पराली जलाई तो सीधे FIR: हरियाणा में धान कटाई शुरू होते ही प्रशासन सख्त
हरियाणा में धान कटाई शुरू होते ही पराली जलाने वालों पर प्रशासन सख्त हो गया है। नियमों का उल्लंघन करने पर सीधे FIR दर्ज होगी और पोर्टल पर रेड एंट्री की जाएगी।
रेवाड़ी, 27 सितंबर। हरियाणा में धान की कटाई का दौर शुरू होते ही राज्य सरकार और जिला प्रशासन पराली प्रबंधन को लेकर पूरी तरह एक्शन मोड में आ गया है। वायु प्रदूषण की रोकथाम के लिए प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि खेतों में धान के अवशेष या पराली जलाने वालों के खिलाफ सीधे एफआईआर (FIR) दर्ज की जाएगी।
कृषि विभाग और स्थानीय प्रशासन ने संयुक्त निर्देश जारी करते हुए कहा है कि नियमों की अनदेखी करने वाले किसानों पर न केवल भारी जुर्माना लगेगा, बल्कि कानूनी कार्रवाई के तहत थानों में मामले भी दर्ज कराए जाएंगे। अधिकारियों के अनुसार इस बार निगरानी के लिए जमीनी स्तर पर टीमों के साथ-साथ सीधे सैटेलाइट तकनीक का सहारा लिया जा रहा है।
सैटेलाइट से सीधी निगरानी और फ्लाइंग स्क्वॉड तैनात
प्रशासनिक अधिकारियों के मुताबिक हरकसिंह (हरसाना) या अन्य ब्लॉक स्तर के संवेदनशील इलाकों में नोडल अधिकारी तैनात कर दिए गए हैं। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) और हरसैक (HARSAC) के माध्यम से रियल-टाइम सैटेलाइट डेटा से आग लगने की लोकेशन तुरंत कंट्रोल रूम को मिल जाएगी।
सूचना मिलते ही नजदीकी फ्लाइंग स्क्वॉड और कृषि विभाग की टीम मौके पर पहुंचेगी। विभाग ने साफ किया है कि यदि खेत में पराली जली पाई जाती है, तो मौके की जीपीएस लोकेशन और फोटो के आधार पर तुरंत संबंधित किसान के खिलाफ कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
मेरी फसल मेरा ब्योरा पोर्टल पर रेड एंट्री का खतरा
प्रशासन के अनुसार पराली जलाने वाले किसानों को सिर्फ पुलिस कार्रवाई का ही सामना नहीं करना पड़ेगा, बल्कि उनका नाम कृषि विभाग के 'मेरी फसल मेरा ब्योरा' पोर्टल पर भी रेड लिस्ट (Red Entry) में डाला जा सकता है।
विभाग के अधिकारियों ने बताया कि यदि किसी किसान के रिकॉर्ड पर रेड एंट्री दर्ज होती है, तो वह अगले दो सीजन तक न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर अपनी फसल बेचने और किसी भी सरकारी कृषि योजना के अनुदान का लाभ लेने से वंचित हो सकता है। पर्यावरण क्षतिपूर्ति शुल्क (Environmental Compensation) के तहत 2 एकड़ तक 2500 रुपये, 2 से 5 एकड़ तक 5000 रुपये और उससे अधिक भूमि पर 15,000 रुपये तक का जुर्माना लगाने का प्रावधान है।
दक्षिण हरियाणा और एनसीआर में बढ़ता दबाव
यूं तो धान की मुख्य खेती कुरुक्षेत्र, करनाल, कैथल, अंबाला और जींद जैसे जिलों में ज्यादा होती है, लेकिन रेवाड़ी, नारनौल और महेंद्रगढ़ जैसे राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) से सटे जिलों में कटाई के सीजन में हवा की गुणवत्ता (AQI) अचानक बिगड़ने लगती है।
सुप्रीम कोर्ट और वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) के कड़े निर्देशों के चलते इस बार जिला उपायुक्तों (DC) को सीधे तौर पर जवाबदेह बनाया गया है। रेवाड़ी और आसपास के ग्रामीण इलाकों में भी पटवारियों और ग्राम सचिवों को निर्देश दिए गए हैं कि वे किसानों को जागरूक करें और किसी भी स्थान पर आगजनी न होने दें।
मशीनों पर किसानों को अनुदान
कृषि विभाग किसानों को पराली न जलाने और इन-सीटू (खेत में ही अवशेष मिलाना) एवं एक्स-सीटू (खेत से बाहर ले जाना) प्रबंधन अपनाने की सलाह दे रहा है। इसके लिए सुपर सीडर, बेलर, हैप्पी सीडर और स्ट्रॉ मैनेजमेंट सिस्टम (SMS) जैसी मशीनों पर किसानों को अनुदान दिया जा रहा है।
अधिकारियों का कहना है कि आने वाले दिनों में जब कटाई पूरी रफ्तार पकड़ेगी तब रात्रि गश्त भी बढ़ाई जाएगी ताकि चोरी-छिपे आग लगाने की घटनाओं को रोका जा सके।
