दिल्ली: नई दिल्ली: देश की खेती को आधुनिक, टिकाऊ और अधिक मुनाफा देने वाली बनाने के लिए केंद्र सरकार ने एक बड़े राष्ट्रव्यापी अभियान का खाका तैयार कर लिया है। आगामी 22 अक्टूबर से 30 नवंबर, 2026 तक पूरे देश में विशेष 'खेत बचाओ अभियान' चलाया जाएगा। इस महाअभियान की तैयारियों और जमीनी रणनीति को लेकर केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने 11 प्रमुख राज्यों के कृषि मंत्रियों के साथ एक उच्चस्तरीय वर्चुअल बैठक (Virtual Meeting) की।
बैठक में उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान, हरियाणा, बिहार, महाराष्ट्र, असम, उत्तराखंड, गुजरात, तेलंगाना और जम्मू-कश्मीर के कृषि मंत्रियों ने हिस्सा लिया। कृषि मंत्री ने दो टूक शब्दों में कहा कि यह अभियान सरकारी दफ्तरों की केवल एक औपचारिकता बनकर न रहे, बल्कि इसका वास्तविक लाभ अंतिम छोर पर खड़े किसान के खेत तक पहुंचना चाहिए। इसके लिए राज्यों को स्थानीय स्तर पर नोडल अधिकारी (Nodal Officers) नियुक्त करने और जिलाधिकारियों (DM) को सीधी निगरानी सौंपने के निर्देश दिए गए हैं।
1 करोड़ किसानों से सीधा संवाद, 1.5 लाख चौपालें
सरकार ने इस अभियान को जनआंदोलन बनाने के लिए एक बड़ा लक्ष्य निर्धारित किया है। कृषि प्रौद्योगिकी प्रबंधन एजेंसी (ATMA) और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के जरिए 50-50 लाख यानी कुल 1 करोड़ प्रतिभागियों तक सीधी पहुंच बनाई जाएगी। इसके लिए 4,150 संयुक्त टीमें गठित की गई हैं। अभियान के दौरान 12,000 से अधिक कृषि वैज्ञानिक और विशेषज्ञ गांवों में उतरेंगे और कुल 1.5 लाख जागरूकता बैठकें व चौपालें आयोजित कर किसानों को उन्नत कृषि पद्धतियों (Advanced Agricultural Practices) का सीधा प्रशिक्षण देंगे।
पराली प्रबंधन और मृदा स्वास्थ्य पर रहेगा मुख्य फोकस
सर्दियों की शुरुआत के साथ उत्तर भारत में पराली जलाने की समस्या को देखते हुए अभियान में फसल अवशेष प्रबंधन (Crop Residue Management) को प्राथमिकता दी गई है। इसके अलावा, उर्वरकों के असंतुलित उपयोग को रोकने, ग्रीन अमोनिया व जैविक खादों को बढ़ावा देने, मृदा स्वास्थ्य कार्ड (Soil Health Card) और जलवायु-अनुकूल खेती (Climate-Resilient Agriculture) के तौर-तरीकों से अन्नदाताओं को अवगत कराया जाएगा। धान की कटाई के बाद खाली रहने वाले खेतों के सदुपयोग और दलहन-तिलहन के विविधीकरण (Crop Diversification) पर भी बल दिया जाएगा।
सरकारी योजनाओं का मिलेगा ऑन-द-स्पॉट लाभ
इस अभियान के तहत केवल तकनीकी सलाह ही नहीं, बल्कि किसानों को योजनाओं से जोड़ने के लिए जमीनी स्तर पर प्रशासनिक काम भी तेज किए जाएंगे। इसमें नए किसान पहचान पत्र (Farmer ID) तैयार करना, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) के तहत पंजीकरण, किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) का वितरण और गुणवत्तापूर्ण बीजों की उपलब्धता सुनिश्चित करना शामिल रहेगा। जो किसान सीधे कार्यक्रमों में शामिल नहीं हो सकेंगे, उन्हें सोशल और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के जरिए जोड़ने की तैयारी है।







