Winter Vegetable Sowing Guide: सितंबर के आखिरी हफ्ते में बोएं ये 5 मुनाफा देने वाली सब्जियां, सर्दियों में होगी छप्परफाड़ कमाई
Winter Vegetable Sowing Guide: सितंबर का महीना ढलने के साथ ही उत्तर भारत के मौसम में एक सुखद तब्दीली आनी शुरू हो गई है। मानसून विदा हो रहा है और रात के समय हल्की गुलाबी ठंडक ने दस्तक दे दी है। कृषि वैज्ञानिकों के मुताबिक यह मौसमी बदलाव किसानों के लिए अपनी किस्मत बदलने का सबसे सुनहरा मौका लेकर आता है।
यदि किसान भाई सितंबर के आखिरी हफ्ते (Late September) में पारंपरिक फसलों को छोड़कर कुछ खास अगेती सब्जियों की खेती (Early Vegetable Farming) की शुरुआत करते हैं तो वे आने वाले सर्दियों के महीनों में बाजार से तगड़ा मुनाफा कूट सकते हैं। आइए जानते हैं इस समय बोई जाने वाली उन 5 फसलों के बारे में जो किसानों की जेबें भर देंगी।
1. अगेती हरी मटर (Green Peas)
सितंबर के आखिरी दिनों में अगेती हरी मटर की बुवाई करना सबसे ज्यादा फायदेमंद सौदा माना जाता है। इस समय बोई गई मटर नवंबर की शुरुआत में बाजार में आ जाती है, जब मांग बहुत ऊंची होती है और बाजार भाव 80 से 120 रुपये प्रति किलो तक मिल जाता है। इसके लिए आप आर्किल, आजाद मटर-3 या काशी उदय जैसी उन्नत किस्मों के बीजों का चयन कर सकते हैं। बुवाई से पहले बीजोपचार (Fungicide Treatment) अवश्य करें ताकि फंगस का खतरा न रहे।
2. मूली और गाजर की जुगलबंदी (Radish & Carrot)
अगर आप बेहद कम समय में नकद कमाना चाहते हैं तो मूली से बेहतर कोई विकल्प नहीं है। सितंबर के अंत में बोई गई मूली मात्र 30 से 35 दिनों में उखाड़ने के लिए तैयार हो जाती है। इसके साथ ही गाजर की बुवाई के लिए भी यह सर्वोत्तम समय है। हल्की दोमट और भुरभुरी मिट्टी में गाजर और मूली की पैदावार बंपर होती है। शुरुआती आवक (Early Entry) होने के कारण मंडी के आढ़ती इसके लिए मुंहमांगे दाम देने को तैयार रहते हैं।
3. फूलगोभी और ब्रोकली की रोपाई (Cauliflower & Broccoli)
जिन किसानों ने अगस्त या सितंबर की शुरुआत में फूलगोभी, पत्तागोभी या ब्रोकली की नर्सरी (पौध) तैयार कर ली थी, उनके लिए खेतों में पौधों की रोपाई (Transplantation) करने का यह बिल्कुल सही समय है। आजकल बड़े शहरों और होटलों में ब्रोकली की मांग बहुत ज्यादा है, जिससे यह एक हाई-वैल्यू क्रॉप बन चुकी है। अगर नर्सरी तैयार नहीं है तो किसान सीधे उन्नत हाइब्रिड बीजों का इस्तेमाल कर वैज्ञानिक विधि से क्यारियां बनाकर रोपाई कर सकते हैं।
4. अगेती आलू की बिजाई (Early Potato Farming)
उत्तर भारत के कई इलाकों में जहां तापमान में गिरावट दर्ज की जाने लगी है वहां सितंबर के आखिरी हफ्ते से अगेती आलू की बुवाई शुरू की जा सकती है। 60 से 70 दिनों में तैयार होने वाली आलू की अगेती किस्में (जैसे कुफरी पुखराज या कुफरी ख्याति) किसानों को तब पैदावार देती हैं, जब बाजार में पुराने आलू की किल्लत होती है और नए आलू के दाम आसमान छू रहे होते हैं।
5. 25 दिन में छप्परफाड़ कमाई: हरा धनिया, पालक और मेथी
कम लागत और बिना किसी बड़े झंझट के रोज की नकद आमदनी के लिए पत्तेदार सब्जियां सबसे बेहतरीन जरिया हैं। सितंबर के अंत में धनिया, पालक और मेथी की बुवाई करने से महज 25 से 30 दिनों के भीतर पहली कटाई (Harvesting) मिल जाती है। अच्छी बात यह है कि ये फसलें एक बार बोने के बाद 3 से 4 बार तक कटाई देती हैं, जिससे किसानों को लगातार कमाई होती रहती है। खेत की तैयारी के समय प्रचुर मात्रा में सड़ी हुई गोबर की खाद या केंचुआ खाद (Vermicompost) डालना न भूलें।
