मंगलवार, 11 अगस्त 2026

लोकसभा में ‘एंटी-पेपर लीक बिल’ पर आज होगी निर्णायक बहस, 10 साल की जेल और फास्ट ट्रैक कोर्ट का प्रावधान

Written by: Vinod Yadav

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नई दिल्ली। देश की प्रतियोगी परीक्षाओं में धांधली और पर्चा लीक करने वाले गिरोहों पर नकेल कसने के लिए केंद्र सरकार द्वारा लाया गया लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) संशोधन विधेयक, 2026…


लोकसभा में 'एंटी-पेपर लीक बिल' पर आज होगी निर्णायक बहस, 10 साल की जेल और फास्ट ट्रैक कोर्ट का प्रावधान
लोकसभा में 'एंटी-पेपर लीक बिल' पर आज होगी निर्णायक बहस, 10 साल की जेल और फास्ट ट्रैक कोर्ट का प्रावधान
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नई दिल्ली। देश की प्रतियोगी परीक्षाओं में धांधली और पर्चा लीक करने वाले गिरोहों पर नकेल कसने के लिए केंद्र सरकार द्वारा लाया गया लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) संशोधन विधेयक, 2026 आज लोकसभा में चर्चा के लिए सूचीबद्ध है। मानसून सत्र के दौरान नीट और अन्य राष्ट्रीय परीक्षाओं पर हुए हंगामे के बाद, संसद में कायम गतिरोध अब समाप्त हो गया है और दोपहर 12 बजे से इस ऐतिहासिक कानून पर विस्तृत चर्चा होगी।

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​केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह द्वारा निचले सदन में पेश किए गए इस बिल में पिछले 2024 के मूल कानून की तुलना में कई कड़े बदलाव किए गए हैं, ताकि देश के करोड़ों युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वाले माफिया पर लगाम कसी जा सके।

​क्या है ‘एंटी-पेपर लीक अमेंडमेंट बिल 2026’ और क्या बदलेंगे नियम?

​संसद में प्रस्तुत संशोधन मसौदे के अनुसार, यह कानून अब केवल सजा देने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि कानूनी प्रक्रिया को बेहद तेज बनाने पर केंद्रित है।

  • विशेष फास्ट-ट्रैक कोर्ट: राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में इस कानून के तहत अपराधों की सुनवाई के लिए स्पेशल फास्ट-ट्रैक कोर्ट का गठन किया जाएगा।
  • समयबद्ध जांच व ट्रायल: जांच एजेंसियों को 2 महीने (60 दिन) के भीतर चार्जशीट दाखिल करनी होगी और कोर्ट को रोजाना सुनवाई करके 90 दिनों में ट्रायल पूरा करना अनिवार्य होगा।
  • सजा और जुर्माना: सामान्य पेपर लीक और नकल कराने के मामलों में 5 से 10 साल की जेल और 50 लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है। वहीं, संगठित अपराध (रैकेट चलाकर पेपर लीक कराने वाले माफिया) के लिए कम से कम 7 साल से लेकर 10 साल की कैद और 1 करोड़ से 10 करोड़ रुपये तक के भारी आर्थिक दंड का प्रस्ताव है।

​छात्रों के आंदोलन और संसद में गतिरोध के बाद बनी सहमति

​हाल ही में दिल्ली के जंतर-मंतर और देश के अन्य हिस्सों में छात्रों के उग्र प्रदर्शन और राजनीतिक तनातनी के बाद संसद में इस मुद्दे पर तीखी बहस चल रही थी। विपक्षी दल भर्ती परीक्षाओं में लापरवाही की उच्च स्तरीय जवाबदेही तय करने की मांग कर रहे थे।

​लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला की मध्यस्थता में सत्तापक्ष और विपक्ष के फ्लोर लीडर्स के बीच सहमति बनी, जिसके बाद इस विधेयक को पास कराने के लिए सदन में 6 घंटे से अधिक समय का विचार-विमर्श तय किया गया है। सरकार का दावा है कि इस नए संशोधित कानून के अस्तित्व में आने के बाद देश की राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही पूरी तरह सुनिश्चित हो जाएगी।

Vinod Yadav
लेखक के बारे में Vinod Yadav

विनोद यादव 'विराट भारत न्यूज़' के संस्थापक एवं प्रधान संपादक हैं। वे डिजिटल मीडिया, रणनीतिक पत्रकारिता और निष्पक्ष समाचार कवरेज में वर्षों का अनुभव रखते हैं। उनका मुख्य फोकस राष्ट्रीय मुद्दों, प्रशासनिक पारदर्शिता और जनहितैषी पत्रकारिता पर है। विराट भारत न्यूज़ के माध्यम से वे पाठकों तक सत्य, विश्वसनीय और सटीक समाचार पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। View all posts by Vinod Yadav →

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