खीरे की फसल में लगा ग्रहण! डाउनी और पाउडरी मिल्ड्यू से फसल बचाने के 4 अचूक उपाय, वरना हाथ लगेगी सिर्फ खाली जमीन

किसान भाइयो खीरे की खेती में डाउनी मिल्ड्यू, पाउडरी मिल्ड्यू और मोजेक वायरस जैसे रोगों से आजकल भारी नुकसान हो सकता है। आज के इस आर्टिकल में जानिए इन रोगों के लक्षण क्या क्या होते है, रोकथाम के वैज्ञानिक और जैविक तरीके क्या होते है ताकि आपकी फसल सुरक्षित रहे और भरपूर पैदावार आपको मिले।

  • खीरे की खेती में फंगल अटैक की पहचान
  • मोजेक वायरस से कैसे करें बचाव
  • बीज उपचार और फफूंदनाशक स्प्रे कब करें
  • ड्रिप सिंचाई और ट्रेलिस सिस्टम से सुरक्षा

Cucumber Crop Disease: भारत के मैदानी इलाकों से लेकर राजस्थान के रेतीले धोरों तक खीरे (Cucumber) की अगेती और पछेती फसलों पर इस वक्त दोहरी मार पड़ रही है। एक तरफ बदलता मौसम और दूसरी तरफ फफूंद (Fungus) और वायरस का हमला हो रहा है। ऐसे में अगर समय रहते ध्यान नहीं दिया गया तो यह ग्रीन गोल्ड यानी खीरे की फसल देखते ही देखते खेतों में ही दम तोड़ सकती है और किसानों को फिर भारी नुकसान का सामना करना पड़ेगा।

कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि इस सीजन में नमी और गर्मी का असंतुलन डाउनी मिल्ड्यू और मोजेक वायरस जैसे रोगों के लिए फर्टाइल ग्राउंड तैयार कर रहा है जिसके चलते फसल में ये रोग लग रहे है। आपको बता दें की खीरे की फसल में लगने वाले रोग न केवल पैदावार घटाते हैं बल्कि फलों की गुणवत्ता को इतना खराब कर देते हैं कि मंडियों में किसानों को मिट्टी के भाव दाम मिलते हैं।

डाउनी मिल्ड्यू रोग से फसल ख़राब

किसान भाइयो यह रोग हवा में नमी बढ़ने पर फसल में बिजली की गति से फैलता है। इसमें पत्तियों के नीचे बैंगनी और ऊपर पीले धब्बे पड़ने लगते हैं और फिर देखते ही देखते पूरी पत्ती झुलस कर गिर जाती है।

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इससे बचने के लिए रिडोमिल गोल्ड या मैन्कोजेब का 0.2% घोल बनाकर छिड़काव करना सबसे कारगर है। साथ ही ड्रिप सिंचाई अपनाएं ताकि पत्तों पर सीधा पानी न पड़े।

पाउडरी मिल्ड्यू रोग का खतरा

किसान भाइयो राजस्थान जैसे गर्म और शुष्क क्षेत्रों में यह रोग सबसे ज्यादा देखा जाता है। इसमें पत्तों और तनों पर सफेद पाउडर जैसा जमाव होने लगता है जिससे पौधा भोजन बनाना बंद कर देता है और फिर धीरे धीरे पौधा सूखने लगता है।

किसान भाई इस रोग के उपचार के लिए सल्फर (80% WP) या नीम तेल का स्प्रे इस्तेमाल कर सकते है जो की रामबाण साबित होता है। फसल को उचित दूरी पर लगाना भी इस रोग को रोकने का एक प्राकृतिक तरीका है।

मोजेक वायरस है लाइलाज दुश्मन

खीरा मोजेक वायरस (CMV) पौधों को बौना बना देता है और पत्तियां मुड़ने लगती हैं। सबसे दुखद बात यह है कि इसका कोई सीधा इलाज नहीं है इसे केवल सफेद मक्खी और एफिड्स जैसे वाहक कीटों को मारकर रोका जा सकता है।

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अगर आपकी फसल में इस रोग के लक्षण दिखाई दे रहे है तो इसके लिए इमिडाक्लोप्रिड का प्रयोग करें और खेत में पीले चिपचिपे ट्रैप (Sticky Traps) जरूर लगाएं।

एन्थ्रेक्नोज फलों को सड़ाने वाला नासूर है

अक्सर किसान पत्तियों पर ध्यान देते हैं लेकिन एन्थ्रेक्नोज सीधे फलों पर हमला करता है। फलों पर काले धब्बे और गुलाबी फफूंद का दिखना इसका मुख्य लक्षण है। इस रोग से फसल में काफी अधिक नुकसान होता है।

किसान इससे बचाव के लिए बीज उपचार (कार्बेन्डाजिम से) अनिवार्य रूप से करें। अगर फसल में इसके लक्षण दिखें तो संक्रमित हिस्सों को तुरंत जला दें ताकि संक्रमण अन्य पौधों तक न पहुंचे।

किसान भाइयों आपको बता दें की एकीकृत रोग प्रबंधन (IDM) ही खेती का भविष्य है। सिर्फ रसायनों पर निर्भर न रहकर ट्राइकोडर्मा और स्यूडोमोनास जैसे जैविक फफूंदनाशकों का नियमित इस्तेमाल करें।

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News Desk

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