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हरियाणा शिक्षा विभाग का अल्टीमेटम: 12 हजार सरकारी टीचरों की नौकरी दांव पर! बिना HTET अब नहीं चलेगी मास्टरी
Haryana News: हरियाणा के सरकारी स्कूलों में बरसों से बिना HTET पढ़ा रहे शिक्षकों पर अब तक की सबसे बड़ी गाज गिरी है। विद्यालय शिक्षा निदेशालय ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला देकर साफ कर दिया है कि तय समय में परीक्षा पास न करने वालों को कंपलसरी रिटायरमेंट दी जाएगी। जानिए किन शिक्षकों पर इसका सबसे ज्यादा असर होगा।
Haryana News: हरियाणा के सरकारी स्कूल के अध्यापकों के लिए एक ऐसी प्रशासनिक और कानूनी मुसीबत खड़ी हो गई है, जिसने सीधे तौर पर करीब 12,000 शिक्षकों की नौकरी और भविष्य पर सवालिया निशान लगा दिया है। विद्यालय शिक्षा निदेशालय (हरियाणा) ने एक बेहद कड़ा और स्पष्ट रुख अपनाते हुए आदेश जारी किया है कि बिना हरियाणा अध्यापक पात्रता परीक्षा (HTET) पास किए स्कूलों में सेवाएं दे रहे शिक्षकों को अब हर हाल में यह परीक्षा पास करनी ही होगी। ऐसा न करने की स्थिति में उन्हें अपनी सुरक्षित मानी जाने वाली सरकारी नौकरी से भी हाथ धोना पड़ सकता है।
यह पूरा मामला देश की सर्वोच्च अदालत के उस फैसले से जुड़ा है, जिसने शिक्षा के स्तर को सुधारने के लिए पात्रता परीक्षा को अनिवार्य माना है। इस आदेश के बाद महकमे में खलबली मच गई है क्योंकि प्रभावित होने वाले शिक्षकों में एक बड़ी संख्या ऐसे वरिष्ठ अध्यापकों की है जो सालों से बिना इस सर्टिफिकेट के पढ़ा रहे थे।
दो हिस्सों में बंटा फैसला: समझिए किस पर क्या असर होगा?
प्रशासनिक आदेश को धरातल पर लागू करने के लिए शिक्षा निदेशालय ने अध्यापकों की सेवा अवधि के आधार पर इसे दो अलग-अलग श्रेणियों में वर्गीकृत किया है:
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- सेवाकाल 5 साल से अधिक (सीधा नौकरी पर संकट): इस आदेश की सबसे बड़ी मार उन शिक्षकों पर पड़ने जा रही है, जिनकी सरकारी नौकरी 1 सितंबर 2025 की कट-ऑफ तारीख के आधार पर 5 साल से ज्यादा बची हुई है। ऐसे अध्यापकों को अपने संबंधित विषय की HTET परीक्षा को क्लियर करना ही होगा। यदि वे इस परीक्षा को पास करने में असमर्थ रहते हैं, तो विभाग उन्हें सेवा से बाहर का रास्ता दिखा सकता है या फिर अनिवार्य सेवानिवृत्ति (Compulsory Retirement) थमा दी जाएगी।
- सेवाकाल 5 साल से कम (रिटायरमेंट सुरक्षित, लेकिन प्रमोशन पर ब्रेक): जिन शिक्षकों की नौकरी के 5 साल से कम बचे हैं, उन्हें मानवीय आधार पर एक बड़ी राहत दी गई है। वे बिना किसी डर के अपनी रिटायरमेंट की उम्र तक स्कूल में पढ़ा सकेंगे। हालांकि, नुकसान यह होगा कि बिना HTET सर्टिफिकेट के उन्हें भविष्य में कोई प्रमोशन (पदोन्नति) नहीं दी जाएगी और वे मौजूदा पद पर रहते हुए ही सेवानिवृत्त होंगे।
सुप्रीम कोर्ट की कानूनी चौखट से निकला है यह फरमान
यह आदेश कोई तात्कालिक प्रशासनिक निर्णय नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक लंबी कानूनी लड़ाई है। शिक्षा निदेशालय ने यह कदम सुप्रीम कोर्ट की सिविल अपील संख्या 1385/2025 (अंजुमन इशात-ए-तलीम ट्रस्ट बनाम महाराष्ट्र राज्य व अन्य) में 1 सितंबर 2025 को आए ऐतिहासिक फैसले के अनुपालन में उठाया है। इस फैसले पर बाद में डाली गई पुनर्विचार याचिका (रिव्यू पिटीशन) को भी अदालत ने 29 मई 2026 को खारिज कर आदेश को बरकरार रखा था।
अब संकट की इस घड़ी में शिक्षकों को राहत देने और उन्हें परीक्षा पास करने के उचित मौके देने के लिए हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड, भिवानी (BSEH) को जिम्मेदारी सौंपी गई है। बोर्ड को विशेष निर्देश दिए गए हैं कि वह अब साल में एक बार के बजाय दो बार HTET परीक्षा का आयोजन सुनिश्चित करे, ताकि प्रभावित शिक्षक अपनी नौकरी बचा सकें।
शिक्षक संगठनों की तीखी प्रतिक्रिया, दोबारा कोर्ट जाने की तैयारी
अचानक आए इस फरमान से शिक्षक गुट बेहद नाराज हैं। हरियाणा प्राइमरी टीचर एसोसिएशन ने इस फैसले को बरसों से सेवा दे रहे कर्मचारियों के अधिकारों का हनन बताया है। एसोसिएशन के पदाधिकारियों का कहना है कि वे इस प्रशासनिक कार्रवाई के खिलाफ चुप नहीं बैठेंगे। इस संकट से अपने साथियों को निकालने के लिए शिक्षक संगठन अब इस कानूनी लड़ाई को दोबारा सुप्रीम कोर्ट की डिवीजन बेंच (खंडपीठ) के समक्ष ले जाने की रणनीति तैयार कर रहा है।


