मारुति सुजुकी इंडिया ने हरियाणा के खरखौदा में अपनी गाड़ियों की रफ्तार बढ़ाने का बड़ा प्लान तैयार किया है। बुधवार, 26 मार्च 2025 को कंपनी के बोर्ड ने तीसरे प्लांट के लिए 7,410 करोड़ रुपये के निवेश को हरी झंडी दे दी। इस नए प्लांट से हर साल 2.5 लाख गाड़ियां बनेंगी। तो चलिए, इस खबर को थोड़ा करीब से समझते हैं और ये भी देखते हैं कि छोटी कारों का बाजार क्यों ढीला पड़ रहा है।
खरखौदा में बढ़ेगी रौनक
खरखौदा में अभी एक प्लांट चल रहा है, जो सालाना 2.5 लाख गाड़ियां बनाता है। दूसरा प्लांट भी बन रहा है, जिसकी क्षमता इतनी ही होगी। अब तीसरे प्लांट के साथ कुल उत्पादन 7.5 लाख यूनिट प्रति साल तक पहुंच जाएगा। कंपनी का कहना है कि ये नया प्लांट 2029 तक तैयार हो जाएगा और पूरा पैसा कंपनी अपने खजाने से लगाएगी। मकसद साफ है – देश और विदेश में बढ़ती डिमांड को पूरा करना।
बड़ा निवेश, बड़ी उम्मीदें
7,410 करोड़ रुपये का ये निवेश कोई छोटी बात नहीं है। मारुति सुजुकी का फोकस अब निर्यात बढ़ाने और बाजार की नई जरूरतों को पूरा करने पर है। खरखौदा में तीनों प्लांट मिलकर हर साल 7.5 लाख गाड़ियां बनाएंगे, जो कंपनी की ग्रोथ को नई ऊंचाई दे सकता है। लेकिन सवाल ये है – क्या ये गाड़ियां छोटी कारों की होंगी, जो कभी भारत की सड़कों की शान थीं?
छोटी कारों का ढलता सितारा
याद कीजिए 1980 का दशक, जब मारुति 800 ने भारतीयों का दिल जीत लिया था। छोटी, किफायती और सड़कों के लिए एकदम फिट – ये कार हर घर की पसंद बन गई थी। फिर हुंडई सैंट्रो जैसी गाड़ियों ने भी धूम मचाई। लेकिन अब हालात बदल गए हैं। छोटी कारें, जो कभी बाजार की जान थीं, अब पिछड़ती दिख रही हैं। ऐसा क्यों? लोग अब बड़ी गाड़ियों जैसे SUV की तरफ शिफ्ट हो रहे हैं। बेहतर रोड, बढ़ती कमाई और स्टेटस का क्रेज इसके पीछे बड़े कारण हैं।
मारुति सुजुकी का ये नया प्लांट बड़ी बात है – नौकरियां बढ़ेंगी, प्रोडक्शन बढ़ेगा और शायद छोटी कारों को भी नई जान मिले। लेकिन सवाल वही है – क्या भारतीय फिर से छोटी कारों की तरफ लौटेंगे? या मारुति को SUV और दूसरी बड़ी गाड़ियों पर ज्यादा जोर देना पड़ेगा? जवाब आने वाले सालों में मिलेगा। अभी तो खरखौदा में गाड़ियों की नई लाइन तैयार होने वाली है और ये हरियाणा के लिए भी बड़ी खुशखबरी है!