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भिवानी में बाजरा किसानों का फूटा गुस्सा! MSP से 975 रुपये कम मिल रहा भाव, पंचायत में दी आंदोलन की चेतावनी

भिवानी के लोहारू में बाजरा किसानों ने पंचायत बुलाकर मार्केट कमेटी को ज्ञापन सौंपा। MSP से 975 रुपये तक कम भाव, नमी के नाम पर खरीद टाली जा रही, पिछले साल का भावांतर तक बकाया। किसान यूनियन ने दी आंदोलन की चेतावनी।
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भिवानी में बाजरा किसानों का फूटा गुस्सा! MSP से 975 रुपये कम मिल रहा भाव, पंचायत में दी आंदोलन की चेतावनी

भिवानी: हरियाणा के भिवानी जिले में बाजरा उत्पादक किसानों का धैर्य अब जवाब देने लगा है। सरकार ने बाजरे का समर्थन मूल्य तो तय कर दिया लेकिन मंडियों में सरकारी खरीद अब तक ठीक से शुरू न होने से किसानों को अपनी मेहनत की फसल कौड़ियों के भाव बेचनी पड़ रही है। जिले के लोहारू क्षेत्र में तो नौबत यहां तक आ गई कि किसानों को पंचायत बुलाकर मार्केट कमेटी अध्यक्ष को सीधे ज्ञापन सौंपना पड़ा।

पिछले साल का भावांतर तक नहीं मिला

लोहारू में हुई इस पंचायत में भारतीय किसान यूनियन के जिला प्रधान मेवा सिंह आर्य ने साफ शब्दों में कहा कि सरकार बाजरे की सरकारी खरीद की व्यवस्था तुरंत करे। लेकिन सबसे चौंकाने वाली बात यह सामने आई कि पिछले साल की बाजरा भावांतर योजना की राशि तक कई किसानों के खाते में अभी तक नहीं पहुंची है। यानी एक तरफ नई फसल बेचने की चिंता दूसरी तरफ पुराना बकाया भी अटका पड़ा है। आर्य ने चेतावनी दी है कि अगर मांगें पूरी नहीं हुईं तो किसान यूनियन निर्णायक आंदोलन का रास्ता अपनाने को मजबूर होगी।

नमी के नाम पर लौटाई जा रही फसल

भिवानी से सटे चरखी दादरी में भी तस्वीर अलग नहीं है। मंडियों में बाजरा और कपास की आवक शुरू तो हो चुकी है लेकिन किसानों को सरकारी दाम नहीं मिल रहे। किसानों का कहना है कि खेत से फसल निकालकर जब वे मंडी पहुंचते हैं तो ज्यादा नमी का हवाला देकर खरीद टाल दी जाती है। सरकारी खरीद के लिए 12 प्रतिशत नमी की सीमा तय है जिसे पूरा करने के लिए किसानों को फसल दोबारा सुखानी पड़ती है और इस देरी में मजदूरी से लेकर समय तक हर तरफ अतिरिक्त खर्च उनकी जेब से जा रहा है।

MSP और मंडी भाव में हजार रुपये तक का फासला

आंकड़े इस संकट की असली तस्वीर बयां करते हैं। हरियाणा में किसानों को धान MSP से करीब 561 रुपये और बाजरा करीब 975 रुपये प्रति क्विंटल कम दाम पर बेचना पड़ रहा है। रेवाड़ी में तो बाजरे का भाव 2,000 से 2,300 रुपये प्रति क्विंटल के बीच सिमटा हुआ है जबकि तय MSP इससे काफी ऊपर है। हिसार में किसानों का कहना है कि बाजरे का MSP गेहूं से 315 रुपये ज्यादा तय किया गया है फिर भी खरीद को लेकर सरकार और आढ़तियों, दोनों की तरफ से स्पष्टता नहीं मिल रही।

पोर्टल की तकनीकी अड़चनें भी बनीं मुसीबत

व्यापारी नेता बजरंग गर्ग के मुताबिक पोर्टल आधारित खरीद व्यवस्था में तकनीकी दिक्कतें किसानों की परेशानी और बढ़ा रही हैं। नतीजा यह कि फसल बेचने के लिए किसानों को मंडियों में कई-कई दिन तक इंतजार करना पड़ रहा है जबकि सरकारी खरीद एजेंसियां अब तक निर्णायक कदम उठाने से बचती दिख रही हैं।

किसान संगठनों की मांग सीधी है की सरकारी खरीद तुरंत शुरू हो, MSP पर ही फसल खरीदी जाए और पिछले साल का बकाया भावांतर बिना देरी जारी किया जाए। अगर जल्द फैसला नहीं हुआ तो भिवानी और आसपास के जिलों में आंदोलन की सुगबुगाहट और तेज हो सकती है जिसके संकेत लोहारू की पंचायत में पहले ही मिल चुके हैं।

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