हरियाणा JBT शिक्षकों के प्रमोशन का अंतिम मौका, 30 सितंबर तक रिकॉर्ड न भेजा तो नपेंगे अधिकारी
रेवाड़ी, 24 सितंबर। हरियाणा के सरकारी प्राथमिक विद्यालयों में कार्यरत जेबीटी और सीएंडवी शिक्षकों के टीजीटी पदों पर प्रमोशन को लेकर शिक्षा निदेशालय ने अंतिम तारीख तय कर दी है। प्राथमिक शिक्षा निदेशालय ने प्रदेश के सभी जिला मौलिक शिक्षा अधिकारियों (DEEO) को निर्देश दिए हैं कि वंचित रहे पात्र शिक्षकों के प्रमोशन केस 30 सितंबर तक हर हाल में मुख्यालय पहुंचाए जाएं। यदि किसी जिले से पात्र शिक्षक का नाम छूटता है या रिकॉर्ड भेजने में देरी होती है तो संबंधित DEEO पर सीधी प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी।
निदेशालय के इस सख्त आदेश के बाद रेवाड़ी, महेंद्रगढ़ और नारनौल सहित प्रदेशभर के जिला शिक्षा कार्यालयों में रिकॉर्ड खंगालने की प्रक्रिया तेज हो गई है। अधिकारियों को साफ निर्देश हैं कि वे पात्र शिक्षकों के मामलों की हार्ड कॉपी दस्ती (बाय हैंड) और सॉफ्ट कॉपी निर्धारित ईमेल पर 30 सितंबर तक अनिवार्य रूप से जमा कराएं।
पूरा मामला क्या है?
प्रदेश में लंबे समय से प्राथमिक शिक्षक (जेबीटी) और भाषा एवं कला शिक्षक (सीएंडवी) प्रशिक्षित स्नातक शिक्षक (टीजीटी) बनने की राह देख रहे हैं। विभाग ने इससे पहले भी विभिन्न विषयों के लिए प्रमोशन प्रक्रिया चलाई थी, लेकिन जिलों से समय पर केस न पहुंचने और कुछ विसंगतियों के कारण कई वरिष्ठ शिक्षक लाभ से वंचित रह गए थे। अब विभाग ने छूटे हुए सभी शिक्षकों को अपनी वरिष्ठता के आधार पर पदोन्नति पाने का यह आखिरी मौका दिया है।
प्रमोशन के तहत जेबीटी और सीएंडवी शिक्षकों को टीजीटी अंग्रेजी, हिंदी, गणित, साइंस, संस्कृत, पंजाबी, होम साइंस और उर्दू के पदों पर पदोन्नत किया जाना है।
पात्रता के कड़े नियम, HTET पास होना अनिवार्य
शिक्षा विभाग के आदेशों के अनुसार, केवल उन्हीं शिक्षकों के केस मुख्यालय भेजे जाएंगे जिन्होंने 31 मार्च तक अपनी आवश्यक शैक्षणिक योग्यताएं पूरी कर ली हैं। इसके साथ ही संबंधित विषय में हरियाणा शिक्षक पात्रता परीक्षा (HTET) पास होना अनिवार्य शर्त रखी गई है।
विभाग ने स्पष्ट किया है कि जिन शिक्षकों का प्रमोशन केस वर्ष 2025-26 के दौरान पहले ही भेजा जा चुका है उन्हें दोबारा पूरी फाइल देने की आवश्यकता नहीं है। हालांकि जिन शिक्षकों के मामले 2025 से पहले भेजे गए थे उनकी अपडेटेड एसीआर (वार्षिक गोपनीय रिपोर्ट) समरी शीट और नया अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) अनिवार्य रूप से संलग्न करना होगा।
प्रमोशन न लेने वालों से लिया जाएगा शपथ-पत्र
कई शिक्षक अपनी वर्तमान पोस्टिंग या व्यक्तिगत कारणों से प्रमोशन लेने से इनकार कर देते हैं। विभाग ने इस बार ऐसे मामलों के लिए भी नियम कड़े कर दिए हैं। जो शिक्षक पदोन्नति नहीं लेना चाहते, उनसे लिखित सहमति और शपथ-पत्र लेकर उनके मामले को फॉरगो केस के रूप में मुख्यालय भेजा जाएगा। इससे भविष्य में कोई शिक्षक यह दावा नहीं कर सकेगा कि उसे मौका दिए बिना छोड़ दिया गया था।
लापरवाही पर DEEO की तय होगी निजी जवाबदेही
निदेशालय ने जिला अधिकारियों को चेतावनी दी है कि प्रमोशन प्रक्रिया में किसी भी स्तर पर ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। यदि मुख्यालय स्तर पर सूची जारी होने के बाद कोई पात्र शिक्षक छूटने का मामला सामने आया या मामला अदालत में गया तो संबंधित जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी निजी तौर पर जिम्मेदार होंगे और उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
जिलों में 30 सितंबर तक सभी आपत्तियों और दस्तावेजों के सत्यापन का काम पूरा कर मुख्यालय भेजने की तैयारी चल रही है ताकि अक्टूबर महीने में पदोन्नति की अंतिम सूची जारी की जा सके।
