Viratbharat_Logo

थाली में परोसा जा रहा मीठा ज़हर: थाईलैंड से केक के पैकेटों में छिपाकर जयपुर भेजा गया 1.080 किलो विदेशी गांजा, CBN ने ऐसे किया भंडाफोड़

जयपुर के विदेशी डाकघर में सीबीएन ने थाईलैंड से आए पार्सल से 1.080 किलो हाइड्रोपोनिक गांजा जब्त किया। तस्करों ने इसे 29 केक के पाउच में छिपा रखा था। सीबीएन ने NDPS एक्ट के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
 | 
जयपुर: थाईलैंड से केक के पार्सल में आया 1kg हाइड्रोपोनिक गांजा

जयपुर। राजस्थान की राजधानी में अंतरराष्ट्रीय नशा तस्करों ने सुरक्षा एजेंसियों की आंखों में धूल झोंकने के लिए बेहद अजीबो-गरीब पैंतरा आजमाया। लेकिन केंद्रीय मादक द्रव्य ब्यूरो (CBN) जयपुर की सतर्कता ने उनके इस बड़े मंसूबे पर पानी फेर दिया। थाईलैंड से डाक के जरिए भेजे गए एक संदिग्ध अंतरराष्ट्रीय पार्सल की जांच के दौरान बेकरी के साधारण केक के पैकेटों के भीतर से 1.080 किलोग्राम उच्च गुणवत्ता वाला 'हाइड्रोपोनिक गांजा' (हाइड्रोपोनिक वीड) बरामद किया गया है।

सीक्रेट इनपुट के आधार पर की गई इस कार्रवाई ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि विदेशी डाक सेवाओं और कूरियर नेटवर्क के सहारे भारत में प्रीमियम श्रेणी के ड्रग्स की तस्करी का गिरोह पूरी तरह सक्रिय है।

केक के 29 पाउच और छिपा हुआ 'विदेशी नशा'

विदेशी डाकघर (FPO), जयपुर में पहुंचे एक पार्सल को लेकर सीबीएन को ठोस खुफिया जानकारी मिली थी। खबर पक्की होते ही अधिकारियों की एक विशेष टीम गठित की गई, जिसने कस्टम्स विभाग के साथ मिलकर जयपुर स्थित एफपीओ में धावा बोला।

संदिग्ध कार्टन को जब खोला गया, तो ऊपर से वह एक सामान्य खाने-पीने की बेकरी डिलीवरी जैसा दिख रहा था। उसमें बेकरी केक के कई डिब्बे और अन्य सामान सलीके से सजाए गए थे। हालांकि, जब अधिकारियों ने केक के पाउच की बारीकी से जांच की, तो परत-दर-परत सच सामने आने लगा। 29 अलग-अलग केक पाउच के अंदर केक की आड़ में बेहद शातिराना तरीके से वैक्यूम-पैक करके हाइड्रोपोनिक गांजा छिपाया गया था। बरामद मादक पदार्थ का कुल वजन 1.080 किलोग्राम दर्ज किया गया है।

NDPS एक्ट में मामला दर्ज, गिरोह की तलाश जारी

सीबीएन ने बरामद हाइड्रोपोनिक गांजे को मादक द्रव्य और मनोसक्रियक पदार्थ (NDPS) अधिनियम, 1985 की सख्त धाराओं के तहत ज़ब्त कर लिया है। जांच अधिकारी फिलहाल इस पार्सल पर लिखे पते, भेजने वाले के कूरियर ट्रेल और जयपुर में इसे प्राप्त करने वाले अंतिम व्यक्ति (Consignee) की कड़ियों को जोड़ने में जुटे हैं।

एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या यह किसी लोकल सप्लायर का काम है या राजस्थान और आसपास के राज्यों की रेव पार्टियों व युवा नेटवर्क तक सीधे डिलीवरी की जा रही थी।