टोंक की घाड़ मंडी में फिर गूंजेगी किसानों की बोली, व्यापारियों ने मान ली बात, लेकिन प्रशासन के सामने रख दी ये बड़ी शर्त
टोंक जिले के घाड़ कस्बे में लंबे समय से बंद पड़ी कृषि मंडी के ताले अब खुलने वाले हैं। किसानों के भारी विरोध और व्यापारियों की शर्तों के बीच प्रशासन ने मंडी शुरू करने का रास्ता साफ कर दिया है। जानिए क्या है व्यापारियों की मांग।
टोंक। किसान भाइयों राजस्थान के टोंक जिले के घाड़ कस्बे के लिए राहत भरी खबर है। पिछले काफी समय से सन्नाटे में डूबी घाड़ की गौण मंडी में अब फिर से रौनक लौटने वाली है और इसको लेकर एक बड़ा अपडेट अब सामने आ गया है।
आपकी जानकारी के लिए बता दें की किसानों के कड़े तेवर और व्यापारियों के साथ हुई मैराथन बैठक के बाद आखिरकार मंडी में खरीद प्रक्रिया फिर से शुरू करने पर सहमति बन गई है।
सुबह का हंगामा आया काम
गुरुवार की सुबह घाड़ मंडी के गेट पर नजारा आम दिनों से अलग था। बड़ी संख्या में किसान अपनी ट्रैक्टर-ट्रॉलियों में फसल भरकर पहुंच गए लेकिन मंडी के ताले बंद देखकर उनका गुस्सा फूट पड़ा।
किसानों ने गेट के सामने ही डेरा डाल दिया और जमकर नारेबाजी की। किसानों का साफ कहना था कि अगर मंडी जल्द चालू नहीं हुई तो वे चुप नहीं बैठेंगे और एक बड़े आंदोलन की शुरुआत करेंगे।
व्यापारियों की नो कॉम्प्रोमाइज शर्त
मामले की गंभीरता को देखते हुए जब प्रशासन ने मध्यस्थता की तो व्यापारियों ने भी अपना पक्ष मजबूती से रखा। घाड़ व्यापार मंडल के सदस्य राकेश मुंदड़ा सहित अन्य प्रमुख व्यापारियों ने स्पष्ट किया कि उन्हें मंडी चलाने में कोई आपत्ति नहीं है लेकिन खेल बिगाड़ रहे अवैध खरीदारों पर लगाम लगानी होगी।
व्यापारियों का तर्क है कि गांवों में अवैध रूप से फसल खरीदने वाले लोग न केवल मंडी के राजस्व को चपत लगा रहे हैं बल्कि किसानों के साथ करोड़ों की धोखाधड़ी भी कर चुके हैं।
व्यापारियों ने प्रशासन से दो टूक कहा की अगर अवैध खरीद रुकी और माल मंडी में आया, तभी हम अपनी दुकानें खोलेंगे। साथ ही किसान भाइयो आपको बता दें की उपज के सुरक्षित भंडारण के लिए एक वेयरहाउस की मांग भी प्रमुखता से उठाई गई है।
प्रशासनिक मुस्तैदी और आगे की राह
देवली कृषि उपज मंडी समिति की सचिव प्रियंका गर्ग ने इस पूरे मामले पर सकारात्मक रुख दिखाया है। उन्होंने पुष्टि की है कि व्यापारियों की मांगों पर विचार करते हुए जल्द ही खरीद शुरू कर दी जाएगी।
सचिव ने आश्वस्त किया कि किसानों को मूलभूत सुविधाएं जैसे बिजली, पानी और पुख्ता सुरक्षा व्यवस्था मुहैया कराना उनकी प्राथमिकता है।
इस फैसले के बाद अब उम्मीद जताई जा रही है कि घाड़ क्षेत्र के किसानों को अपनी फसल बेचने के लिए दूर नहीं भटकना पड़ेगा।
हालांकि अब सबकी नजरें प्रशासन पर हैं कि वे गांवों में चल रही अवैध खरीद के नेटवर्क को कैसे तोड़ते हैं।
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