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H-1B वीजा पर अमेरिका का बड़ा संकेत: 'हथकड़ियां तैयार', फ्रॉड के खिलाफ सख्ती तेज

अमेरिकी लेबर डिपार्टमेंट के इंस्पेक्टर जनरल ने चेतावनी दी है कि H-1B वीजा प्रोग्राम अगले एक साल में काफी बदल जाएगा। फर्जी कंपनियां, शोषण और ट्रैफिकिंग की जांच चल रही है। हथकड़ियां तैयार बताई गईं। आइये एक नजर डालते है की आखिर क्या मसला है और क्या चर्चा इसको लेकर चल रही है। 
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H-1B वीजा पर अमेरिका का बड़ा संकेत

अमेरिका में H-1B वीजा प्रोग्राम को लेकर बड़ा संकेत सामने आया है। अमेरिकी लेबर डिपार्टमेंट के इंस्पेक्टर जनरल एंथनी डी'एस्पोसिटो ने साफ कहा है कि विदेशी श्रम वीजा सिस्टम अगले 365 दिनों में काफी अलग नजर आएगा।

उन्होंने एक्स पर पोस्ट कर लिखा, “हथकड़ियां तैयार हैं।” फर्जी नियोक्ता, नकली नौकरियां, वीजा मिल्स और वर्कर्स के शोषण का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि लूपहोल्स बंद हो रहे हैं। रेड्स असल हैं।


जांच में क्या हो रहा है अभी 

लेबर डिपार्टमेंट की ऑफिस ऑफ इंस्पेक्टर जनरल कई राज्यों में सर्च वारंट जारी कर चुकी है। दर्जनों सबपोना दिए गए हैं। कुछ कंपनियों के वीजा आवेदन रोके गए हैं।

आईटी सेवा कंपनी कॉग्निजेंट और सॉफ्टवेयर फर्म क्लौडेरा के वीजा प्रोसेसिंग को क्रिमिनल जांच तक के लिए सस्पेंड किया गया है। जांच में वेज किकबैक स्कीम, फर्जी एलसीए फाइलिंग और अमेरिकी वर्कर्स को कम वेतन पर विदेशी मजदूरों से बदलने के आरोप शामिल हैं।

ट्रंप प्रशासन का रुख क्या है?

यह सख्ती ट्रंप प्रशासन के बड़े अभियान का हिस्सा है। सितंबर 2025 में शुरू हुए प्रोजेक्ट फायरवॉल के तहत करीब 200 जांच चल रही हैं। 
उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के टास्क फोर्स टू एलिमिनेट फ्रॉड के साथ मिलकर काम हो रहा है।

18 सितंबर 2026 को राष्ट्रपति ट्रंप ने एक एक्जीक्यूटिव ऑर्डर जारी किया। इसमें कहा गया कि अगर कोई कंपनी अमेरिकी कर्मचारियों की छंटनी कर रही है या करने वाली है, तो उसके H-1B आवेदनों पर कड़ी नजर रखी जाएगी।

1 लाख डॉलर फीस और पाबंदियां

कुछ H-1B आवेदनों के लिए 1 लाख डॉलर की फीस की शर्त बढ़ाई गई है। यह प्रतिबंध सितंबर 2027 तक चलेगा। कोर्ट में चुनौती चल रही है, इसलिए अभी हर जगह लागू नहीं है।

व्हाइट हाउस का दावा है कि बड़े आईटी आउटसोर्सिंग फर्मों के रजिस्ट्रेशन में 92 प्रतिशत गिरावट आई है।

भारतीय आईटी कंपनियां भी स्कैनर पर

कॉग्निजेंट के अलावा इंफोसिस और टीसीएस जैसी कंपनियों पर भी नजर है। स्टाफिंग एजेंसियों और शेल कंपनियों पर खास फोकस है। कुछ जगहों पर फिजिकल चेक में बंद दरवाजे और खाली ऑफिस मिले हैं।

डी'एस्पोसिटो ने साफ किया कि अभी पूरा प्रोग्राम बंद करने की घोषणा नहीं हुई है। लेकिन धोखाधड़ी करने वालों के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई की तैयारी है।

अमेरिकी अधिकारी कह रहे हैं कि यह सिर्फ पेपरवर्क नहीं बल्कि असली समस्या है। अमेरिकी वर्कर्स की सुरक्षा और मजदूरी बचाने का दावा किया जा रहा है।

भारतीय प्रोफेशनल्स और आईटी कंपनियों के लिए यह बड़ा संकेत है। अगले एक साल में नियम और सख्त हो सकते हैं। गिरफ्तारियां भी हो सकती हैं। पूरी तस्वीर जांच आगे बढ़ने पर साफ होगी।