Pitru Paksha 2026: पितृ पक्ष में पूर्वजों के सपने देते हैं खास संकेत, जानें मतलब
रेवाड़ी, 27 सितंबर। पितृ पक्ष के दौरान पूर्वजों का सपने में दिखाई देना केवल एक संयोग नहीं, बल्कि स्वप्न शास्त्र और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार गहरे संकेत देता है। भाद्रपद पूर्णिमा से लेकर सर्वपितृ अमावस्या तक चलने वाले इस 16 दिनों के पखवाड़े में लोग अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान करते हैं। इस दौरान यदि पितर सपने में अलग-अलग मुद्राओं में नजर आएं तो इसके विशेष मायने निकाले जाते हैं।
स्थानीय पंडितों और ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, पितृ पक्ष में आने वाले सपनों को अनदेखा नहीं करना चाहिए। यह सीधे तौर पर इस बात का संकेत होता है कि पूर्वज आपसे संतुष्ट हैं या वे आपसे किसी तर्पण अथवा दान की अपेक्षा कर रहे हैं।
पूर्वजों की अलग-अलग मुद्राएं और उनके मतलब
स्वप्न शास्त्र के अनुसार यदि सपने में पूर्वज शांत मुद्रा में, सफेद वस्त्र पहने या मुस्कुराते हुए दिखाई देते हैं, तो इसे अत्यंत शुभ माना जाता है। इसका अर्थ होता है कि पितर आपके परिवार के आचरण और श्राद्ध कर्म से प्रसन्न हैं और जल्द ही घर में सुख-समृद्धि या कोई शुभ समाचार आने वाला है।
इसके विपरीत यदि पूर्वज रोते हुए, क्रोधित मुद्रा में, मैले-कुचैले कपड़ों में या भूखे-प्यासे दिखाई दें, तो इसे पितृ दोष या उनकी नाराजगी का संकेत माना जाता है। मान्यता है कि ऐसे सपने बताते हैं कि पितरों की कोई इच्छा अधूरी रह गई है या उनके निमित्त किया गया श्राद्ध-तर्पण उन तक सही तरीके से नहीं पहुंचा है।
सपने में पूर्वजों से बात करना या कुछ मांगना
यदि सपने में कोई पूर्वज आपसे कुछ मांगते हुए दिखें जैसे जल, अन्न या वस्त्र तो इसका सीधा अर्थ होता है कि उनके नाम से दान करने की आवश्यकता है। ऐसे सपनों के बाद संबंधित वस्तु का दान किसी जरूरतमंद, ब्राह्मण या मंदिर में करना चाहिए।
वहीं यदि सपने में पूर्वज आकर सिर पर हाथ फेरते हैं या आशीर्वाद देते हैं तो यह जीवन में चल रहे बड़े संकट या मानसिक तनाव के खत्म होने की ओर इशारा करता है। यदि वे कुछ बोल रहे हों, तो उन शब्दों को याद रखने की सलाह दी जाती है क्योंकि कई बार वे किसी आने वाली विपत्ति से आगाह करते हैं।
ऐसे सपने आने पर क्या करें?
यदि पितृ पक्ष के दौरान लगातार पूर्वजों के सपने आ रहे हों तो घबराने की जगह शास्त्रों में बताए गए नियमों का पालन करना चाहिए।
ज्योतिषाचार्यों का कहना है कि जिस दिन ऐसा सपना आए, सुबह उठकर स्नान के बाद सूर्य देव को जल दें और दक्षिण दिशा की ओर मुख करके पितरों से अनजाने में हुई गलतियों के लिए क्षमा मांगें। इसके बाद कौवे, गाय और कुत्ते के लिए भोजन का हिस्सा (ग्रास) निकालें।
सर्वपितृ अमावस्या के दिन पितरों के निमित्त विशेष तर्पण कराएं, जरूरतमंदों को भोजन कराएं और जल का दान करें जिससे पितृ शांत होकर आशीर्वाद दें।
