Viratbharat_Logo

रेवाड़ी में ज़मीन हड़पने का बड़ा फर्जीवाड़ा: असली मालकिन की जगह दूसरी औरत खड़ा कर कराई रजिस्ट्री, 3 गिरफ्तार

रेवाड़ी के नैहचाना में फर्जी महिला और फर्जी आधार-पैन कार्ड के सहारे ज़मीन की रजिस्ट्री कराने वाले गिरोह के 3 आरोपियों को बावल पुलिस ने गिरफ्तार किया है। पढ़ें पूरी खबर -
 | 
रेवाड़ी में ज़मीन हड़पने का बड़ा फर्जीवाड़ा: असली मालकिन की जगह दूसरी औरत खड़ा कर कराई रजिस्ट्री, 3 गिरफ्तार

रेवाड़ी, 23 सितंबर। हरियाणा के रेवाड़ी जिले की बावल थाना पुलिस ने ज़मीन हड़पने और फर्जी पहचान पत्र बनाकर धोखाधड़ी से रजिस्ट्री कराने के एक बड़े और सनसनीखेज मामले में तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों ने आपराधिक साजिश रचकर असली ज़मीन मालकिन की जगह दूसरी महिला और उसके पति की जगह मुख्य आरोपी को खड़ा कर फर्जी आधार व पैन कार्ड के सहारे ज़मीन का हस्तांतरण (रजिस्ट्री) कराने की कोशिश की थी।

पुलिस ने मुख्य आरोपी को रेवाड़ी जेल से प्रोडक्शन वारंट पर लेकर गिरफ्तार किया जिसकी निशानदेही पर फरीदाबाद और बिहार से जुड़े अन्य दो सहयोगियों को भी धर दबोचा गया है।

नैहचाना गांव की ज़मीन पर थी बुरी नज़र

पूरा मामला बावल तहसील के अंतर्गत आने वाले गांव नैहचाना का है। गांव निवासी पीड़ित महिला आशा देवी ने 29 अप्रैल को बावल थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। आशा देवी का कहना था कि वह अपनी ज़मीन की रजिस्ट्री कराने बावल तहसील के सब-रजिस्ट्रार कार्यालय गई ही नहीं थी फिर भी धोखाधड़ी से उसकी अचल संपत्ति किसी अन्य के नाम हस्तांतरित करने और आगे बेचने का प्रयास किया गया।

जांच में पुलिस को वर्ष 2022 की जमाबंदी मिली जिसमें आशा और उसकी बहन उषा (पुत्रियां मुंशी सिंह) ही ज़मीन की असली मालिक और काबिज पाई गईं। पुलिस ने तहसील से वसीका नंबर 9496 (23 फरवरी 2026) व 3650 (19 मार्च 2026) हासिल किए। इस फर्जीवाड़े के आधार पर दर्ज कराया गया इंतकाल (नंबर 2909) बाद में डीसी स्तर से खारिज पाया गया।

असली मालिक गायब, फर्जी पहचान और 20 लाख का लेन-देन

पुलिस जांच में बड़ा खुलासा हुआ कि आरोपियों ने आशा देवी की जगह किसी दूसरी अनजान महिला को खड़ा किया था। वहीं आशा देवी के पति शक्ति सिंह की जगह मुख्य आरोपी महिपाल खुद खड़ा हुआ था। इन लोगों ने पीड़ितों के नाम से फर्जी आधार कार्ड और पैन कार्ड तैयार करवा रखे थे।

जांच के दौरान पुलिस को आरोपी महिपाल द्वारा महेश शर्मा और सुरेश नामक व्यक्तियों के साथ किया गया इकरारनामा और बैंक स्टेटमेंट भी मिले। इस फर्जी इकरारनामे में 20 लाख रुपये के लेन-देन का जिक्र था जिसमें से 4 लाख रुपये नकद और 16 लाख रुपये (6 लाख + 10 लाख) आरटीजीएस (RTGS) के ज़रिए ट्रांसफर किए गए थे।

रेवाड़ी जेल से प्रोडक्शन वारंट पर लाया गया मुख्य आरोपी

मामले में मुख्य आरोपी महिपाल (निवासी राजनौता, कोटपूतली-बहरोड़, राजस्थान) पहले से ही बावल थाने के एक अन्य आपराधिक मुकदमे में रेवाड़ी की जिला जेल में बंद था। बावल पुलिस ने अदालत से उसका प्रोडक्शन वारंट हासिल किया और पूछताछ के बाद इस मामले में उसकी औपचारिक गिरफ्तारी दिखाई।

महीपाल से मिली कड़ियों और उसकी निशानदेही के आधार पर पुलिस ने फर्जीवाड़े में शामिल बबीता (निवासी पलवली, जिला फरीदाबाद) और राजकुमार उर्फ राजू (निवासी कटरिया, जिला कटिहार, बिहार) को भी पुख्ता सबूतों के आधार पर गिरफ्तार कर लिया।

आम लोगों और संपत्ति खरीदारों पर असर

एनसीआर से सटे रेवाड़ी और बावल इंडस्ट्रियल बेल्ट में ज़मीन की कीमतें आसमान छू रही हैं जिससे कागज़ात में हेरफेर करने वाले अंतर्राज्यीय गिरोह सक्रिय हैं। तहसील स्तर पर बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन और आधार ऑथेंटिकेशन के बिना इस तरह फर्जी पहचान बनाकर रजिस्ट्री होना प्रशासन के लिए भी बड़ा अलर्ट है। ज़मीन खरीदारों और आम लोगों को सलाह दी जाती है कि किसी भी सौदे से पहले रिवेन्यू रिकॉर्ड, जमाबंदी और बायोमेट्रिक रिकॉर्ड की पूरी जांच कर लें।

आगे क्या होगा इस केस में?

पुलिस ने गिरफ्तार किए गए तीनों आरोपियों (महिपाल, बबीता और राजकुमार) को अदालत में पेश कर न्यायिक हिरासत (जेल) में भेज दिया है। मामले में नामजद सूरज, रोहतास कुमार और फर्जी महिला बनकर पेश हुई अन्य अज्ञात महिलाओं की तलाश में पुलिस दबिश दे रही है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि फर्जी आधार-पैन कार्ड तैयार करने वाले गिरोह और संबंधित दस्तावेज लेखकों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।

Around the web