Wheat Early Sowing Guide: गेहूं की अगेती बुवाई के लिए ऐसे तैयार करें खेत, मिलेगी रिकॉर्ड तोड़ पैदावार, कृषि वैज्ञानिकों की बड़ी सलाह
नई दिल्ली/हिसार: खरीफ फसलों (धान, बाजरा, कपास) की कटाई के बाद अब किसान भाइयों का पूरा ध्यान रबी की सबसे मुख्य फसल गेहूं पर टिक गया है। कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार गेहूं की अगेती बुवाई (Early Wheat Sowing) करने वाले किसानों को पछेती बुवाई के मुकाबले प्रति एकड़ 4 से 6 क्विंटल तक अधिक पैदावार मिलती है। लेकिन इस बंपर मुनाफे की पहली और सबसे मजबूत शर्त है खेत की वैज्ञानिक और सही तरीके से तैयारी। अगर आपके खेत की मिट्टी सही ढंग से तैयार नहीं होगी तो महंगे से महंगे बीज और खाद भी बेकार साबित हो जाएंगे। आइए जानते हैं अगेती गेहूं से रिकॉर्ड उत्पादन लेने के लिए खेत तैयार करने का ए टू जेड (A to Z) तरीका।
1. पिछली फसल के अवशेषों का सही प्रबंधन
धान या अन्य फसलों की कटाई के बाद खेत में बचे ठूंठ (नरवाई) को कभी भी आग न लगाएं। आग लगाने से मिट्टी के मित्र कीट और जरूरी पोषक तत्व जलकर राख हो जाते हैं। इसके बजाय रोटावेटर या चॉपर चलाकर अवशेषों को छोटे टुकड़ों में काट लें। इसके बाद खेत में पानी लगाकर 10-15 किलोग्राम यूरिया प्रति एकड़ छिड़क दें जिससे ये अवशेष सड़कर बेहतरीन जैविक खाद में बदल जाएंगे।
2. गहरी जुताई और मिट्टी की पलटी
लगातार कल्टीवेटर चलाने से जमीन के नीचे एक सख्त परत बन जाती है जो गेहूं की जड़ों को गहराई तक जाने से रोकती है। इसलिए पहली जुताई मिट्टी पलटने वाले हल (MB Plough) से कम से कम 8 से 10 इंच गहरी करें। इसके बाद खेत को 2-3 दिनों के लिए खुली धूप में छोड़ दें। धूप लगने से मिट्टी में मौजूद हानिकारक फंगस और कीड़ों के अंडे पूरी तरह नष्ट हो जाएंगे।
3. 'पलेवा' (रौनी) की जादुई तकनीक
अगेती गेहूं के लिए कभी भी सूखे खेत में बुवाई करके पानी न लगाएं (जिसे कोर बुवाई कहते हैं)। वैज्ञानिक तरीका यह है कि आप बिजाई से करीब एक हफ्ता पहले खेत में 'पलेवा' यानी भारी सिंचाई कर दें। जब खेत में 'वत्तर' (पैर टिकने लायक नमी) आ जाए तब जुताई करें। पलेवा विधि से बुवाई करने पर बीज का अंकुरण (Germination) 98% तक एकसमान और बेहद मजबूत होता है।
4. आखिरी जुताई के समय खाद का सही डोज (Base Dose)
जब खेत जुताई के लिए तैयार हो जाए, तब आखिरी जुताई से ठीक पहले प्रति एकड़ निम्नलिखित चीजें खेत में समान रूप से बिखेर दें:
गोबर की खाद: 4 से 5 ट्रॉली पूरी तरह सड़ी हुई गोबर की खाद या केंचुआ खाद।
मित्र फंगस: गोबर की खाद के साथ 1 से 2 किलो 'ट्राइकोडरमा' (Trichoderma) जरूर मिलाएं, यह जड़ गलन और दीमक जैसी बीमारियों को रोक देगा।
उर्वरक प्रबंधन: इसी समय प्रति एकड़ 50 किलो डीएपी (DAP), 25 किलो म्यूटेट ऑफ पोटाश (MOP) और 10 किलो जिंक सल्फेट का छिड़काव करें। ध्यान रहे, नाइट्रोजन (यूरिया) की आधी मात्रा ही इस समय देनी है, बाकी आधी पहली सिंचाई पर दें।
5. पाटा लगाना और लेजर लैंड लेवलर का महत्व क्या होता है?
खाद मिलाने के बाद कल्टीवेटर या हैरो चलाकर मिट्टी को भुरभुरी बना लें। सबसे आखिरी में भारी पाटा (Suhaga) चलाकर खेत को पूरी तरह समतल कर लें। यदि संभव हो तो लेजर लैंड लेवलर (Laser Land Leveler) से खेत को एक बराबर करवाएं। खेत समतल होने से सिंचाई का पानी पूरे खेत में एक समान फैलता है, जिससे न तो कहीं पानी रुकता है और न ही कोई कोना सूखा रहता है। अब आपका खेत अगेती गेहूं की बिजाई के लिए पूरी तरह तैयार है।
