DAP Shortage Haryana: हरियाणा में डीएपी की किल्लत और धान खरीद में देरी से फूटा किसानों का गुस्सा, महापंचायत का ऐलान
धान की अगेती आवक के बावजूद सरकारी खरीद ठप।
ऑल इंडिया किसान खेत मजदूर संगठन का बड़ा फैसला।
नमी और बेमौसम बारिश से फसल खराब होने की आशंका।
झज्जर/बहादुरगढ़, 23 सितंबर। हरियाणा में रबी सीजन की बुवाई से ठीक पहले डीएपी खाद की भारी किल्लत और खरीफ फसलों की सरकारी खरीद में हो रही देरी ने अन्नदाता की चिंता बढ़ा दी है। सूबे की मंडियों में धान की अगेती फसल (जल्दी पकने वाली किस्में) पहुंचने लगी है लेकिन सरकारी कांटों पर तौल शुरू न होने से किसान आढ़तियों और बिचौलियों के हाथों औने-पौने दाम पर फसल बेचने को मजबूर हैं। इस दोहरे संकट को लेकर ऑल इंडिया किसान खेत मजदूर संगठन (AIKKMS) ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए आगामी 26 अक्टूबर को एक बड़ी महापंचायत बुलाने का निर्णय लिया है।
फसल तैयार, सरकारी खरीद का इंतजार
हरियाणा के झज्जर और बहादुरगढ़ क्षेत्र समेत पूरे प्रदेश की मंडियों में धान की आवक तेजी से शुरू हो चुकी है। हालांकि सरकार ने धान की आधिकारिक खरीद 1 अक्टूबर से करने का शेड्यूल तय किया है। किसान संगठनों का कहना है कि जब जून के मध्य से बुवाई की अनुमति दी गई थी, तो 90 दिनों का चक्र पूरा होने पर 15 सितंबर तक फसल कटकर तैयार हो चुकी थी। खरीद में 15 दिनों की यह देरी किसानों पर भारी पड़ रही है क्योंकि खुले आसमान के नीचे पड़ी फसल में नमी बढ़ने और बेमौसम बारिश से नुकसान का खतरा बना हुआ है।
डीएपी खाद के लिए लंबी कतारें
धान की कटाई के तुरंत बाद सरसों और गेहूं की बुवाई के लिए डीएपी (डाई-अमोनियम फॉस्फेट) खाद की सबसे ज्यादा जरूरत होती है। स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार, बहादुरगढ़ और आसपास के ग्रामीण इलाकों में सरकारी खाद केंद्रों पर सुबह से ही लंबी कतारें लग रही हैं। किसानों का आरोप है कि उन्हें जरूरत के मुताबिक खाद नहीं मिल पा रही है, जिससे आगामी रबी सीजन की बुवाई पिछड़ने का डर सता रहा है।
किसान नेताओं ने दी महाआंदोलन की चेतावनी
ऑल इंडिया किसान खेत मजदूर संगठन के पदाधिकारियों ने गांव-गांव जाकर जनसंपर्क अभियान शुरू कर दिया है। संगठन के नेताओं का कहना है कि कृषि विभाग और सरकार के ऊंचे दावों के उलट जमीनी हकीकत बेहद परेशान करने वाली है। खरीद में देरी और खाद ब्लैक में बिकने के आरोपों के बीच किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन ने तुरंत पुख्ता इंतजाम नहीं किए, तो 26 अक्टूबर की महापंचायत से एक राष्ट्रव्यापी आंदोलन की रूपरेखा तैयार की जाएगी।
आगे क्या होगा?
एक तरफ किसान जहां 20 सितंबर से ही खरीद शुरू कराने के लिए नेशनल हाईवे तक जाम कर रहे हैं वहीं सरकार 1 अक्टूबर की डेडलाइन पर कायम है। आने वाले हफ्तों में मंडियों में धान की आवक और बढ़ेगी जिससे बारदाने की कमी और उठान की समस्या गहरा सकती है। यदि कृषि विभाग ने तुरंत जिलों में अतिरिक्त डीएपी रैक उपलब्ध नहीं कराए, तो खाद संकट प्रशासनिक कानून-व्यवस्था के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है।
