एक सहयोगी ने बताया कि मोदी सरकार ने लोकपाल की नियुक्त नहीं की है। उन्होंने कहा, 'सरकार की तरफ से इसके लिए जो कारण दिए गए हैं, वह तकनीकी है।

Comments           Comment
     
   

स्थानीय समाचार


  1. कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो...
  2. नेतन्याहू ने पत्नी के साथ किया ताजम...
  3. उम्‍मीद है, मेरे आंदोलन से अब कोई '...