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Nuh Court Verdict: नूंह में नशीली कफ सिरप तस्करी के दोषी पर कोर्ट का बड़ा फैसला, मिली 12 साल की जेल और 1.50 लाख जुर्माना

Nuh News Today: नूंह जिला अदालत के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश संदीप चौहान की कोर्ट ने प्रतिबंधित कोडीन कफ सिरप तस्करी के दोषी इरफान को 12 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। कोर्ट ने दोषी पर 1.50 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है। जानिए 2024 के इस पूरे मामले और अदालती फैसले की विस्तृत रिपोर्ट।
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नूंह में नशीली कफ सिरप तस्करी के दोषी पर कोर्ट का बड़ा फैसला, मिली 12 साल की जेल और 1.50 लाख जुर्माना

नूंह: हरियाणा के नूंह (मेवात) जिले से नशे के अवैध कारोबार और नशीली दवाओं की तस्करी के खिलाफ एक बेहद सख्त और ऐतिहासिक अदालती फैसला सामने आया है। नूंह जिला अदालत के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश (Additional Sessions Judge) संदीप चौहान की कोर्ट ने प्रतिबंधित नशीली कफ सिरप की भारी मात्रा व्यावसायिक उपयोग के लिए अवैध रूप से अपने पास रखने के मामले में एक तस्कर को दोषी करार दिया है। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने, गवाहों के बयान और पुलिस द्वारा पेश किए गए अकाट्य वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर दोषी इरफान को 12 साल के कठोर कारावास (कठिन जेल) की सजा सुनाई है।

इस ऐतिहासिक फैसले के साथ ही अदालत ने दोषी इरफान पर 1 लाख 50 हजार रुपये का भारी-भरकम आर्थिक जुर्माना भी ठोंका है। कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि यदि दोषी जुर्माने की राशि समय पर सरकारी खजाने में जमा करने में विफल रहता है, तो उसे निर्धारित मुख्य सजा के अतिरिक्त भी जेल की अवधि काटनी होगी।

साल 2024 का है मामला: नूंह-अलवर रोड पर दबोचा गया था तस्कर

अदालत में चले इस पूरे आपराधिक मुकदमे और बिछौर थाना पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, यह मामला 21 अगस्त 2024 का है। बिछौर थाना पुलिस की एक टीम को विश्वसनीय मुखबिर के माध्यम से गुप्त सूचना मिली थी कि इरफान नाम का व्यक्ति अपनी व्यक्तिगत गाड़ी में प्रतिबंधित और नशीली कफ सिरप की एक बड़ी खेप लेकर सप्लाई करने के लिए जा रहा है।

सूचना के आधार पर पुलिस ने तुरंत नाकाबंदी की और नूंह-अलवर रोड पर स्थित तिरवाड़ा गांव के पास चिन्हित गाड़ी को सफलतापूर्वक रोक लिया। कानूनी नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए पुलिस ने तुरंत मौके पर ड्यूटी मजिस्ट्रेट को आमंत्रित किया और उनकी प्रत्यक्ष मौजूदगी में गाड़ी की सघन तलाशी शुरू की।

गाड़ी से बरामद हुई थीं प्रतिबंधित कोडीन सिरप की 240 बोतलें

जब ड्यूटी मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में गाड़ी के पिछले हिस्से और छिपे हुए कोनों की तलाशी ली गई, तो पुलिस टीम दंग रह गई। गाड़ी के भीतर से विंग्स (Wings) कंपनी द्वारा निर्मित 'कोडीन फॉस्फेट' (Codeine Phosphate) युक्त प्रतिबंधित कफ सिरप की कुल 240 बोतलें बरामद की गईं। चूंकि कोडीन युक्त कफ सिरप का उपयोग बड़े पैमाने पर युवाओं द्वारा नशे के विकल्प के रूप में किया जा रहा है, इसलिए सरकार ने इसके अनधिकृत भंडारण और बिना पर्चे की बिक्री पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा रखा है।

जब पुलिस ने आरोपी इरफान से इतनी बड़ी मात्रा में कफ सिरप रखने से जुड़े डॉक्टर के पर्चे, वैध ड्रग लाइसेंस या मैन्युफैक्चरिंग बिल की मांग की, तो वह कोई भी कानूनी दस्तावेज पेश नहीं कर सका। इसके बाद पुलिस ने प्रतिबंधित माल को जब्त कर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया और एनडीपीएस (NDPS) एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया।

इतनी बड़ी मात्रा मिलना तस्करी के इरादे का पुख्ता प्रमाण

अदालत में मुकदमे की अंतिम सुनवाई और बहस के दौरान दोषी इरफान के वकील ने कोर्ट से नरमी बरतने की गुहार लगाई थी। हालांकि, अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश संदीप चौहान ने बचाव पक्ष की दलीलों को सिरे से खारिज कर दिया। अदालत ने अपने लिखित फैसले में बेहद गंभीर टिप्पणी करते हुए कहा कि किसी व्यक्ति के पास से व्यावसायिक मात्रा (Commercial Quantity) में ऐसी प्रतिबंधित नशीली दवाइयों का बरामद होना साफ तौर पर यह दर्शाता है कि यह महज निजी इस्तेमाल के लिए नहीं, बल्कि समाज में नशे के अवैध वितरण और तस्करी के इरादे से ले जाया जा रहा था।

कोर्ट ने रेखांकित किया कि नूंह और आसपास के क्षेत्रों में युवाओं के भविष्य को खोखला करने वाले नशीले पदार्थों के काले कारोबार पर लगाम लगाने के लिए ऐसे अपराधियों के प्रति सख्ती जरूरी है।

नरमी दिखाने से समाज में जाएगा गलत संदेश

माननीय न्यायाधीश ने सजा का ऐलान करते हुए साफ शब्दों में कहा कि नशीली दवाओं की तस्करी जैसे जघन्य और सामाजिक रूप से विनाशकारी मामलों में दोषियों के प्रति किसी भी प्रकार की उदारता या नरमी नहीं दिखाई जा सकती। यदि ऐसे गंभीर मामलों में अपराधियों को कम सजा देकर छोड़ दिया गया, तो इससे समाज के असामाजिक तत्वों और नशा माफियाओं के हौसले और अधिक बुलंद होंगे और न्याय प्रणाली का डर पूरी तरह समाप्त हो जाएगा, जिससे समाज में एक बेहद गलत संदेश जाएगा।

इसी कड़े रुख के कारण अदालत ने कानून में निर्धारित अधिकतम सीमाओं को ध्यान में रखते हुए दोषी इरफान को किसी भी प्रकार की कोई रियायत या पैरोल लाभ न देते हुए सीधे 12 साल की लंबी जेल की सजा मुकर्रर की है। फैसले के तुरंत बाद पुलिस ने दोषी को कड़े पहरे के बीच न्यायिक हिरासत में लेकर नूंह जेल भेज दिया।

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