आज के समय में बकरी पालन का बिज़नेस एक बेहतरीन और अधिक मुनाफा देने वाला बिज़नेस है जिसमे लागत काफी कम लगती है और बचत अधिक होती है। देश में ग्रामीण क्षेत्रों में तो बकरी पालन का काम बहुत अधिक होता है और ग्रामीण 10 - 20 के झुण्ड में बकरियों को रखते है जिनको आसपास की पहाड़ियों पर चराने लेकर जाते है। इन बकरियों से उनकी आर्थिक रूप से जुविका आसानी से चल जाती है। लेकिन अगर बकरी पालन को ही अगर बिज़नेस की तरह शुरू किया जाए तो इससे मुनाफा काफी अधिक कमाया जा सकता है। गांव देहात के लोगों को वैसे भी पशुपालन की काफी अधिक जानकारी पहले से ही होती है इसलिए उनको इस काम में अधिक समस्या भी नहीं आती है।
बकरी पालन का काम कैसे छोटे स्तर से शुरू करके उसको बड़े लेवल तक लेकर जाय जाता है और कौन कौन सी नश्लों की बकरियों को शुरुआत में अपने फार्म में शामिल करना चाहिए? आज आपको मैंने प्रियांशी इन सब बातों के बारे में डिटेल में बताने जा रही हूँ और इसके साथ में आपको बकरी की नश्लों के बारे में और कैसे इस बिज़नेस को बड़ा किया जाता है उसके बारे में पूरी जानकारी देने वाली है।
छोटे स्तर से शुरुआत कैसे करनी है?
छोटे स्तर पर शुरआत करने का मतलब ये नहीं है की छोटी की जगह में काम शुरू करना बल्कि कम बकरियों की संख्या रखना और साथ में सिमित संसाधानों के साथ में अपने बिज़नेस को शुरू करना है। जब आप इस बिज़नेस की शुरुआत करते है तो आपको पता नहीं रहता की आगे चलकर कैसे इसको बड़े लेवल पर लेकर जाना है इसलिए शुरुआत छोटे से और जैसे जैसे आपका अनुभव बढ़ता है तो आपको आगे अपने आप इसको बड़े लेवल पर लेकर जाने का अनुभव आपको होने लगता है।
बकरी पालन को छोटे लेवल से शुरू करने के लिए आपको शुरुआत में केवल 10 या फिर 15 बकरियों को रखना है और एक बकरे को रखना है ताकि प्रजनन के जरिये इनकी संख्या में इजाफा होता रहे। आपको इतनी बकरियों का शुरू में प्रबंधन करने में भी आसानी रहेगी और जोखिम भी बहुत काम रहेगा।
इसके अलावा बकरियों के लिए चारे का प्रबंध, पानी का प्रबंध और उनके रहने के लिए शेड की जरुरत होगी तो उसके लिए आपको अभी से कुछ करने की जरुरत नहीं है। इतनी बकरियों को अगर आपके आसपास में चराने का प्रबंध है तो बाहर रोजाना लेकर जाया जा सकता है और नहीं तो ग्रामीण इलाके में बकरियों के लिए सूखा चारा आसानी से मिल जाता है। इसके साथ में पानी की समस्या तो रहेगी नहीं और आपको एक या दो ड्रम रख लेने है जिसमे आप पानी को स्टॉक करके रख सको। रही बात शेड के तो अभी के लिए पक्का बनाने की जरुरत नहीं है और बांस, बल्ली की मदद से छोटा सा शेड भी काम कर जायेगा। शेड में ये ध्यान रखना है की कुत्ते या फिर अन्य जंगली जानकारी उसमे घुसने ना पाये। शेड के लिए 10–12 वर्ग फुट ढकी हुई जगह पर्याप्त है और केवल इतनी जगह आपके बकरी पालन के बिज़नेस को शुरू करने के लिए बहुत है।

बकरियों के लिए सूखे चारे कौन कौन से होते है?
बकरियों के लिए सूखे चारे का प्रबंध करते समय आपको अधिक परेशान होने की जरुआत नहीं हो क्योंकि सभी गांव में आसानी से मिल जाता है। इसमें आप चने, मूंगफली या फिर ग्वार आदि का भूसा, चने या मूंगफली की पत्तियां, बरसीम या फिर नेपियर घास, चने का छिलका, गेहूं का चिकर या फिर मक्का का मिक्सचर शामिल कर सकते है जो की बकरियों के लिए संतुलित चारा होता है और इसको खाकर के बकरियां स्वस्थ भी रहती है और तेजी के साथ में ग्रोथ करती है।
अगर आपके पास में खेती की ज़मीन है तो आप इस चारे की कॉस्ट को और भी कम कर सकते है और अपने खेतों में बकरियों के लिए हरा चारा बुवाई करके इस्तेमाल में ले सकते हो। इससे बकरियों के लिए ताज़ा चारे का प्रबंध भी होगा और साथ में आपको इस बिज़नेस में शुरुआत में अधिक इन्वेस्ट करने की जरुआत भी नहीं रहेगी।
बकरी पालन शुरू करने के लिए बकरियों की सबसे अच्छी नश्लें कौन कौन सी है?
शुरुआत में बकरी पालन में आपको अधिक नश्लों पर ध्यान नहीं देना है और नश्ल का चुनाव ये देखकर करना है की बकरी पालन का बिज़नेस शुरू करने का आपका मकसद क्या है। आप मांस के उत्पादन के लिए बकरी पालन कर रहे है या फिर दूध के उत्पादन के लिए इस बिज़नेस को कर रहे है। इसके हिसाब से ही नश्लों का चयन किया जाता है। लेकिन इसमें एक बात का आपको ध्यान रखना है की बकरी जिस भी नश्ल की आप ले रहे है वो आपके एरिया के मौसम को आसानी से झेल सके और साथ में उसमे रोगों से लड़ने की छमता अधिक हो। आइये जानते है कुछ खास नश्लों के बारे में -
| नस्ल का नाम | मुख्य क्षेत्र | मुख्य उद्देश्य | प्रजनन क्षमता | विशेषताएं एवं लाभ |
| सिरोही | राजस्थान (सिरोही, अजमेर, उदयपुर) | मांस | साल में 1 ब्यांत (जुड़वां 20-30%) | कठोर जलवायु और गर्मी सहने में सक्षम होती है और तेजी से वजन बढ़ता है। इसके अलावा बहुत कम बीमार पढ़ती है। |
| बरबरी | उत्तर प्रदेश (आगरा, मथुरा, एटा) | मांस एवं दूध | 12-14 माह में 2 ब्यांत (2-3 बच्चे) | छोटे आकार की होती है और स्टॉल-फीडिंग (बाड़े) के लिए सबसे उपयुक्त मानी जाती है। ये बहुत शांत स्वभाव की होती है। |
| ब्लैक बंगाल | पश्चिम बंगाल, बिहार, झारखंड, असम | प्रीमियम मांस एवं चमड़ा | साल में 2 ब्यांत (2-4 बच्चे, बहुत उच्च) | अत्यधिक स्वादिष्ट मुलायम मांस मिलता है और इस नश्ल से विश्व प्रसिद्ध चमड़ा मिलता है। ये नस्ल उच्च रोग प्रतिरोधक क्षमता वाली होती है। |
| बीटल | पंजाब (गुरदासपुर, अमृतसर), हरियाणा | दूध एवं मांस | साल में 1-2 ब्यांत (प्रायः जुड़वां) | लंबा कद, रोमन नाक, जमुनापारी जैसी कद-काठी लेकिन पालने में अधिक अनुकूल मानी जाती है। |
| जमुनापारी | उत्तर प्रदेश (इटावा, चंबल क्षेत्र) | दूध एवं मांस | साल में 1 ब्यांत (मुख्यतः एकल बच्चा) | भारत की सबसे ऊंची नस्ल, तोता जैसी मुड़ी हुई नाक, लंबे लटके कान, चराई पसंद करने वाली बकरी होती है। |
| उस्मानाबादी | महाराष्ट्र (उस्मानाबाद, लातूर, सोलापुर) | मांस | साल में 1-2 ब्यांत (50% जुड़वां) | काला रंग, सूखा और अकाल सहने की अद्भुत क्षमता, शून्य अतिरिक्त लागत पर पालन और पहाड़ों में भी आसानी से रह सकती है। |
| सोजत | राजस्थान (पाली, सोजत, जोधपुर) | मांस | साल में 1 ब्यांत (मुख्यतः 1-2 बच्चे) | दूधिया सफेद रंग, सुंदर भारी कद-काठी, त्योहारों व कुर्बानी के बाजार में भारी मांग रहती है इसकी। देखने में भी काफी सुन्दर होती है। |
| तोतापरी | राजस्थान, हरियाणा, पंजाब | मांस | साल में 1 ब्यांत | तोते जैसी विशिष्ट उठी हुई चोंचदार नाक, बड़ा फ्रेम, कुर्बानी बाजार में ऊँचे दामों पर बिकने वाली बकरी की नश्ल है। |
| झालावाड़ी | राजस्थान (झालावाड़, कोटा, बारां) | दूध एवं मांस | साल में 1 ब्यांत (जुड़वां संभव) | चमकदार काले बाल और कानों पर सफेद धब्बे, अच्छा दूध उत्पादन और मजबूत कद काठी होती है। |
| कोडी आडू | तमिलनाडु (थूथुकुडी, तिरुनेलवेली) | मांस | साल में 1-2 ब्यांत | लंबी टांगें, तेज दौड़ने में सक्षम, चराई और शुष्क जलवायु के लिए अत्यंत मुफीद मानी जाती है। |
| कन्नै आडू | तमिलनाडु (रामनाथपुरम, विरुधुनगर) | मांस | साल में 1-2 ब्यांत (जुड़वां आम) | काले शरीर पर सफेद/भूरे पट्टे, सूखे मौसम को आसानी से झेलने की स्वाभाविक क्षमता वाली बकरी की नश्ल है। |
| मालाबारी | केरल (कालीकट, कन्नूर, मलाप्पुरम) | दूध एवं मांस | साल में 1-2 ब्यांत (2-3 बच्चे) | नमी और भारी बारिश के प्रति अनुकूल, शांत स्वभाव, तेजी से प्रजनन करती है और 10 से 50 होने में समय नहीं लगता। |
| गद्दी | हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, जम्मू-कश्मीर | मांस | साल में 1 ब्यांत (एकल बच्चा) | पहाड़ी ठंडी जलवायु के लिए अनुकूल, लंबे घने बाल/पश्मीना जैसी ऊन उत्पादन भी मिलता है। |
| चंगथांगी | लद्दाख (चांगथांग क्षेत्र) | मांस | साल में 1 ब्यांत | विश्व प्रसिद्ध सर्वोत्तम पश्मीना ऊन प्रदान करने वाली अत्यधिक ठंड सहने वाली नस्ल है और उन के उत्पादन के लिए बेस्ट मानी जाती है। |
| बोएर | मूल: दक्षिण अफ्रीका (भारत में क्रॉस ब्रीडिंग) | मांस | 2 वर्ष में 3 ब्यांत (2-3 बच्चे) | दुनिया की नंबर 1 कमर्शियल मीट नस्ल, तेजी से दैनिक वजन वृद्धि (150-250g/दिन) होती है जिससे अच्छे दामों में बिकती है। |
जब आप बकरी पालन के बिज़नेस को शुरू कर रहे है तो महँगी नश्लों की बकरियों को या फिर विदेशी नश्ल की बकरियों को पालने के बारे में विचार ना करे और देशी नश्लों के साथ जाएंगे तो अच्छा रहेगा क्योंकि इससे आपको कई फायदे मिलते है। सिरोही या बरबरी क्षेत्र के साथ में ढल जाती है तो खाने का प्रबंध करने में दिक्कत नहीं होती और साथ में रोगों या बिमारियों का खतरा बहुत कम हो जाता है।
बकरी पालन के बिज़नेस को बड़े लेवल पर कैसे लेकर जाएं?
आपने छोटे स्तर पर बकरी पालन का बिज़नेस करते हुए जब 2 से 3 साल का समाय हो जाये तो फिर इसको धीरे धीरे करके बड़े लेवल पर लेकर जाने का सही समय हो जाता है क्योंकि अब तक आपको काफी अनुभव हो चूका होता है और बकरियों की संख्या में भी इजाफा हो चूका होता है। आपको इन 2 - 3 सालों में जैसे बकरियों की संख्या में इजाफा किया है वैसे ही आगे भी इसको जारी रखना है और इनमे से केवल नर बच्चे है उनको ही मांस उत्पादन के लिए बेचना है। मादा बकरियों को आपको प्रजनन के लिए अपने पास ही रखना है ताकि बकरियों की संख्या में इजाफा हो सके। इससे आपको ये फायदा होगा की बिना नई बकरियों को ख़रीदे आपके पास में 2 से 3 साल में ही 200 के आसपास बकरियां आसानी से हो जायेंगी।
आपने पास में जो नर बकरा था उसको आपको हर 2 साल में बदल देना है यानि जो है उसको बेच देना है और दूसरा बकरा प्रजनन के लिए अब आगे इस्तेमाल करना है ताकि इनब्रीडिंग से आने वाले बच्चों को कोई खतरा ना रहे। इसके अलावा स्टॉल फीडिंग और साइलेज की तरफ आपको शिफ्ट कर जाना है यानि साइलेज (आचार चारा) और हाइड्रोपोनिक या अजोला जैसी सस्ती प्रोटीन तकनीकों का इस्तेमाल शुरू कर देना है।
मार्केटिंग या फिर त्योहारों का फायदा उठाना है
बकरी पालन में अब आपको त्योहारों का भरपूर लाभ लेना शुरू करना होगा और ईद के मौके पर बाजार में एंट्री करनी होगी जिससे आपको अधिक से अधिक मुनाफा मिल सके। व्यापारियों, कसाईखानों या खुदरा खरीदारों को आप सीधे संपर्क करे और कभी भी बिचौलियाँ के चक्कर में ना पड़े। बकरीद जैसे त्योहारों के लिए नर बकरों को 6–8 महीने पहले से खास डाइट देकर अच्छे से तैयार करके रखना है ताकि उनका वजन अधिक से आदिक हो और आपको उसके हिसाब से अधिक कीमत बाजार में मिले।
इसके अलावा आपको सर्टिफाइड ब्रीडिंग फार्म के रूप में अपने फार्म को स्थापित करना है ताकि केवल मांस पर ही आपकी निर्भरता ना रहे और इलाके में जो भी नए फार्म शुरू करने जा रहे है उनको भी आप अच्छी गुणवत्ता के बकरे बकरी बेच सके और वहां से अभी अधिक से अधिक कमाई की जा सके।
अपने बिज़नेस को अधिक बढ़ाने के लिए आपको सरकार के द्वारा चलाई जा रही योजनाओं का भरपूर लाभ लेना है और राष्ट्रीय पशुधन मिशन (NLM) और नाबार्ड (NABARD) की योजनाओं के तहत 25% से 50% तक सब्सिडी मिलती है जो आपके इस बकरी पालन के बिज़नेस को आगे ले जाने में आपकी सहायता करती है। अपने फार्म की पूरी प्रोजेक्ट रिपोर्ट तैयार करके आप इन योजनाओं का लाभ ले सकते है और इसके अलावा बैंक लोड या फिर सब्सिडी का भी लाभ ले सकते है।
