
Punjab Election 2026: पंजाब विधानसभा चुनाव को लेकर सूबे की राजनीतिक बिसात पर शह और मात का खेल शुरू हो चुका है। सत्ता में दोबारा वापसी के लिए छटपटा रही कांग्रेस पार्टी के भीतर इस समय भारी हलचल और बैठकों का दौर बेहद तेज हो गया है। इसी कड़ी में देश की राजधानी दिल्ली से एक बहुत बड़ी राजनीतिक खबर सामने आ रही है।
कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के दिल्ली स्थित सरकारी आवास पर गुरुवार, 3 सितंबर 2026 को पंजाब चुनाव की रणनीति को लेकर एक हाई-लेवल और बेहद संवेदनशील बैठक बुलाई गई। इस बैठक के बाद जो छनकर खबरें बाहर आ रही हैं, उसने पंजाब की सियासत में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है।
सूत्रों के मुताबिक कांग्रेस आलाकमान ने इस बार आंतरिक गुटबाजी से बचने के लिए पंजाब चुनाव में बिना किसी मुख्यमंत्री (CM) के चेहरे के उतरने का एक बेहद चौंकाने वाला और बड़ा फैसला किया है।
इस महत्वपूर्ण बैठक में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के अलावा लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल मुख्य रूप से शामिल रहे। यह पूरी बैठक ऐसे समय पर बुलाई गई है, जब कुछ ही दिनों बाद राहुल गांधी पंजाब के एक बड़े सियासी दौरे पर निकलने वाले हैं।
बैठक के दौरान संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल ने पंजाब कांग्रेस के मौजूदा जमीनी हालात और सांगठनिक ताकत को लेकर एक विस्तृत रिपोर्ट आलाकमान के सामने पेश की। इस रिपोर्ट के आधार पर ही नेताओं ने यह तय किया है कि पार्टी पंजाब में किसी एक चेहरे को आगे करने के बजाय ‘सामूहिक नेतृत्व’ (Collective Leadership) के तहत चुनाव मैदान में जाएगी, ताकि टिकटों के बंटवारे और कैंपेनिंग के दौरान किसी भी तरह की बगावत को रोका जा सके।
अमरिंदर सिंह की वापसी और चन्नी गुट के बीच मचे घमासान पर चर्चा
दरअसल, कांग्रेस ने पंजाब चुनाव के मद्देनजर एक बड़ा प्रशासनिक दांव खेलते हुए अमरिंदर सिंह को दोबारा से प्रदेश अध्यक्ष की कमान सौंप दी है। आलाकमान के इस फैसले के बाद से ही पंजाब कांग्रेस के भीतर एक बार फिर पुरानी अंतर्कलह और घमासान खुलकर सामने आ गया है। इस समय राज्य संगठन पूरी तरह दो गुटों में बंटा हुआ नजर आ रहा है।
एक तरफ पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी का खेमा है, तो दूसरी तरफ नवनियुक्त प्रदेश अध्यक्ष अमरिंदर सिंह का गुट है। इन दोनों कद्दावर नेताओं के बीच चल रहे पुराने मतभेद अब चुनावी मुहाने पर खुलकर सतह पर आ गए हैं।
इस हाई-प्रोफाइल मीटिंग में प्रदेश अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वडिंग और पंजाब विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा की मौजूदगी की भी पुख्ता खबर है। आलाकमान ने इन सभी नेताओं को सख्त हिदायत देते हुए मतभेदों को तुरंत खत्म करने और पूरी पार्टी को एकजुट होकर चुनावी मैदान में झोंकने के निर्देश दिए हैं।
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11 सितंबर से शुरू होगा राहुल गांधी का तीन दिवसीय पंजाब दौरा
इस बैठक का एक मुख्य एजेंडा राहुल गांधी का आगामी पंजाब दौरा भी रहा। जानकारी के अनुसार, लोकसभा के नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी 11 सितंबर से 13 सितंबर 2026 के बीच पंजाब के तीन दिवसीय दौरे पर आ सकते हैं। हालांकि इस दौरे की अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है, लेकिन पार्टी ने इस यात्रा को लेकर जमीनी स्तर पर अपनी तैयारियां बेहद तेज कर दी हैं।
कांग्रेस नेतृत्व चाहता है कि राहुल गांधी के कदम पंजाब की धरती पर पड़ने से पहले ही पार्टी के भीतर चल रही आपसी खींचतान को पूरी तरह शांत कर लिया जाए, ताकि जनता के बीच एकजुटता का एक मजबूत संदेश भेजा जा सके। अब देखना बेहद दिलचस्प होगा कि बिना मुख्यमंत्री के चेहरे और गुटबाजी के इस दलदल के बीच कांग्रेस आगामी विधानसभा चुनाव में किस तरह अपना बेड़ा पार लगा पाती है।
