गुरुग्राम (क्राइम डेस्क): साइबर सिटी और हरियाणा के सबसे हाई-टेक शहर गुरुग्राम से एक ऐसा अनोखा और हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है, जिसने सरकारी विभागों की नींद उड़ा दी है। डिजिटल इंडिया के दौर में तकनीक का ऐसा दुरुपयोग शायद ही पहले कभी देखा गया हो।
गुरुग्राम नगर निगम (MCG) में कुछ सफाई कर्मचारियों द्वारा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और जीपीएस स्पूफिंग (GPS Spoofing) जैसी आधुनिक तकनीकों का गलत इस्तेमाल करके अपनी फर्जी हाजिरी लगाने और सरकारी वेतन डकारने का एक बहुत बड़ा फर्जीवाड़ा पकड़ा गया है।

घर बैठे जीपीएस बदला और एआई से करवाई 'फर्जी सफाई'

विराट भारत के मुख्य संवाददाता विपिन जैलदार की ग्राउंड रिपोर्ट के अनुसार, नगर निगम में कर्मचारियों की हाजिरी को पूरी तरह पारदर्शी बनाने के लिए एक विशेष मोबाइल एप्लीकेशन और जीपीएस ट्रैकिंग सिस्टम लागू किया गया था।
नियम के मुताबिक कर्मचारियों को फील्ड में जाकर ऑन-ड्यूटी काम करते हुए अपनी लाइव लोकेशन और झाड़ू लगाते हुए तस्वीर ऐप पर अपलोड करनी होती थी। लेकिन इन शातिर कर्मचारियों ने इस सिस्टम को ही हैक कर लिया।
वे जीपीएस स्पूफिंग ऐप्स के जरिए अपने मोबाइल की लोकेशन घर बैठे ही ड्यूटी वाले वॉर्ड में दिखा देते थे और एआई टूल्स की मदद से अपनी फर्जी एडिटिंग वाली सफाई करते हुए तस्वीरें बनाकर ऐप पर सबमिट कर देते थे।

फिजिकल वेरिफिकेशन में खुली पोल, ४ कर्मचारी बर्खास्त

कागजों और ऐप पर तो सब कुछ शत-प्रतिशत परफेक्ट चल रहा था, लेकिन जब नगर निगम के उच्च अधिकारियों को कुछ वॉर्डों में सफाई व्यवस्था बदहाल दिखने के बावजूद कर्मचारियों की पूरी हाजिरी पर शक हुआ, तो उन्होंने एक सीक्रेट डिजिटल जांच और फिजिकल वेरिफिकेशन टीम बनाई।
जब अधिकारी अचानक मौके पर मुआयना करने पहुंचे तो वहां ग्राउंड पर कोई कर्मचारी मौजूद नहीं था जबकि ऐप पर उनकी हाजिरी लग चुकी थी। गहराई से हुई आईटी जांच में सामने आया कि ये तस्वीरें कंप्यूटर और एआई जनरेटेड थीं।
निगम कमिश्नर ने त्वरित कार्रवाई करते हुए इस धोखाधड़ी में शामिल 8 संविदा कर्मचारियों को नौकरी से बर्खास्त कर दिया है और आगे की जांच के आदेश दे दिए हैं।