पुणे के किसानों की चमकेगी किस्मत: दिशा कृषी उन्नती से बढ़ेगा एक्सपोर्ट, कलेक्टर ने कसी कमर! जानें क्या है मास्टर प्लान
पुणे में 'दिशा कृषी उन्नती-2029' के जरिए किसानों को ग्लोबल मार्केट से जोड़ने की तैयारी शुरू हो गई है। कलेक्टर जितेंद्र डुडी ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि निर्यातक्षम खेती के लिए सूक्ष्म नियोजन करें ताकि किसानों की आय में बड़ा उछाल आए।
पुणे। महाराष्ट्र की खेती और किसानों के लिए पुणे से एक बड़ी और उम्मीद भरी खबर आ रही है। अगर आप पुणे के किसान हैं या खेती-किसानी से जुड़े हैं तो दिशा कृषी उन्नती अभियान आपकी तकदीर बदलने वाला साबित हो सकता है।
पुणे के कलेक्टर जितेंद्र डुडी ने साफ कर दिया है कि अब पारंपरिक खेती के ढर्रे को छोड़कर किसानों को निर्यातकों (Exporters) की कतार में खड़ा करने का समय आ गया है।
हाल ही में हुई एक हाई-लेवल रिव्यू मीटिंग में कलेक्टर ने सख्त लहजे में कहा कि सिर्फ योजनाएं बनाना काफी नहीं है बल्कि जमीन पर बदलाव दिखना चाहिए।
उन्होंने निर्देश दिया कि गावों में किसानों के ग्रुप बनाए जाएं और उन्हीं के बीच से मास्टर ट्रेनर तैयार किए जाएं। मकसद साफ है कि किसान ही किसान को सिखाएगा कि ग्लोबल मार्केट की मांग के हिसाब से फसल कैसे उगाई जाती है।
अंजीर से लेकर स्ट्रॉबेरी तक... क्लस्टर वाली कमाई
प्रशासन का पूरा फोकस इस समय दिशा कृषी उन्नती-2029 के रोडमैप पर है। इसके तहत जिले के खास इलाकों को विशिष्ट फसलों के लिए क्लस्टर के रूप में विकसित किया जा रहा है।
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फोकस फसलें: केला, अंजीर, आम, स्ट्रॉबेरी, अनार, सीताफल और अंगूर।
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नया विस्तार: अब सूरजमुखी और करडई (तिलहन) के क्षेत्र को बढ़ाने के लिए भी माइक्रो-प्लानिंग की जा रही है।
खर्च घटेगा, मुनाफा बढ़ेगा
बैठक के दौरान जिला अधीक्षक कृषि अधिकारी संजय काचाळे ने बताया कि द्राक्ष और अनार जैसी फसलों के रकबे में तो बढ़ोतरी हुई है लेकिन अब चुनौती तकनीक के सही इस्तेमाल की है।
कलेक्टर डुडी ने स्पष्ट किया कि सूक्ष्म सिंचाई (Micro Irrigation) और मशीनीकरण के जरिए खेती की लागत को कम करना पहली प्राथमिकता है।
जब लागत कम होगी और क्वालिटी अंतरराष्ट्रीय स्तर की होगी तभी पुणे का किसान दुनिया के बाजारों में मुकाबला कर पाएगा।
सीधे खेत में पहुंचेंगे अधिकारी
न्यूजरूम को मिली जानकारी के मुताबिक अब तहसील स्तर के कृषि अधिकारियों को दफ्तर छोड़कर खेतों की खाक छाननी होगी।
अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे सीधे किसानों से संवाद करें और उनकी समस्याओं को ऑन-द-स्पॉट सुलझाएं।
कलेक्टर ने किसानों को भरोसा दिलाया है कि बुनियादी ढांचे (Infrastructure) के लिए सरकार के पास फंड की कोई कमी नहीं है बस जरूरत है तो सही दिशा में कदम बढ़ाने की।
इस अभियान से न केवल बिचौलियों की चैन टूटेगी बल्कि 'फार्मर प्रोड्यूसर कंपनियों' (FPOs) को सीधे निर्यात साखली (Supply Chain) से जोड़कर किसानों के बैंक खातों तक सीधा मुनाफा पहुँचाने की तैयारी है।
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