हरियाणा के प्रशासनिक गलियारों में उस वक्त हड़कंप मच गया जब केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने सरकारी धन के दुरुपयोग और करोड़ों रुपये के बड़े घोटाले के मामले में एक बेहद सख्त और बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया। सीबीआई ने बुधवार को पंचकूला की विशेष सीबीआई अदालत के समक्ष इस बहुचर्चित मामले में अपनी तीसरी चार्जशीट (आरोप पत्र) दाखिल कर दी है।
इस बार जांच एजेंसी के रडार पर कोई छोटे-मोटे कर्मचारी नहीं, बल्कि हरियाणा कैडर के 6 वरिष्ठ आईएएस (IAS) अधिकारी समेत कुल 19 लोग आए हैं। इन सभी के खिलाफ सरकारी खजाने को चूना लगाने और वित्तीय नियमों को ताक पर रखने के पुख्ता सबूत मिलने का दावा किया जा रहा है।
यह पूरा मामला हरियाणा सरकार के विभिन्न विभागों और सरकारी संगठनों के उस फंड से जुड़ा है, जिसे रखरखाव और प्रबंधन के लिए आईडीएफसी फर्स्ट बैंक (IDFC First Bank) और एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक (AU Small Finance Bank) में जमा कराया गया था।
आरोप है कि आरोपियों ने आपस में मिलकर एक गहरी आपराधिक साजिश रची और बैंकों में रखे इस सरकारी पैसे का जमकर दुरुपयोग और हेराफेरी की। जब इस वित्तीय अनियमितता की भनक सरकार को लगी, तो मामले की गंभीरता को देखते हुए इसकी कमान देश की सबसे बड़ी जांच एजेंसी सीबीआई को सौंपी गई थी।
सीबीआई की इस नई चार्जशीट में नामजद किए गए सभी 19 आरोपियों पर बेहद गंभीर और गैर-जमानती धाराएं लगाई गई हैं। जांच एजेंसी ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत आपराधिक साजिश रचने, धोखाधड़ी करने, सरकारी दस्तावेजों और खातों में हेरफेर करने, फर्जी कागजात तैयार करने, सबूतों को मिटाने और आपराधिक विश्वासघात जैसी गंभीर धाराओं को शामिल किया है। इसके साथ ही, वरिष्ठ नौकरशाहों पर पद का दुरुपयोग करने और रिश्वतखोरी के आरोपों के तहत भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (Prevention of Corruption Act) की धाराएं भी लगाई गई हैं।
इस तीसरी चार्जशीट के दाखिल होने के बाद हरियाणा की राजनीति और ब्यूरोक्रेसी में भूचाल आना तय माना जा रहा है, क्योंकि जिन 6 आईएएस अधिकारियों के नाम इसमें शामिल हैं, वे प्रदेश के कई महत्वपूर्ण विभागों में बड़े पदों पर रह चुके हैं।
जांच एजेंसी ने अदालत को बताया कि इस घोटाले की जड़ें बहुत गहरी हैं और इसमें बैंक अधिकारियों से लेकर बिचौलियों तक का एक बड़ा सिंडिकेट शामिल था। फिलहाल, पंचकूला की विशेष सीबीआई अदालत ने चार्जशीट को रिकॉर्ड पर ले लिया है और आने वाले दिनों में नामजद अधिकारियों और अन्य आरोपियों को कोर्ट में पेशी के लिए समन जारी किए जा सकते हैं। इस कार्रवाई ने साफ कर दिया है कि भ्रष्टाचार के मामलों में अब किसी भी रसूखदार को बख्शा नहीं जाएगा।
