रासायनिक संकट के बीच भारतीय खेती में बड़ा बदलाव, चालू खरीफ सीजन में जैविक खाद की मांग साढ़े तीन गुना बढ़ी
Organic Fertilizer Sales Kharif 2026: पश्चिम एशिया संकट के बीच खरीफ सीजन 2026 में देश के किसानों ने रिकॉर्ड 11.17 लाख टन जैविक खाद खरीदी है, जो पिछले साल से 3.5 गुना अधिक है।
Organic Fertilizer Sales Kharif 2026: खाड़ी देशों के भू-राजनीतिक तनाव और पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष ने भले ही वैश्विक रासायनिक उर्वरक आपूर्ति श्रृंखला को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हों लेकिन भारतीय किसानों ने इसका एक बेहद सकारात्मक विकल्प ढूंढ लिया है।
देश के कृषि क्षेत्र में पारंपरिक रासायनिक खादों पर निर्भरता कम करने का एक बड़ा जमीनी बदलाव देखा जा रहा है। चालू खरीफ 2026 सीजन में देश भर के किसानों द्वारा जैविक खाद की खरीद में अभूतपूर्व उछाल दर्ज किया गया है।
कृषि मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के अनुसार, चालू सीजन में अब तक किसान 11.17 लाख टन जैविक खाद (एफओएम, एलएफओएम और पीआरओएम) खरीद चुके हैं। पिछले वर्ष की समान अवधि में यह आंकड़ा महज 3.20 लाख टन था। यह लगभग साढ़े तीन गुना से भी अधिक की बढ़त है जो इस बात का स्पष्ट संकेत है कि भारतीय किसान अब खेतों की सेहत सुधारने और पर्यावरण अनुकूल खेती की तरफ तेजी से कदम बढ़ा रहे हैं।
पंजाब और उत्तर प्रदेश जैविक खाद अपनाने में सबसे आगे, देखें राज्यों के आंकड़े
जैविक पोषक तत्वों को अपने खेतों का हिस्सा बनाने में देश के प्रमुख कृषि प्रधान राज्य सबसे आगे चल रहे हैं। इस बदलाव की कमान संभालते हुए पंजाब और उत्तर प्रदेश ने देश में सबसे ज्यादा जैविक खाद की उठान की है।
विभिन्न राज्यों में अब तक हुई जैविक खाद की तकनीकी खरीद के आंकड़े इस प्रकार हैं:
- पंजाब: 2.83 लाख टन
- उत्तर प्रदेश: 2.71 लाख टन
- हरियाणा: 1.33 लाख टन
- मध्य प्रदेश: 1.25 लाख टन
- गुजरात: 0.96 लाख टन
- महाराष्ट्र: 0.84 लाख टन
कम वर्षा के अनुमान से बदला उर्वरक खपत का गणित, जरूरत में की गई कटौती
वैश्विक तनाव और कुछ हिस्सों से आ रही उर्वरक किल्लत की खबरों के बीच केंद्र सरकार ने देश में खाद की उपलब्धता को लेकर स्थिति पूरी तरह स्पष्ट की है। हालांकि बदलते मौसम और मानसून के दौरान सामान्य से कम बारिश की आशंका को देखते हुए सरकार ने इस बार खरीफ 2026 के लिए उर्वरकों की कुल अनुमानित खपत के आंकड़ों का पुनर्मूल्यांकन किया है।
संशोधित अनुमानों के तहत कुल आवश्यकता को पहले के 390.5 लाख टन से घटाकर अब 383.9 लाख टन निर्धारित किया गया है। मुख्य उर्वरकों के अनुमानित आंकड़ों में हुआ तकनीकी बदलाव इस प्रकार है:
- यूरिया: खपत का अनुमान 194 लाख टन से घटाकर 190.3 लाख टन किया गया।
- डीएपी (DAP): अनुमानित आवश्यकता को 59.1 लाख टन से कम करके 56.2 लाख टन आंका गया है।
सरकार के पास आवश्यकता का 51% स्टॉक मौजूद, जून में पहुंचेंगी नई खेप
रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय के मुताबिक देश में खाद की कोई कमी नहीं है और वर्तमान में 197.56 लाख टन उर्वरकों का मजबूत भंडार उपलब्ध है। यह स्टॉक इस सीजन की कुल अनुमानित आवश्यकता का 51 प्रतिशत से अधिक है जबकि आमतौर पर इस समय तक गोदामों में कुल जरूरत का केवल 33 प्रतिशत भंडार ही रहता है। सरकारी रिकॉर्ड बताते हैं कि 7 जून 2026 तक किसान अपनी जरूरत का 22.57 प्रतिशत यानी 86.65 लाख टन रासायनिक उर्वरक खरीद भी चुके हैं।
आपूर्ति व्यवस्था को किसी भी झटके से बचाने के लिए जून महीने के भीतर ही 25 लाख टन से अधिक आयातित यूरिया, डीएपी और एनपीके भारतीय बंदरगाहों पर उतरने वाले हैं। इसके साथ ही घरेलू सुरक्षा को चाक-चौबंद रखने के लिए 17 लाख टन अतिरिक्त यूरिया की खरीद हेतु एक नई वैश्विक निविदा प्रक्रिया पर भी काम चल रहा है ताकि आने वाले दिनों में किसानों को बुवाई के समय किसी भी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।