Haryana Weather Forecast: पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय, रेवाड़ी-महेंद्रगढ़ समेत इन जिलों में बारिश की चेतावनी
रेवाड़ी, 25 सितंबर। हरियाणा में मॉनसून की विदाई के बीच एक बार फिर मौसम का मिजाज पलटने जा रहा है। मौसम विभाग और कृषि मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार उत्तर भारत में सक्रिय हो रहे नए पश्चिमी विक्षोभ के चलते प्रदेश में 26 सितंबर से बादल छाने लगेंगे, जबकि 28 से 30 सितंबर के बीच दक्षिण व पश्चिमी हरियाणा सहित कई इलाकों में हल्की से मध्यम बारिश दर्ज की जा सकती है।
चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय (HAU), हिसार के मौसम विज्ञान विभाग के मुताबिक इस बदलाव से पिछले कुछ दिनों से 35 से 37 डिग्री सेल्सियस के बीच झुलसा रही दोपहर की गर्मी से राहत मिलने की उम्मीद है। दिन के तापमान में 2 से 3 डिग्री सेल्सियस तक की गिरावट आएगी, जिससे उमस भरी गर्मी का असर कम होगा।
राजस्थान से सटे जिलों में दिखेगा असर
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, पश्चिमी विक्षोभ का प्रभाव विशेष रूप से राजस्थान सीमा से लगते दक्षिण और पश्चिमी हरियाणा के जिलों में देखा जाएगा। इनमें रेवाड़ी, महेंद्रगढ़ (नारनौल), चरखी दादरी, भिवानी, हिसार, फतेहाबाद और सिरसा शामिल हैं। 26 सितंबर से इन क्षेत्रों में हवा की दिशा बदलेगी और आंशिक बादल छाएंगे। इसके बाद 28 से 30 सितंबर के दौरान गरज-चमक के साथ छिटपुट से हल्की बारिश होने का अनुमान है।
क्यों बढ़ी थी दिन में गर्मी और रातें क्यों हुईं ठंडी?
बीते कुछ दिनों से राजस्थान के ऊपर बने एंटी-साइक्लोनिक सर्कुलेशन (प्रति-चक्रवात) के चलते पश्चिमी शुष्क और गर्म हवाएं मैदानी इलाकों की ओर बढ़ रही थीं। इसी कारण प्रदेश के अधिकांश जिलों में पारा 35 डिग्री के पार चला गया, जहां महेंद्रगढ़ में अधिकतम तापमान 37.1 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया था।
वहीं दूसरी ओर, मॉनसून की वापसी के कारण वातावरण में नमी घटी है। आसमान पूरी तरह साफ रहने से दिनभर की जमीनी गर्मी रात को तेजी से ऊपर निकल जाती है (रेडिएटिव कूलिंग)। इस प्रक्रिया के चलते रात और सुबह के समय गुलाबी ठंडक का अहसास होने लगा है। हिसार और आसपास के क्षेत्रों में न्यूनतम तापमान 21 से 23 डिग्री के बीच आ चुका है।
किसानों के लिए जरूरी सलाह
मौसम में संभावित बदलाव को देखते हुए कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को विशेष सावधानी बरतने को कहा है। आगामी 2 से 3 दिनों तक खेतों में अनावश्यक सिंचाई और किसी भी प्रकार के कीटनाशक के छिड़काव से बचने की हिदायत दी गई है।
विशेषज्ञों का कहना है कि हवा में नमी बढ़ने से कपास (नरमा) की फसल में सफेद मक्खी और गुलाबी सुंडी का प्रकोप बढ़ सकता है। इसलिए किसान खेतों की नियमित निगरानी करें और मौसम पूरी तरह साफ होने के बाद ही दवा का स्प्रे करें। वहीं धान उत्पादक किसानों को तना छेदक और लीफ रोलर कीटों पर नजर रखने तथा खेतों में जलभराव न होने देने की सलाह दी गई है।
30 सितंबर के बाद फिर खुश्क होगा मौसम
मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार, पश्चिमी विक्षोभ का यह दौर 30 सितंबर तक सीमित रहेगा। 1 अक्टूबर से बादल छंट जाएंगे और मौसम दोबारा खुश्क हो जाएगा। बारिश और बादलों के हटने के बाद रात के तापमान में और तेज गिरावट आएगी, जिससे अक्टूबर के पहले सप्ताह से ही सुबह और शाम की ठंड में साफ इजाफा देखने को मिलेगा।
