विराट भारत न्यूज़ ब्यूरो, नई दिल्ली : ओडिशा और छत्तीसगढ़ के बीच बरसों से चले आ रहे महानदी जल विवाद (Mahanadi River Water Dispute) को खत्म करने के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा दांव चला है। नई दिल्ली में केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय की अगुवाई में एक हाई-लेवल बैठक बुलाई गई, जिसमें छत्तीसगढ़ और ओडिशा दोनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने आमने-सामने बैठकर चर्चा की।
इस बैठक का सीधा मकसद कानूनी मुकदमों और ट्रिब्यूनल की लंबी तारीखों को छोड़कर बातचीत के जरिए पानी के बंटवारे का स्थायी समाधान निकालना है।
टेबल पर रखे गए दोनों राज्यों के कार्ड
जानकारी के अनुसार मैराथन बैठक में दोनों राज्यों के शीर्ष प्रशासनिक अधिकारी और जल संसाधन विशेषज्ञ मौजूद रहे। बैठक में दोनों राज्यों ने मानसून और गैर-मानसून सीजन में पानी के वास्तविक बहाव का डेटा सामने रखा:
- छत्तीसगढ़ का रुख: राज्य का तर्क है कि उसके बनाए बैराजों से निचले इलाकों में पानी का बहाव प्रभावित नहीं होता और वह अपने हिस्से का पानी उपयोग कर रहा है।
- ओडिशा का ऐतराज: ओडिशा का कहना है कि ऊपरी हिस्से में निर्माण के कारण शुष्क मौसम में हीराकुड बांध तक पानी का फ्लो घट जाता है, जिससे खेती पर असर पड़ता है।
“कोर्ट-कचहरी की लंबी लड़ाई के बजाय यदि दो राज्य आपसी समझ से जल विवाद सुलझाते हैं, तो इसका सीधा फायदा दोनों प्रदेशों के किसानों को मिलता है।”
— केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय
विवाद का गणित और आगे का प्लान
विराट भारत न्यूज़ के विश्लेषण के अनुसार साल 2018 में महानदी जल विवाद न्यायाधिकरण (MWDT) बनने के बावजूद मामला अटका हुआ था। अब नई पहल के तहत दोनों राज्यों के तकनीकी विशेषज्ञों की एक जॉइंट टीम बनाई जाएगी। यह टीम नदी में पानी की उपलब्धता का दोबारा साइंटिफिक सर्वे करेगी, जिसके आधार पर अगला ड्राफ्ट तैयार होगा।
राष्ट्रीय राजनीति के लिहाज से यह बैठक बेहद अहम है। दो पड़ोसी राज्यों के बीच का विवाद जब टेबल टॉक से सुलझता है तो यह देश के अन्य नदी जल विवादों के लिए भी एक बेहतर नज़ीर पेश करता है।
