हरियाणा में एआई वाला तगड़ा फर्जीवाड़ा: गुरुग्राम नगर निगम में AI फोटो और GPS से लगा रहे थे फर्जी हाजिरी, खेल खुला तो गिरी गाज!
स्मार्ट सिटी के सरकारी सिस्टम को 'ओवर-स्मार्ट' चालबाजों ने ऐसे दिया चकमा कि अधिकारी भी रह गए दंग; मोबाइल ऐप में घर बैठे जीपीएस लोकेशन बदलकर और एआई सॉफ्टवेयर से झाड़ू लगाते हुए फर्जी तस्वीरें जनरेट कर महीनों तक उठाई मोटी सरकारी सैलरी, डिजिटल चेकिंग की पैनी नज़र ने रंगे हाथों पकड़कर किया बड़ा भंडाफोड़।
स्रोत: विराट भारत (प्रतीकात्मक चित्र) / डिजिटल इंडिया में 'डिजिटल जालसाजी'; स्मार्ट तकनीक का गलत इस्तेमाल कर सरकारी खजाने को लगाई जा रही थी चपत।
📌 मुख्य बातें:
- ⬤ गुरुग्राम नगर निगम में एआई तकनीक का इस्तेमाल कर फर्जी हाजिरी लगाने का सनसनीखेज मामला।
- ⬤ कर्मचारी जीपीएस स्पूफिंग से लोकेशन बदलते थे और एआई से सफाई की झूठी तस्वीरें बनाते थे।
- ⬤ अधिकारियों द्वारा किए गए औचक फिजिकल वेरिफिकेशन में इस हाई-टेक घोटाले की पोल खुली।
- ⬤ नगर निगम ने सख्त एक्शन लेते हुए 8 मुख्य जालसाज संविदा कर्मचारियों को तत्काल प्रभाव से नौकरी से निकाला।
गुरुग्राम (क्राइम डेस्क): साइबर सिटी और हरियाणा के सबसे हाई-टेक शहर गुरुग्राम से एक ऐसा अनोखा और हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है, जिसने सरकारी विभागों की नींद उड़ा दी है। डिजिटल इंडिया के दौर में तकनीक का ऐसा दुरुपयोग शायद ही पहले कभी देखा गया हो।
गुरुग्राम नगर निगम (MCG) में कुछ सफाई कर्मचारियों द्वारा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और जीपीएस स्पूफिंग (GPS Spoofing) जैसी आधुनिक तकनीकों का गलत इस्तेमाल करके अपनी फर्जी हाजिरी लगाने और सरकारी वेतन डकारने का एक बहुत बड़ा फर्जीवाड़ा पकड़ा गया है।
विराट भारत के मुख्य संवाददाता विपिन जैलदार की ग्राउंड रिपोर्ट के अनुसार, नगर निगम में कर्मचारियों की हाजिरी को पूरी तरह पारदर्शी बनाने के लिए एक विशेष मोबाइल एप्लीकेशन और जीपीएस ट्रैकिंग सिस्टम लागू किया गया था।
नियम के मुताबिक कर्मचारियों को फील्ड में जाकर ऑन-ड्यूटी काम करते हुए अपनी लाइव लोकेशन और झाड़ू लगाते हुए तस्वीर ऐप पर अपलोड करनी होती थी। लेकिन इन शातिर कर्मचारियों ने इस सिस्टम को ही हैक कर लिया।
वे जीपीएस स्पूफिंग ऐप्स के जरिए अपने मोबाइल की लोकेशन घर बैठे ही ड्यूटी वाले वॉर्ड में दिखा देते थे और एआई टूल्स की मदद से अपनी फर्जी एडिटिंग वाली सफाई करते हुए तस्वीरें बनाकर ऐप पर सबमिट कर देते थे।
कागजों और ऐप पर तो सब कुछ शत-प्रतिशत परफेक्ट चल रहा था, लेकिन जब नगर निगम के उच्च अधिकारियों को कुछ वॉर्डों में सफाई व्यवस्था बदहाल दिखने के बावजूद कर्मचारियों की पूरी हाजिरी पर शक हुआ, तो उन्होंने एक सीक्रेट डिजिटल जांच और फिजिकल वेरिफिकेशन टीम बनाई।
जब अधिकारी अचानक मौके पर मुआयना करने पहुंचे तो वहां ग्राउंड पर कोई कर्मचारी मौजूद नहीं था जबकि ऐप पर उनकी हाजिरी लग चुकी थी। गहराई से हुई आईटी जांच में सामने आया कि ये तस्वीरें कंप्यूटर और एआई जनरेटेड थीं।
निगम कमिश्नर ने त्वरित कार्रवाई करते हुए इस धोखाधड़ी में शामिल 8 संविदा कर्मचारियों को नौकरी से बर्खास्त कर दिया है और आगे की जांच के आदेश दे दिए हैं।
संपादित: विनोद यादव
|
दिनांक: 4 जुलाई 2026 • 02:48 AM
|
स्रोतः विराट भारत न्यूज़
टिप्पणियां (0)
कोई टिप्पणी नहीं है। पहली टिप्पणी आप लिखें!