Haryana News: हरियाणा में भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रही मुहिम के तहत भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) की फतेहाबाद टीम ने एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। एसीबी की टीम ने हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (HSVP) के दफ्तर में अचानक छापेमारी करते हुए वहां तैनात एक कर्मचारी को 50 हजार रुपये की मोटी घूस लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया।
पकड़े गए आरोपी की पहचान संजय कुमार के रूप में हुई है। यह पूरी कार्रवाई पूरी पारदर्शिता के साथ ड्यूटी मजिस्ट्रेट की सीधी निगरानी में की गई, जिससे आरोपी को भागने या संभलने का कोई मौका नहीं मिला।
सरकारी दफ्तरों में काम करवाने के नाम पर आम जनता को परेशान करने और जेब ढीली करवाने वाले भ्रष्ट कर्मचारियों के खिलाफ एसीबी का यह हंटर अन्य कर्मियों के लिए भी एक बड़ी चेतावनी है।
वीटा बूथ की परमिशन के नाम पर सौदा
इस पूरे मामले का खुलासा तब हुआ जब चीका के रहने वाले तिलक राम नाम के एक नागरिक ने एसीबी को अपनी आपबीती सुनाई। शिकायतकर्ता तिलक राम अपने रोजगार के लिए एक ‘वीटा बूथ’ की परमिशन (मंजूरी) लेना चाहता था।
आरोप है कि एचएसवीपी कार्यालय के चक्कर काटने के दौरान वहां तैनात कर्मचारी संजय कुमार ने इस फाइल को आगे बढ़ाने और काम करवाने के बदले में साफ तौर पर 60 हजार रुपये की रिश्वत मांग ली।
गरीब और जरूरतमंद आवेदक ने जब असमर्थता जताई, तो काफी मान-मनौव्वल के बाद दोनों के बीच 50 हजार रुपये में सौदा तय हो गया। लेकिन शिकायतकर्ता रिश्वत देकर अपना काम नहीं कराना चाहता था बल्कि वह इस भ्रष्ट सिस्टम को सबक सिखाने की ठान चुका था।
विजिलेंस की टीम ने ऐसे बुना जाल
शिकायतकर्ता तिलक राम ने इस पूरे मामले की गुप्त जानकारी विजिलेंस के सहयोगी रविंद्र जंगी को दी। सूचना मिलते ही एसीबी हरकत में आई और सबसे पहले मामले की अंदरूनी जांच शुरू की। जांच के दौरान एसीबी की टीम ने बेहद चतुराई से काम लिया:
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बातचीत की रिकॉर्डिंग: जांच टीम ने शिकायतकर्ता और आरोपी कर्मचारी संजय कुमार के बीच होने वाली बातचीत को कई बार रिकॉर्ड करवाया।
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पुख्ता सबूत: इस वॉयस रिकॉर्डिंग में जब आरोपी द्वारा खुलेआम रिश्वत मांगने के आरोपों की शत-प्रतिशत पुष्टि हो गई, तो एसीबी ने उसे दबोचने का एक अचूक मास्टर प्लान तैयार किया।
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रंगे हाथ गिरफ्तारी: योजना के मुताबिक शिकायतकर्ता को केमिकल लगे हुए 50 हजार रुपये के नोट देकर एचएसवीपी कार्यालय भेजा गया। जैसे ही संजय कुमार ने वो पैसे अपने हाथ में लिए, पहले से ही ताक में बैठी एसीबी की टीम ने दफ्तर के भीतर धावा बोल दिया और उसे रंगे हाथ दबोच लिया।
इस पूरी रेड के दौरान सिंचाई विभाग (इरिगेशन डिपार्टमेंट) के कार्यकारी अधिकारी गुरविंदर सिंह बतौर ड्यूटी मजिस्ट्रेट मौके पर मौजूद रहे।
उनकी हाजिरी में ही आरोपी की जेब से रिश्वत की पूरी रकम बरामद की गई और उसके हाथ धुलवाए गए जिससे रिश्वत के रंग की पुष्टि हो गई।
एसीबी अब आरोपी के खिलाफ भ्रष्टाचार निरोधक कानून के तहत मामला दर्ज कर आगे की कानूनी तफ्तीश में जुट गई है।
