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Bhadrapada Purnima: भाद्रपद पूर्णिमा पर जरूर करें ये 3 उपाय, मिलेगा लाभ

भाद्रपद पूर्णिमा पर करें ये 3 जरूरी काम। चंद्र दर्शन का महत्व, अर्घ्य विधि और पितृ पक्ष से पहले पूर्णिमा श्राद्ध के नियमों की पूरी जानकारी पढ़ें।
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भाद्रपद पूर्णिमा पर जरूर करें ये 3 उपाय, मिलेगा लाभ

रेवाड़ी, 27 सितंबर। भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि का सनातन परंपरा में विशेष महत्व है। इस दिन भगवान सत्यनारायण और मां लक्ष्मी की आराधना के साथ-साथ चंद्र दर्शन और पितरों के निमित्त तर्पण करने की परंपरा रही है। दक्षिण हरियाणा के रेवाड़ी, महेंद्रगढ़ और नारनौल सहित ग्रामीण अंचलों में पूर्णिमा के अवसर पर मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना और घरों में धार्मिक अनुष्ठान किए जा रहे हैं।

ज्योतिष शास्त्र और पंचांग गणना के अनुसार भाद्रपद पूर्णिमा के साथ ही महालय श्राद्ध की शुरुआत का संकेत मिलता है। इस दिन सुबह पवित्र सरोवरों या घर पर गंगाजल मिलाकर स्नान करने के बाद दान-पुण्य किया जाता है। वहीं शाम को चंद्रोदय के बाद चंद्रमा को अर्घ्य देकर परिवार की सुख-शांति की कामना की जाती है।

भाद्रपद पूर्णिमा पर जरूर करें ये 3 प्रमुख काम

धार्मिक मान्यताओं और ज्योतिषीय परंपरा के अनुसार, इस दिन तीन प्रमुख कार्यों को करने का विशेष विधान बताया गया है:

  • 1. गंगाजल युक्त जल से स्नान और दान: पूर्णिमा तिथि के दिन सुबह स्नान के जल में थोड़ा गंगाजल मिलाकर स्नान करना शुभ माना जाता है। इसके बाद अपनी सामर्थ्य अनुसार किसी जरूरतमंद या ब्राह्मण को सफेद वस्तुएं जैसे चावल, चीनी, दूध या सफेद वस्त्र का दान करना चाहिए। मान्यता है कि इससे घर में अन्न और धन की बरकत बनी रहती है।
  • 2. रात में चंद्र दर्शन और अर्घ्य: शास्त्रों में चंद्रमा को मन का कारक माना गया है। पूर्णिमा की रात चंद्रमा अपनी पूर्ण कलाओं के साथ उदित होता है। रात के समय लोटे में जल, थोड़ा कच्चा दूध, अक्षत और सफेद फूल डालकर चंद्रदेव को अर्घ्य अर्पित करने की परंपरा है। मान्यता है कि इससे मानसिक तनाव कम होता है और कुंडली में चंद्र दोष शांत होता है।
  • 3. भगवान विष्णु की पूजा और दीपदान: शाम के समय तुलसी के पौधे के पास और घर के मुख्य द्वार पर गाय के शुद्ध घी का दीपक प्रज्वलित करना चाहिए। इसके साथ ही भगवान सत्यनारायण की कथा का पाठ या श्रवण करने से घर की नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और परिवार में आपसी सामंजस्य बढ़ता है।

चंद्र दर्शन से जुड़ी मान्यता

लोक परंपरा के अनुसार भाद्रपद पूर्णिमा के दिन खुले आसमान के नीचे कुछ समय बैठकर चंद्र दर्शन करना स्वास्थ्य और मन दोनों के लिए लाभकारी माना जाता है। ग्रामीण इलाकों में महिलाएं परिवार की सुख-समृद्धि और बच्चों के उत्तम स्वास्थ्य के लिए चंद्रमा को अर्घ्य देकर व्रत का पारण करती हैं।

पूर्णिमा श्राद्ध और पितृ पक्ष की शुरुआत

भाद्रपद पूर्णिमा का दिन केवल पूजन तक सीमित नहीं है बल्कि यह पितरों के प्रति कृतज्ञता जताने का भी दिन है। जिन पूर्वजों का देहावसान किसी भी महीने की पूर्णिमा तिथि को हुआ हो, उनका श्राद्ध और तर्पण इसी दिन दोपहर के समय किया जाता है। इसके अगले दिन यानी आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा से विधिवत पितृ पक्ष का आरंभ हो जाता है।

पंडितों और स्थानीय पुरोहितों के मुताबिक पूर्णिमा के दिन गाय, कौवे और श्वान (कुत्ते) को भोजन का अंश (ग्रास) निकालना भी पितृ ऋण से मुक्ति दिलाने वाला माना जाता है।

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