मटर की खेती से लखपति बनने का फॉर्मूला: 40 नहीं अब एक एकड़ में होगी 80 क्विंटल पैदावार, बस अपनाएं ये 5 सीक्रेट टिप्स
मटर की खेती में अगर किसान भाई कुछ बातों का ध्यान रखते है तो वो इसको मुनाफे का सौदा बना सकते है और आज विज्ञान कृषि क्षेत्र में काफी आगे बढ़ चूका है इसलिए किसान भाई अगर वैज्ञानिक तरीके से खेती करते है तो अधिक मुनाफा मिलता है। आइये किसान भाइयो आज के आर्टिकल में आपको मटर की खेती को लेकर जरुरी जानकारी देते है ताकि आप इसकी खेती करके अधिक से अधिक कमाई कर सके।

- परंपरागत तरीकों को छोड़ वैज्ञानिक विधि से खेती
- प्रति हेक्टेयर में 80 क्विंटल तक पहुंच रहा है उत्पादन
- इन किस्मों ने बदली किसानों की किस्मत
- 70 दिनों की मेहनत में 2 लाख रुपये तक का मुनाफा
किसान भाइयो मौजूदा समय में अगर आप मटर की खेती कर रहे है और उससे 40 से 50 क्विंटल तक की पैदावार एक एकड़ में ले रहे है तो आप इसको 80 क्विंटल तक लेकर जा सकते है। आप आज के समय में उसी ज़मीन में और उसी पानी से अपनी खेती को मुनाफे की मशीन बना सकते है। लेकिन कैसे? ये सवाल आपके दिमाग में अभी आ रहा होगा। आइये आपको मिट्टी के चुनाव से लेकर के मटर की तुड़ाई तक की पूरी जानकारी स्टेप बाई स्टेप देते है।
कब बुवाई करना सही होता है
सबसे पहले तो आपको ये बता दें की मटर की जो खेती होती है वो पूरी तरह से मौसम के मिजाज पर निर्भर रहती है और इसमें अगर थोड़ी भी भी समस्या आती है तो फसल से आप अधिक पैदावार नहीं ले सकते। आपको बता दें की मटर की बुवाई का सही समय 15 अक्टूबर से लेकर 15 नवम्बर सही रहता है।
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इसके अलावा अगर आप इससे लेट हो जाते है तो आगे चलकर फूलों की संख्या कम हो जाती है जिसका असर पैदावार पर आपको देखने को मिलता है। इसलिए मटर की बुवाई सबसे जरुरी है की इसको समय पर बोया जाए।
कौन सी किस्मों का चुनाव करें
मटर की सही किस्म का चुनाव करना भी बहुत जरुरी होता है जो की आपको अधिक पैदावार दिलवाने में मुख्य रोल निभाती है। मटर की किस्मों में अरकेल किस्म ऐसी है जो आपको केवल 60 दिनों में पैदावार देती है और इसको जल्दी पैसा देने वाली किस्म भी कहा जाता है।
इसके अलावा पूसा प्रगति या फिर बोनविला किस्म लम्बे समय में आपको पैदावार देती है लेकिन पैदावार अधिक मिलती है। इन दोनों किस्मों में फलियों की लम्बाई काफी अधिक होती है और दानों से भरी रहती है जिसके चलते बाजार में भी इनकी डिमांड काफी अधिक रहती है।
मटर की कुछ उन्नत किस्में
| किस्म का नाम | तैयार होने का समय | विशेषता | संभावित पैदावार (प्रति एकड़) |
|---|---|---|---|
| अरकेल (Arkel) | 60–70 दिन | जल्दी तैयार होने वाली किस्म, मीठी फलियाँ, बाजार में जल्दी बिकती हैं | 60–70 क्विंटल |
| पूसा प्रगति | 80–90 दिन | पाउडरी मिल्ड्यू रोग का असर कम, मजबूत पौधे | 70–80 क्विंटल |
| बोनविला (Bonneville) | 80–90 दिन | बड़ी फलियाँ, स्वाद अच्छा | 70–80 क्विंटल |
| आजाद मटर-1 (P-89) | 80–90 दिन | रोग प्रतिरोधक किस्म, स्थिर पैदावार | 75–85 क्विंटल |
| पंजाब-88 / एजेटा-6 | 70–80 दिन | अगेती बुवाई के लिए अच्छी किस्म | 60–70 क्विंटल |
बुवाई से पहले बीजों का उपचार जरूर करें
किसान भाइयों मटर की बुवाई आप करने वाले है तो उससे पहले आपको बीजों का उपचार करना जरुरी है जिससे पौधों की ग्रोथ काफी तेजी से होती है और रोगों के लगने का खतरा भी नहीं रहता है। बीजों को पहले आपको कार्बेन्डाजिम या थीरम से उपचारित करना चाहिए।
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किसान भाइयों इसके बाद में आपको राइजोबियम कल्चर का टीका लगाना चाहिए जो की इसको सुरक्षा प्रदान करता है ठीक वैसे ही जैसे एक बच्चे को पोलियो का टिका लगाया जाता है। ऐसा करने से पौधों की जड़ों में नाइट्रोजन की गांठें आगे चलकर बनती है जिससे दो फायदे होते है। पहला पौधों में आपको खाद कम देना होगा और दूसरा पौधे में बढ़वार काफी तेजी के साथ में होती है।
| समय | उर्वरक का नाम | मात्रा (प्रति एकड़) | क्यों देना है |
|---|---|---|---|
| बुवाई के समय (बेसल डोज) | नाइट्रोजन | 20 किलो | शुरुआती वृद्धि के लिए |
| बुवाई के समय | फास्फोरस (DAP) | 40 किलो | जड़ मजबूत करने के लिए |
| बुवाई के समय | पोटाश | 20 किलो | पौधे की मजबूती और फलियों के लिए |
| बुवाई के समय | जिंक सल्फेट | 5 किलो | सूक्ष्म पोषक तत्व की पूर्ति |
| आवश्यकता होने पर | बोरोन | मिट्टी की कमी अनुसार | फूल और फल बनने में मदद |
| फूल आने से पहले | नाइट्रोजन (टॉप ड्रेसिंग) | हल्की मात्रा | पौधे की वृद्धि बनाए रखने के लिए |
सिंचाई पर सबसे अधिक ध्यान देने की जरुरत
किसान भाइयो मटर की फसल में अगर आप संचाई सही समय पर करने से चूक जाते है तो आपको इसका भारी नुकसान हो सकता है। इसलिए समय पर सिंचाई करना जरुरी है लेकिन साथ में ये भी ध्यान रखना है की फसल में पानी एक जगह पर एकत्रित ना रहने पाए। पौधों में जब भी फूलों के आने का समय होता है तब और फलियों के आने के समय में आपको सिंचाई का ख़ास ध्यान रखना होता है।
इन समय में किसान भाइयों अगर आपने अच्छे से सिंचाई नहीं की तो फलियां छोटी रह जायेंगी और उनमे बनने वाले दानों का आकार भी काफी छोटा रह जायेगा। खेत में अपनी जमा होने पर पौधों की जड़ों को नुकसान हो सकता है इसलिए आपको इसमें ड्रिप सिंचाई का इस्तेमाल करना है जिससे 20 फीसदी तक पैदावार में भी इजाफा होता है।
सिंचाई प्रबंधन (Irrigation Chart – मटर की फसल)
| समय | सिंचाई का समय | खास ध्यान |
|---|---|---|
| पहली सिंचाई | बुवाई के 5–7 दिन बाद | अगर मिट्टी में नमी है तो 15–20 दिन बाद |
| नियमित सिंचाई | हर 7–10 दिन | मौसम और मिट्टी के अनुसार |
| सबसे महत्वपूर्ण समय | फूल आने और फली भरने के समय | पानी की कमी नहीं होनी चाहिए |
| कुल सिंचाई | 4–6 बार | सामान्यतः पर्याप्त |
मटर की खेती से कितनी कमाई होती है?
किसान भाइयो ये सबसे महत्वपूर्ण सवाल है की आखिर आपको मटर की खेती करके कितना मुनाफा होने वाला है। देखिये अगर आपके खेत में आप तरीके से खेती करते है और एक एकड़ में 80 क्विंटल तक की पैदावार ले लेते है तो आपको पूरा खर्चा निकलने के बाद में आसानी से 2 लाख तक की बचत हो सकती है।
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बाजार में मटर का भाव लगभग 30 रूपये के आसपास रहता है इसलिए आपको 80 क्विंटल मटर 2 लाख 40 हजार का होता है। इसमें आप 40 हजार खर्चा अलग कर देते है तो आपको बाकि का केवल मुनाफा ही होता है।
अधिक पैदावार के खास टिप्स (मटर की खेती)
| उपाय | क्या करना है | फायदा |
|---|---|---|
| समय पर बुवाई + उन्नत किस्म | सही मौसम में अच्छी किस्म का बीज लगाएं | फसल की शुरुआती बढ़त अच्छी होती है |
| राइजोबियम + जैविक खाद | बीज उपचार में राइजोबियम और खेत में जैविक खाद डालें | मिट्टी की उर्वरता और पौधों की वृद्धि बढ़ती है |
| ड्रिप सिंचाई + मिट्टी परीक्षण | ड्रिप सिस्टम लगाएं और मिट्टी की जांच के अनुसार खाद दें | 20–30% तक अधिक पैदावार |
| समय पर निराई और कीट नियंत्रण | खेत में खरपतवार और कीटों पर समय से नियंत्रण करें | फसल का नुकसान कम होता है |
| फसल चक्र | गेहूं या चना के बाद मटर की बुवाई करें | मिट्टी की सेहत बेहतर रहती है |
| मल्चिंग (पुआल बिछाना) | खेत में पुआल या सूखी घास बिछाएं | नमी बनी रहती है और खरपतवार कम उगते हैं |
| कृषि विभाग / KVK से सलाह | स्थानीय कृषि विभाग या कृषि विज्ञान केंद्र से जानकारी लें | नई तकनीक, मुफ्त सैंपल और ट्रेनिंग मिलती है |
सबसे जरुरी बात: किसान भाइयों कोई भी फसल करने से पहले उस खेत की मिट्टी की जाँच करवाना बहुत जरुरी होता है जिसमे आप खेती करने जा रहे है। इससे आपको कौन सी किस्म की बुवाई करनी है ये पता चल जाता है और साथ में कौन कौन से उर्वरकों का आपको इस्तेमाल करना है ये भी पता चल जाता है।
इसके आलावा आपको ये भी ध्यान रखना होगा की किस्मों का चुनाव करते है ये भी ध्यान रखना होगा की आप बीजों को प्रमाणित जगहों से ही खरीदारी करें जिससे आप जो किस्म ले रहे है वही आपको मिले। किसान भाइयों उम्मीद है की आपको आज के आर्टिकल में हमारे द्वारा दी गई जानकारी अच्छी लगी होगी। इसको शेयर करे।