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Hisar Court Verdict: हिसार में नाबालिग छात्रा से रेप के दोषी को 20 साल की कैद, कोर्ट ने लगाया भारी जुर्माना

हिसार कोर्ट ने 11वीं की नाबालिग छात्रा से दुष्कर्म के मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए दोषी को 20 साल की कड़ी सजा दी है। जज सुनील जिंदल की अदालत ने दोषी पर ₹1.05 लाख का जुर्माना भी लगाया। जानिए पूरा मामला। 
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हिसार में नाबालिग छात्रा से रेप के दोषी को 20 साल की कैद, कोर्ट ने लगाया भारी जुर्माना

हिसार/हरियाणा, 23 सितंबर। हरियाणा की हिसार जिला अदालत ने नाबालिग लड़कियों के खिलाफ होने वाले गंभीर अपराधों पर सख्त रुख अपनाते हुए एक बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने 11वीं कक्षा की एक छात्रा को अगवा कर उसके साथ दुष्कर्म करने के मामले में आरोपी को दोषी करार देते हुए 20 साल सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही अदालत ने दोषी पर आर्थिक जुर्माना भी तय किया है।

जुर्माना न भरने पर बढ़ेगी सजा

फास्ट ट्रैक कोर्ट के अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश सुनील जिंदल की अदालत ने मामले की अंतिम सुनवाई करते हुए दोषी पर 1 लाख 5 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। पुलिस विभाग से मिली जानकारी के अनुसार यदि दोषी इस जुर्माने की राशि को जमा नहीं करता है तो उसे अतिरिक्त जेल काटनी होगी। यह पूरा मामला साल 2022 से कोर्ट में विचाराधीन था जिस पर पुलिस की पुख्ता पैरवी के बाद अब फैसला आया है।

घर से अगवा कर चंडीगढ़ ले गया था दोषी

नारनौंद थाना पुलिस में दर्ज शिकायत और अदालती दस्तावेजों के मुताबिक, घटना 9 मई 2022 की रात की है। पीड़िता अपने घर पर सो रही थी तभी दोषी ने उसकी खिड़की खटखटाई और उसे बहला-फुसलाकर बाहर बुला लिया। वह पीड़िता को पहले अपनी बुआ के घर ले गया और फिर बाइक से रोहतक रेलवे स्टेशन पहुंचा। वहां से वह नाबालिग को ट्रैन में बैठाकर चंडीगढ़ ले गया जहां एक सार्वजनिक पार्क में उसने इस घिनौनी वारदात को अंजाम दिया।

जाखल स्टेशन पर सूझबूझ से बची पीड़िता

वारदात के बाद जब दोषी पीड़िता को वापस लेकर लौट रहा था तब ट्रेन जाखल रेलवे स्टेशन पर रुकी। वहां पीड़िता ने साहस दिखाते हुए प्लेटफॉर्म पर मौजूद राजकीय रेलवे पुलिस (GRP) को अपनी आपबीती बता दी। रेलवे पुलिस ने तुरंत एक्शन लेते हुए दोषी को दबोच लिया और इसकी सूचना नारनौंद थाना पुलिस व पीड़िता के परिजनों को दी। जांच में यह भी सामने आया कि दोषी इससे दो महीने पहले भी पीड़िता को ब्लैकमेल कर प्रताड़ित कर रहा था।

साक्ष्यों और बयानों के आधार पर न्याय

नारनौंद थाना पुलिस की जांच टीम ने कोर्ट के समक्ष पीड़िता के धारा 164 के तहत दर्ज बयान, मेडिकल रिपोर्ट और वैज्ञानिक साक्ष्य पेश किए। अदालत ने इन पुख्ता सबूतों को सही मानते हुए माना कि दोषी किसी भी तरह की नरमी का हकदार नहीं है। पॉक्सो (Protection of Children from Sexual Offences) कानून के तहत दी गई इस 20 साल की सजा से समाज में ऐसे अपराधियों के बीच एक कड़ा संदेश जाएगा।
 

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