Haryana Weather Update: हरियाणा से मानसून की विदाई तय, अगले 5 दिन ऐसा रहेगा मौसम का हाल, IMD का नया अलर्ट जारी
पश्चिमी हवाओं के असर से दिन के तापमान में बढ़ोतरी, 37 डिग्री तक पहुंचेगा पारा।
25 सितंबर तक राज्य के अधिकांश जिलों में मौसम साफ और शुष्क रहने का अनुमान।
सितंबर के बिल्कुल आखिरी दिनों (29-30 सितंबर) में बदल सकता है मौसम का मिजाज।
चंडीगढ़/हिसार: हरियाणा के आसमान से बादलों की विदाई का काउंटडाउन शुरू हो चुका है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD Chandigarh) के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, राज्य से दक्षिण-पश्चिम मानसून की औपचारिक विदाई अगले दो दिनों के भीतर पूरी हो जाएगी। मानसून के वापस लौटते ही प्रदेश के मौसम चक्र में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है, जहां उमस वाली गर्मी की जगह अब शुष्क और तीखी धूप ने ले ली है।
एंटीसाइक्लोन का असर और बदलती हवाएं
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, राजस्थान के ऊपरी वायुमंडल में एक एंटीसाइक्लोन (प्रतिचक्रवात) प्रणाली सक्रिय हो गई है। इस बदलाव के कारण हवाओं का रुख पूरी तरह बदल गया है। अब तक नमी लाने वाली पुरवाई हवाओं की जगह शुष्क और गर्म पश्चिमी हवाएं चलने लगी हैं। इस वजह से वातावरण में नमी का स्तर तेजी से गिरा है, जिससे सुबह और शाम के समय हल्की गुलाबी ठंडक का अहसास होने लगा है, लेकिन दिन के समय तीखी धूप पसीना छुड़ा रही है।
तापमान का हाल: 37 डिग्री तक जाएगा पारा
आने वाले दिनों में हरियाणा के मैदानी इलाकों में गर्मी का प्रभाव बढ़ने के आसार हैं। सिरसा, हिसार, रोहतक, अंबाला, भिवानी और फरीदाबाद जैसे जिलों में दिन का अधिकतम तापमान 36 से 37 डिग्री सेल्सियस के बीच दर्ज किया जा रहा है। रात के समय न्यूनतम तापमान 22 से 25 डिग्री सेल्सियस के आसपास बना हुआ है, जिससे रातें अपेक्षाकृत आरामदायक हो गई हैं。 मौसम विभाग ने स्पष्ट किया है कि 25 सितंबर तक राज्य में किसी भी तरह की भारी बारिश या आंधी-तूफान की कोई संभावना नहीं है।
क्या सितंबर के अंत में फिर बरसेंगे बादल?
भले ही मानसून विदा हो रहा है, लेकिन मौसम का एक आखिरी यू-टर्न अभी बाकी है। मौसम केंद्र के पूर्वानुमान के अनुसार, बंगाल की खाड़ी में बन रहे एक नए कम दबाव के क्षेत्र के चलते सितंबर के आखिरी दिनों, विशेषकर 29 और 30 सितंबर को हरियाणा के कुछ हिस्सों में स्थानीय स्तर पर बादल छा सकते हैं और हल्की बूंदाबांदी देखने को मिल सकती है। हालांकि, यह केवल एक अल्पकालिक मौसमी गतिविधि होगी, जो मुख्य रूप से विदा होते मानसून का प्रभाव होगी। किसानों को सलाह दी गई है कि वे इस शुष्क अवधि का लाभ उठाते हुए खरीफ फसलों की कटाई और प्रबंधन का काम बिना किसी व्यवधान के पूरा कर लें।
