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Cotton Stalk Removal: कपास की डंठल उखाड़ने का झंझट खत्म, इन 3 आसान और नए तरीकों से मेहनत और पैसा दोनों बचाएं किसान

कपास के मजबूत डंठलों को खेत से आसानी से उखाड़ने के लिए मैनुअल रूट पुलर टूल्स और कल्टीवेटर में वी-ब्लेड तकनीक बेहद कारगर हैं। आखिरी चुनाई के बाद हल्की सिंचाई करने से भी मिट्टी नरम हो जाती है और पौधे आसानी से उखड़ जाते हैं।
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Cotton Stalk Removal: कपास की डंठल उखाड़ने का झंझट खत्म, इन 3 आसान और नए तरीकों से मेहनत और पैसा दोनों बचाएं किसान

नई दिल्ली/हिसार: कपास की खेती करने वाले किसान भाइयों के लिए फसल की चुनाई पूरी होने के बाद सबसे बड़ी चुनौती खेत को साफ करने की होती है। कपास के पौधों की जड़ें जमीन में काफी गहराई तक धंसी होती हैं जिसके कारण इन्हें हाथों से खींचकर या कुदाल से खोदकर निकालना बेहद थकाऊ और खर्चीला काम माना जाता है। 

इस काम में बड़ी संख्या में मजदूरों की जरूरत पड़ती है जिससे किसानों की लागत बढ़ जाती है। लेकिन आधुनिक कृषि तकनीकों और कुछ आसान देसी जुगाड़ की मदद से अब इस मुश्किल काम को बेहद आसान बनाया जा सकता है। आइए जानते हैं उन 3 सबसे आसान तरीकों के बारे में जिनसे कपास के डंठल बिना किसी झंझट के उखाड़े जा सकते हैं।

1. पैर के दबाव से चलने वाला मैनुअल रूट पुलर (Manual Root Puller)

छोटे और सीमांत किसानों के लिए बाजार में एक बेहद सस्ता और पोर्टेबल टूल आ गया है जिसे 'मैनुअल कॉटन रूट पुलर' कहा जाता है। इस लोहे के टूल में आगे की तरफ एक मजबूत जबड़ा (Jaw) और नीचे एक पैडल लगा होता है। किसान को बस इस टूल को कपास के तने के पास फंसाना होता है और पैडल पर अपने पैर से थोड़ा सा दबाव देना होता है। 

लीवर के सिद्धांत पर काम करने के कारण यह मोटी से मोटी जड़ को भी बिना झुके और बिना किसी शारीरिक ताकत के एक झटके में जमीन से बाहर खींच लेता है। इससे एक ही मजदूर दिनभर में काफी बड़े हिस्से की सफाई कर सकता है।

2. कल्टीवेटर में वी-ब्लेड (V-Blades) का देसी जुगाड़

जिन किसानों के पास ट्रैक्टर है, वे बिना कोई महंगी मशीन खरीदे अपने पुराने कल्टीवेटर में थोड़ा सा बदलाव करके इसे 'कॉटन स्टॉक अपरूटर' बना सकते हैं। इसके लिए कल्टीवेटर के टायनों (Fangs) के निचले हिस्से पर त्रिकोणीय आकार के बेहद तेज धार वाले वी-ब्लेड (V-Blades) वेल्ड करवा दिए जाते हैं। 

जब इस कल्टीवेटर को खेत में चलाया जाता है तो ये ब्लेड जमीन के भीतर 3 से 4 इंच नीचे जाकर कपास की मुख्य जड़ों को बीच से काट देते हैं। जड़ कटते ही पौधे ढीले हो जाते हैं, जिन्हें हाथ से उठाना बच्चों का खेल हो जाता है।

3. हल्की सिंचाई (रौनी) की जादुई तकनीक

यदि कपास की कटाई के बाद खेत की मिट्टी बहुत ज्यादा सख्त और सूखी हो चुकी है तो डंठल उखाड़ना बहुत मुश्किल होता है। ऐसी स्थिति में वैज्ञानिक सलाह यह है कि कपास की आखिरी चुनाई के तुरंत बाद खेत में एक हल्की सिंचाई (पलेवा या रौनी) कर दें। 

पानी मिलने से मिट्टी नरम और भुरभुरी हो जाएगी। इसके 2 से 3 दिन बाद जब खेत में पैर टिकने लायक नमी आ जाए तब पौधों को उखाड़ना 80% तक आसान हो जाता है और जड़ें पूरी की पूरी बाहर आ जाती हैं।

समय पर खेत खाली करने के बड़े फायदे

कपास के इन डंठलों को जल्दी साफ करने का सीधा फायदा रबी सीजन की अगली फसलों को मिलता है। अक्टूबर के अंत और नवंबर की शुरुआत में गेहूं और सरसों की अगेती बुवाई (Early Sowing) के लिए पर्याप्त समय मिल जाता है। 

कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि जो किसान समय पर खेत खाली करके अगेती बिजाई कर लेते हैं, उनकी फसल को ठंड का पूरा लाभ मिलता है और पछेती फसल के मुकाबले उनकी पैदावार सीधे 20 से 25 प्रतिशत तक बढ़ जाती है। साथ ही जड़ों के पूरी तरह बाहर निकल जाने से खेत में गुलाबी सुंडी (Pink Bollworm) के पनपने का खतरा भी हमेशा के लिए खत्म हो जाता है।

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