Viratbharat_Logo

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची का बड़ा बयान, कहा हम तैयार है डूम्सडे वॉर के लिए

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने कहा कि देश किसी भी नए अमेरिकी हमले के लिए पूरी तरह तैयार है भले ही वह डूम्सडे वॉर हो। ट्रंप ने होर्मुज जलडमरूमध्य खोलने का प्रस्ताव खारिज किया। डिप्लोमेसी का दरवाजा भी खुला हुआ है। पढ़िए पूरी खबर की आखिर दोनों के बीच अभी चल क्या रहा है। 
 | 
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची का बड़ा बयान, कहा हम तैयार है डूम्सडे वॉर के लिए

Iran Ready Doomsday War: ईरान के विदेश मंत्री सैय्यद अब्बास अरागची ने रविवार को साफ कह दिया कि उनका देश किसी भी नई अमेरिकी हमले के लिए पूरी तरह तैयार है। यहां तक कि अगर बात डूम्सडे वॉर यानी अंतिम विनाशकारी युद्ध तक भी पहुंचे तो भी ईरान पीछे नहीं हटेगा।

अरागची ने एनबीसी न्यूज के मीट द प्रेस कार्यक्रम में ये बात कही। उन्होंने कहा की हम युद्ध फिर से शुरू होने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। हम किसी भी नई आक्रामकता के सामने मजबूती से खड़े रहेंगे फिर भले ही वह डूम्सडे वॉर ही क्यों न हो।

ट्रंप ने प्रस्ताव खारिज किया तो आया जवाब

आपको बता दें पाठको ये बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान का सात दिन का प्रस्ताव खारिज कर दिया। ईरान ने कतर के माध्यम से अमेरिका को ये प्लान भेजा था। इसमें होर्मुज जलडमरूमध्य को सात दिन में खोलने, लड़ाई रोकने और फिर परमाणु मुद्दे पर बातचीत शुरू करने की बात थी।

ट्रंप ने कहा कि ईरान इसलिए डील चाहता है क्योंकि वह बुरी तरह हार रहा है। वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट में कहा गया कि ट्रंप ने अपने सहायकों से कहा है कि नवंबर के मिडटर्म चुनाव के बाद वह ईरान पर बमबारी फिर शुरू कर सकते हैं।

डिप्लोमेसी का दरवाजा भी खुला रखा

अरागची ने साफ किया कि ईरान सिर्फ युद्ध के लिए नहीं बल्कि बातचीत के लिए भी तैयार है। उन्होंने कहा की उसी समय हम डिप्लोमेसी के लिए भी तैयार हैं। अब चुनाव राष्ट्रपति ट्रंप को करना है।

उन्होंने याद दिलाया कि पहले भी अमेरिका ने बातचीत की पेशकश की थी। ईरान ने स्वीकार किया लेकिन बीच में हमला हो गया। जून में हुए एक अस्थायी समझौते के बाद भी हमले फिर शुरू हो गए थे।

होर्मुज के चलते हो रहा सारा बखेड़ा

होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्गों में से एक है। फरवरी 2026 से चल रहे संघर्ष के कारण यहां शिपिंग बुरी तरह प्रभावित है। तेल की कीमतें ऊंची बनी हुई हैं। अमेरिका दावा कर रहा है कि उसके जहाज यहां से गुजर रहे हैं और वह नियंत्रण में है।

ईरान का कहना है कि अगर अमेरिका नाकाबंदी हटाए, तेल पर प्रतिबंध कम करे और जमी हुई संपत्तियां छोड़े तो जलमार्ग खोला जा सकता है। अरागची ने कहा कि ये शर्तें नई नहीं हैं। जून के समझौते में ये पहले से थीं।

मिडटर्म चुनाव की परवाह नहीं

अरागची ने साफ कहा कि ईरान को अमेरिका के मिडटर्म चुनाव की कोई परवाह नहीं। उन्होंने कहा की हम अपने राष्ट्रीय हितों की चिंता करते हैं और अब भी वे मध्यस्थों के जरिए आधिकारिक जवाब का इंतजार कर रहे हैं। ट्रंप के सार्वजनिक बयान को आधिकारिक जवाब नहीं माना जा रहा।

क्या कहना चाहते हैं दोनों पक्ष

ईरान का रुख साफ है। वह न तो हार मानना चाहता है और न ही पूरी तरह बातचीत बंद करना चाहता है। अमेरिका की तरफ से सख्ती बनी हुई है। संयुक्त राष्ट्र में अमेरिकी राजदूत माइक वाल्ट्ज ने ईरान के प्रस्ताव को “निंदनीय कोशिश” बताया। उन्होंने कहा कि ईरान सब कुछ पहले मांग रहा है।

दोनों तरफ से चेतावनी और तैयारियां जारी हैं। क्षेत्र में तनाव पहले से ऊंचा है। अब देखना यह है कि डिप्लोमेसी का कोई नया रास्ता निकलता है या स्थिति और बिगड़ती है।