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Rewari Farmers Protest: रेवाड़ी अनाज मंडी में बाजरा खरीद को लेकर हंगामा, तालाबंदी करने पहुंचे किसानों और पुलिस में तीखी झड़प

हरियाणा के रेवाड़ी में न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर बाजरे की सरकारी खरीद शुरू न होने से नाराज किसानों ने नई अनाज मंडी के गेट पर तालाबंदी करने का प्रयास किया। इस दौरान भारतीय किसान यूनियन (चढूनी) के कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच तीखी झड़प और धक्का-मुक्की हुई। जानिए क्या हैं किसानों की मांगें और प्रशासन का इस पर क्या रुख है।

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रेवाड़ी अनाज मंडी में बाजरा खरीद को लेकर हंगामा, तालाबंदी करने पहुंचे किसानों और पुलिस में तीखी झड़प

रेवाड़ी: हरियाणा में खरीफ फसलों की सरकारी खरीद शुरू होने से पहले ही मंडियों में विरोध प्रदर्शन और हंगामे की स्थिति पैदा हो गई है। रेवाड़ी की नई अनाज मंडी में न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर बाजरे की सरकारी खरीद तुरंत शुरू करने की मांग को लेकर सोमवार को भारतीय किसान यूनियन (चढूनी) के बैनर तले किसानों ने जोरदार प्रदर्शन किया। किसान संगठन के कार्यकर्ता पूर्व निर्धारित अल्टीमेटम के तहत अनाज मंडी के मुख्य गेट पर ताला जड़ने पहुंचे थे, जहां पहले से ही भारी पुलिस बल तैनात था।

जैसे ही किसानों ने मंडी के लोहे के गेट पर सांकल डालकर ताला लगाने का प्रयास किया, वहां मौजूद पुलिस कर्मचारियों ने उन्हें बलपूर्वक रोक दिया। गेट बंद करने और ताला लगाने को लेकर पुलिस और किसान नेताओं के बीच करीब 15 मिनट तक तीखी बहस, धक्का-मुक्की और झड़प हुई। इस दौरान किसान नेताओं ने पुलिस प्रशासन पर महिला किसान पदाधिकारियों के साथ भी दुर्व्यवहार और धक्का-मुक्की करने का गंभीर आरोप लगाया है।

अल्टीमेटम खत्म होने पर उग्र हुए किसान, गेट पर ही शुरू किया धरना

भाकियू (चढूनी) के जिला पदाधिकारियों ने बताया कि क्षेत्र के खेतों से बाजरे की अगेती फसल कटकर मंडियों में पहुंचनी शुरू हो चुकी है, लेकिन सरकार की तरफ से अभी तक एमएसपी पर सरकारी एजेंसियों की खरीद प्रक्रिया शुरू नहीं की गई है। किसान यूनियन ने एक सप्ताह पहले ही जिला प्रशासन के माध्यम से सरकार को ज्ञापन सौंपकर 20 सितंबर तक सरकारी खरीद शुरू करने का अल्टीमेटम दिया था।

किसानों ने साफ चेतावनी दी थी कि यदि दी गई समयसीमा के भीतर बाजरे की खरीद शुरू नहीं की गई, तो 21 सितंबर को अनाज मंडी के गेट पर तालाबंदी कर अनिश्चितकालीन आंदोलन शुरू किया जाएगा। सोमवार को जब सरकार की तरफ से कोई सकारात्मक कदम नहीं दिखा, तो नाराज किसान हाथों में ताले और झंडे लेकर मंडी पहुंच गए। पुलिस द्वारा तालाबंदी से रोके जाने के बाद सभी प्रदर्शनकारी किसान मंडी के गेट के सामने ही जमीन पर दरी बिछाकर धरने पर बैठ गए और सरकार व प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।

बाजार में ₹900 प्रति क्विंटल का नुकसान उठाने को मजबूर किसान

धरने पर बैठे किसान नेताओं ने स्थानीय आढ़तियों और निजी व्यापारियों पर किसानों के शोषण का आरोप लगाया। यूनियन के जिला प्रधान समय सिंह ने मीडिया को संबोधित करते हुए कहा कि मंडियों में बाजरे की आवक लगातार बढ़ रही है, लेकिन सरकारी कांटों के चालू न होने का फायदा निजी व्यापारी उठा रहे हैं। वर्तमान में प्राइवेट डीलर और आढ़ती किसानों से उनका बाजरा महज 2,000 से 2,100 रुपये प्रति क्विंटल के औने-पौने दामों पर खरीद रहे हैं, जबकि केंद्र सरकार द्वारा इस सीजन के लिए बाजरा का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) 2,900 रुपये प्रति क्विंटल घोषित किया गया है।

सरकारी खरीद में हो रही देरी की वजह से गरीब किसानों को प्रति क्विंटल करीब 800 से 900 रुपये का सीधा और भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। अपनी उपज को औने-पौने दाम पर बेचने की मजबूरी के कारण दक्षिण हरियाणा के बाजरा उत्पादक किसानों में भारी रोष व्याप्त है।

भावांतर योजना को ठुकराया, सीधे एमएसपी पर खरीद की मांग

किसान संगठन ने इस बार सरकार की 'भावांतर भरपाई योजना' का लाभ लेने से साफ इनकार कर दिया है। किसान नेताओं का कहना है कि सरकार अक्सर पूरी फसल एमएसपी पर खरीदने के बजाय बाजार भाव और एमएसपी के अंतर की कुछ राशि भावांतर योजना के तहत देने की बात करती है, लेकिन इसकी जटिल कागजी प्रक्रिया और भुगतान में होने वाली देरी से किसानों को समय पर राहत नहीं मिलती।

किसानों ने दो टूक शब्दों में कहा है कि वे इस बार किसी भी प्रकार की भावांतर योजना का सहारा नहीं लेंगे। सरकार को अपनी घोषणा के मुताबिक प्रत्येक किसान के बाजरे का एक-एक दाना सीधे 2,900 रुपये प्रति क्विंटल के एमएसपी रेट पर ही खरीदना होगा। उन्होंने किसानों से भी अपील की है कि वे अपनी मेहनत की फसल को मजबूरी में आढ़तियों के पास कम दामों पर न बेचें और सरकारी खरीद शुरू होने का इंतजार करें।

एसडीएम और मार्केट कमेटी सचिव ने दिया आश्वासन, किसानों की नई चेतावनी

अनाज मंडी के मुख्य गेट पर चल रहे हाई-वोल्टेज ड्रामे और तनावपूर्ण स्थिति की सूचना मिलते ही स्थानीय उपमंडलाधीश (SDM) और मार्केट कमेटी के सचिव भारी पुलिस अमले के साथ मौके पर पहुंचे। प्रशासनिक अधिकारियों ने प्रदर्शनकारी किसानों को समझाने-बुझाने का प्रयास किया और उनके साथ वार्ता की। अधिकारियों ने किसानों को आश्वस्त किया कि उनकी जायज मांगों और उप-मंडी की जमीनी स्थिति की पूरी रिपोर्ट तैयार कर तुरंत राज्य सरकार और उच्चाधिकारियों तक पहुंचा दी जाएगी, ताकि खरीद केंद्रों को जल्द से जल्द क्रियाशील किया जा सके।

प्रशासन के इस आश्वासन के बाद किसानों ने अपना तालाबंदी का फैसला अस्थाई रूप से टाल दिया है, लेकिन साथ ही एक और कड़ी चेतावनी भी दे डाली है। भाकियू नेताओं ने कहा कि प्रशासन को केवल 3 दिन का समय दिया जा रहा है। यदि आगामी 3 दिनों के भीतर रेवाड़ी की अनाज मंडियों में बाजरे की सरकारी तौल शुरू नहीं हुई, तो किसान लघु सचिवालय पहुंचकर जिला उपायुक्त (DC) कार्यालय के मुख्य गेट पर तालाबंदी करेंगे या वहीं सामूहिक रूप से भूख हड़ताल पर बैठ जाएंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी जिला प्रशासन की होगी।

रेवाड़ी अनाज मंडी में न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर बाजरा खरीद की मांग को लेकर किसानों द्वारा किए गए विरोध प्रदर्शन और पुलिस के साथ हुई धक्का-मुक्की की जमीनी रिपोर्ट देखने के लिए इस वीडियो को देखें:

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