शुक्रवार, 31 जुलाई 2026

हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: दिव्यांगजन अधिनियम के तहत सेवानिवृत्ति की उम्र बढ़ाना ‘मौलिक अधिकार’ नहीं, सरकार का नीतिगत फैसला

Written by: Vinod Yadav

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आज पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट का बड़ा फैसला आया है। आपको बता दें की हाईकोर्ट की तरफ से कहा गया है की दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम के तहत सेवानिवृत्ति आयु बढ़ाना मौलिक अधिकार नहीं है। पढ़ें पूरी कानूनी रिपोर्ट विराट भारत न्यूज़ पर।


हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: दिव्यांगजन अधिनियम के तहत सेवानिवृत्ति की उम्र बढ़ाना 'मौलिक अधिकार' नहीं, सरकार का नीतिगत फैसला
हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: दिव्यांगजन अधिनियम के तहत सेवानिवृत्ति की उम्र बढ़ाना 'मौलिक अधिकार' नहीं, सरकार का नीतिगत फैसला
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चंडीगढ़ (विराट भारत न्यूज़): पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने सरकारी कर्मचारियों की सेवा शर्तों और दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम (Rights of Persons with Disabilities Act, 2016) को लेकर एक बेहद महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। हाईकोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि दिव्यांगता कानून के तहत सेवानिवृत्ति (Retirement) की उम्र बढ़ाना कर्मचारियों का कोई मौलिक अधिकार (Fundamental Right) नहीं है। इतना ही नहीं बल्कि आज अदालत ने माना कि सेवानिवृत्ति की आयु तय करना पूरी तरह से सरकार का नीतिगत फैसला (Policy Decision) है और इसमें अदालतें तब तक हस्तक्षेप नहीं कर सकतीं जब तक कि कोई मनमाना फैसला न लिया गया हो।

क्या था पूरा मामला?

हमारे आधिकारिक सूत्रों से मिल रही रिपोर्ट के अनुसार हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर दिव्यांग अधिनियम का हवाला देते हुए मांग की गई थी कि दिव्यांग कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति आयु को सामान्य उम्र (58/60 वर्ष) से आगे बढ़ाया जाए या इसे बढ़ाना कानूनन उनका अधिकार माना जाए।

आपको बता दें की इस मामले में याचिकाकर्ता का तर्क था कि दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम (RPwD Act) के तहत विशेष सुरक्षा और समानता का प्रावधान है इसलिए राज्य सरकार को उनकी सेवानिवृत्ति की उम्र बढ़ाने का निर्देश दिया जाना चाहिए।

हाईकोर्ट की अहम टिप्पणियां जो आपको जाननी चाहिए

मामले की सुनवाई करते हुए पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट की पीठ ने याचिका को खारिज करते हुए कुछ मुख्य बिंदु रखे जिनमे –

  1. मौलिक अधिकार नहीं: दिव्यांग अधिनियम के प्रावधानों का उद्देश्य रोजगार में अवसर की समानता और भेदभाव को रोकना है लेकिन यह किसी कर्मचारी को सेवानिवृत्ति आयु में स्वतः विस्तार (Extension) पाने का मौलिक या निहित अधिकार (Vested Right) प्रदान नहीं करता।
  2. सरकार का विशेषाधिकार: किस पद पर और किस श्रेणी के कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति आयु क्या होगी, यह तय करना पूरी तरह से कार्यपालिका (Executive/State Government) के अधिकार क्षेत्र में आता है।
  3. समानता का दायरा: अदालत ने कहा कि राज्य सरकार अपनी नीति के तहत कानून के दायरे में रहकर निर्णय लेने के लिए स्वतंत्र है, जब तक कि वह संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) का उल्लंघन न करे।

कानून की नजर में क्या मतलब है?

देखिये सुप्रीम कोर्ट और विभिन्न उच्च न्यायालयों का यह स्थापित सिद्धांत (Established Precedent) है कि सर्विस लॉ में सेवानिवृत्ति की आयु तय करना नीतिगत मामला है। दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम 2016 (RPwD Act) रोजगार के दौरान भेदभाव रहित माहौल देने की गारंटी देता है लेकिन यह राज्य सरकार को सेवानिवृत्ति आयु बढ़ाने के लिए बाध्य नहीं करता। हाईकोर्ट का यह फैसला राज्य सरकार के प्रशासनिक और नीतिगत अधिकारों को पुनः स्पष्ट करता है।

Vinod Yadav
लेखक के बारे में Vinod Yadav

विनोद यादव 'विराट भारत न्यूज़' के संस्थापक एवं प्रधान संपादक हैं। वे डिजिटल मीडिया, रणनीतिक पत्रकारिता और निष्पक्ष समाचार कवरेज में वर्षों का अनुभव रखते हैं। उनका मुख्य फोकस राष्ट्रीय मुद्दों, प्रशासनिक पारदर्शिता और जनहितैषी पत्रकारिता पर है। विराट भारत न्यूज़ के माध्यम से वे पाठकों तक सत्य, विश्वसनीय और सटीक समाचार पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। View all posts by Vinod Yadav →