Virat Bharat
पारंपरिक खेती के मुकाबले आधुनिक वैज्ञानिक तरीके अपनाकर गन्ने का वजन, लंबाई और पैदावार 2 से 3 गुना तक बढ़ाई जा सकती है।
1.5 से 2 फीट चौड़े और 1.5 फीट गहरे गड्ढे बनाकर बुवाई करें। इससे गन्ने में कल्ले अधिक निकलते हैं और फसल तेज हवा में गिरती नहीं है।
हमेशा तीन आंखों वाले रोगमुक्त गन्ने के टुकड़ों का ही चुनाव करें। बुवाई से पहले बीजों को कार्बन्डाजिम या फफूंदनाशक घोल से अवश्य उपचारित करें।
प्रति एकड़ 8-10 टन गोबर की खाद, 50 किलो DAP, 25 किलो MOP, 10 किलो जिंक और सल्फर डालें। ध्यान रहे जिंक को DAP के साथ सीधे न मिलाएं।
फसल के 0 से 45 दिनों में कल्ले बढ़ाने के लिए NPK (19:19:19) 1 किलो और ह्यूमिक एसिड 250 मिली को 200 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें।
गर्मियों में 10-12 दिनों के अंतर पर पानी दें। पानी की बचत और सीधी जड़ों तक पोषक तत्व पहुंचाने के लिए ड्रिप इरिगेशन का इस्तेमाल करें।
90 से 120 दिनों में जड़ों पर भारी मिट्टी चढ़ाएं ताकि नई जड़ें निकलें। 150 दिनों बाद गन्ने को आपस में बांधें ताकि वह गिरे नहीं।
शुरुआती 45 दिन खेत साफ रखें। दीमक और बोरर कीट से बचाव के लिए फिप्रोनिल (Fipronil 0.6% GR) कीटनाशक का अनुशंसित मात्रा में उपयोग करें।