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Nepal Floods 2026: नेपाल संसद का बड़ा फैसला, भोटेकोशी-त्रिशूली महाविपदा की जांच के लिए 15 सदस्यीय विशेष समिति का गठन

Nepal Disaster Updates: नेपाल में 26 अगस्त को आई विनाशकारी भोटेकोशी-त्रिशूली बाढ़ की जांच के लिए प्रतिनिधि सभा ने 15 सदस्यीय संसदीय समिति का गठन किया है। इस आपदा में अब तक 1,400 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है और 6,000 से अधिक लापता हैं। जानिए इस समिति के मुख्य अधिकार और विस्तृत रिपोर्ट।
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नेपाल संसद का बड़ा फैसला, भोटेकोशी-त्रिशूली महाविपदा की जांच के लिए 15 सदस्यीय विशेष समिति का गठन 

काठमांडू: नेपाल में बीते 26 अगस्त को भोटेकोशी और त्रिशूली नदी घाटी सहित रसुवा सीमा क्षेत्र में आई विनाशकारी बाढ़ और भूस्खलन के बाद सरकार ने एक बड़ा प्रशासनिक व विधायी कदम उठाया है। नेपाल की प्रतिनिधि सभा (House of Representatives) ने सर्वसम्मति से एक उच्च स्तरीय 15 सदस्यीय विशेष संसदीय समिति के गठन को मंजूरी दे दी है। यह विशेष समिति हिमालयी क्षेत्र में आए इस भीषण जल-तांडव के कारणों, प्रशासनिक चूकों, राहत कार्यों की कमियों और भविष्य के सुरक्षा ब्लूप्रिंट की व्यापक जांच करेगी।

नेपाल संसद के सभामुख (स्पीकर) डोल प्रसाद अर्याल ने इस बात की घोषणा करते हुए कहा कि 26 अगस्त की त्रासदी ने न केवल त्रिशूली और रसुवा क्षेत्र को पूरी तरह तबाह कर दिया है, बल्कि देश की आवश्यक आपूर्ति श्रृंखला, सार्वजनिक सेवाओं और लाखों लोगों की आजीविका को भी पंगु बना दिया है। ऐसे में आपदा प्रबंधन, पुनर्वास और टिकाऊ पुनर्निर्माण को राष्ट्रीय प्राथमिकताओं में शामिल करना बेहद अनिवार्य हो गया है।

1400 से अधिक मौतें और 6000 लोग अब भी लापता

नेपाल के राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण और प्रबंधन प्राधिकरण (NDRRMA) द्वारा जारी की गई नवीनतम और संशोधित रिपोर्ट के मुताबिक, इस महाविपदा का पैमाना बेहद खौफनाक है। ग्लेशियर टूटने और हिमस्खलन के कारण आई इस बाढ़ में अब तक 1,410 से अधिक लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है। वहीं, प्रभावित जिलों से प्राप्त केंद्रीय आंकड़ों के सत्यापन के बाद लापता लोगों की संख्या तेजी से बढ़कर 6,145 से अधिक हो गई है।

लापता लोगों में सैकड़ों स्थानीय निवासियों के साथ-साथ भारत सहित विभिन्न देशों के 587 से अधिक विदेशी पर्यटक और तीर्थयात्री भी शामिल हैं। राहत और बचाव कार्य में सेना और पुलिस के 13,000 से अधिक जवानों को तैनात किया गया है, जो आज भी दुर्गम इलाकों और मलबे से पटी जलविद्युत परियोजनाओं की सुरंगों में लापता लोगों की तलाश कर रहे हैं।

समिति को सौंपे गए जांच के मुख्य बिंदु

नेपाल संसद द्वारा गठित इस 15 सदस्यीय विशेष समिति का कार्यक्षेत्र बेहद विस्तृत रखा गया है। समिति मुख्य रूप से निम्नलिखित तकनीकी और नीतिगत पहलुओं पर अपनी विस्तृत रिपोर्ट तैयार करेगी:

  • जलवायु परिवर्तन का प्रभाव: हिमालयी क्षेत्र में बढ़ते वैश्विक तापमान और जलवायु परिवर्तन के कारण ग्लेशियरों की संवेदनशीलता की जांच करना।

  • ग्लेशियर झीलों की सुरक्षा: उच्च पर्वतीय क्षेत्रों में स्थित संवेदनशील ग्लेशियर झीलों (Glacial Lakes) की सुरक्षा ऑडिट करना और समय रहते चेतावनी देने वाली प्रणाली (Early Warning System) विकसित करना।

  • संस्थागत और कानूनी सुधार: नेपाल के वर्तमान आपदा प्रबंधन कानूनों और प्रशासनिक प्रतिक्रिया प्रणाली में जरूरी कानूनी संशोधन सुझाना।

  • अंतरराष्ट्रीय सहयोग व क्लाइमेट फंड: वैश्विक मंचों से जलवायु न्याय (Climate Justice) और वित्तीय सहायता प्राप्त करने के लिए रणनीति तैयार करना।

अरबों रुपये का ढांचागत नुकसान और हाइड्रो प्रोजेक्ट्स तबाह

इस प्राकृतिक आपदा ने नेपाल के ऊर्जा क्षेत्र और परिवहन कनेक्टिविटी को सबसे गहरी चोट पहुंचाई है। बाढ़ के तेज बहाव में करीब एक दर्जन जलविद्युत परियोजनाएं (Hydropower Projects) पूरी तरह या आंशिक रूप से बह गईं या मलबे के नीचे दफन हो गईं। आधिकारिक रिपोर्ट के अनुसार, 281 मेगावाट की कुल क्षमता वाले 8 चालू हाइड्रो प्रोजेक्ट्स और 388 मेगावाट की क्षमता वाले 4 निर्माणाधीन प्रोजेक्ट्स गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हुए हैं, जिससे देश की कुल 431.1 मेगावाट बिजली उत्पादन क्षमता ठप हो गई है।

इसके अलावा चीन सीमा को जोड़ने वाली प्रमुख गैल्छी-बेत्रावती-रसुवागढ़ी सड़क और पृथ्वी राजमार्ग के बड़े हिस्से मलबे में तब्दील हो गए हैं। पूरे क्षेत्र में 48 सस्पेंशन (झूला) पुल और 31 मोटर मार्ग वाले पक्के पुल ताश के पत्तों की तरह ढह गए हैं, जिससे दर्जनों गांवों का संपर्क मुख्य दुनिया से पूरी तरह कट गया है।

समावेशी प्रतिनिधित्व को लेकर संसद में उठा विवाद

समिति के गठन के साथ ही नेपाल की घरेलू राजनीति में भी इस पर बहस शुरू हो गई है। संसद के सत्र के दौरान कई सांसदों ने नवगठित 15 सदस्यीय समिति में सामाजिक विविधता और समावेशिता की कमी को लेकर औपचारिक चिंताएं जाहिर की हैं। सांसदों का आरोप है कि आपदा से सबसे ज्यादा प्रभावित होने वाले सीमांत और दलित समुदायों के किसी भी प्रतिनिधि को इस महत्वपूर्ण समिति में जगह नहीं दी गई है।

नेपाली कांग्रेस और विपक्षी दलों के नेताओं ने पार्टी नेतृत्व से मांग की है कि देश की इतनी बड़ी राष्ट्रीय जांच टीम में आनुपातिक समावेशिता के मानकों का पालन किया जाना चाहिए ताकि रिपोर्ट निष्पक्ष और सभी वर्गों के हित में हो। फिलहाल, अच्युतम लामिछाने, अनुष्का श्रेष्ठ, गंगा देवी श्रेष्ठ और रमेश कुमार मल्ला सहित 15 वरिष्ठ नेताओं की यह टीम जल्द ही रसुवा और भोटेकोशी के ग्राउंड जीरो का दौरा कर अपनी जांच प्रक्रिया को आगे बढ़ाएगी।

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