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हिसार कांग्रेस में फिर संगठनात्मक बदलाव की आहट, नरेश सेलवाल के नाम से बढ़ी हलचल, हाईकमान के फैसले पर टिकी नजर

हिसार: हरियाणा कांग्रेस में संगठन को नए सिरे से मजबूत करने की कवायद के बीच हिसार जिला संगठन को लेकर एक बार फिर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। प्रदेश के सात जिलों में संगठनात्मक फेरबदल की चर्चाओं के बीच हिसार में भी जिलाध्यक्ष के चेहरे को लेकर पार्टी के भीतर मंथन शुरू होने की खबर है। इसी बीच उकलाना विधायक नरेश सेलवाल का नाम संभावित दावेदार के तौर पर चर्चा में आया है।

सेलवाल के नाम की चर्चा को इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि कांग्रेस के संगठन सृजन अभियान के दौरान हिसार में जिलाध्यक्ष चयन के लिए पार्टी ने बाकायदा कार्यकर्ताओं से फीडबैक लेने की प्रक्रिया शुरू की थी। जून 2025 में AICC पर्यवेक्षक जगदीश चंद्र जांगिड़ ने हिसार में बताया था कि जिले के सभी विधानसभा क्षेत्रों में कार्यकर्ताओं से राय ली जाएगी और छह नामों को शॉर्टलिस्ट कर AICC को भेजा जाएगा। अंतिम फैसला कांग्रेस नेतृत्व को करना था।

जिस प्रक्रिया में कार्यकर्ताओं की राय ली गई, उसमें सेलवाल भी सक्रिय रहे

संगठन सृजन अभियान के तहत उकलाना विधानसभा क्षेत्र में हुई बैठक की अगुवाई नरेश सेलवाल ने की थी। इस बैठक में AICC पर्यवेक्षक जगदीश चंद्र जांगिड़ मौजूद रहे। यहां जिलाध्यक्ष पद को लेकर संगठन की नई व्यवस्था और जिम्मेदारियों पर चर्चा हुई थी।

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जांगिड़ ने उस समय स्पष्ट किया था कि नया जिलाध्यक्ष केवल संगठनात्मक पदाधिकारी नहीं होगा, बल्कि उसकी भूमिका चुनावी राजनीति में भी अहम रहेगी। जिलाध्यक्ष को विधानसभा चुनाव के संभावित टिकट दावेदारों को लेकर फीडबैक देने की जिम्मेदारी भी दी जानी थी।

यही पुराना घटनाक्रम अब नरेश सेलवाल के नाम को लेकर चल रही मौजूदा चर्चा को एक अतिरिक्त राजनीतिक संदर्भ देता है। हालांकि, यह अपने आप में इस बात की पुष्टि नहीं करता कि हाईकमान ने सेलवाल को जिलाध्यक्ष बनाने का फैसला कर लिया है।

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सेलवाल के नाम के पीछे सिर्फ विधायक होना वजह नहीं

नरेश सेलवाल का राजनीतिक सफर दो विधानसभा चुनावी जीत तक पहुंचता है। वह 2009 में उकलाना से कांग्रेस विधायक चुने गए थे। 2024 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने दोबारा जीत दर्ज की और वर्तमान में उकलाना के विधायक हैं।

विधायक बनने के बाद भी हिसार की जिला राजनीति में उनकी सक्रियता दिखाई देती रही है। नवंबर 2025 में हिसार कांग्रेस के एक प्रदर्शन में भी सेलवाल आदमपुर विधायक चंद्र प्रकाश और नारनौंद विधायक जस्सी पेटवाड़ के साथ मौजूद थे। उस कार्यक्रम का नेतृत्व तत्कालीन जिला शहरी प्रधान बजरंग गर्ग ने किया था।

इससे यह संकेत जरूर मिलता है कि सेलवाल की राजनीतिक गतिविधियां केवल उकलाना विधानसभा क्षेत्र तक सीमित नहीं रही हैं। लेकिन जिला अध्यक्ष पद के लिए उनका नाम अंतिम रूप से तय हो चुका है, ऐसा कहने के लिए अभी आधिकारिक पुष्टि जरूरी है।

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हिसार संगठन में पहले से मौजूद हैं कई राजनीतिक परतें

हिसार कांग्रेस की राजनीति में संगठनात्मक पद हमेशा सिर्फ संगठन तक सीमित नहीं रहे। जिला स्तर पर अलग-अलग नेताओं की सक्रियता और उनके राजनीतिक प्रभाव का असर पार्टी के फैसलों पर दिखाई देता रहा है।

इसी वजह से जिलाध्यक्ष का चयन होने पर उसका असर बूथ और मंडल स्तर के संगठन से लेकर विधानसभा क्षेत्रों के राजनीतिक समीकरण तक पड़ सकता है। कांग्रेस के सामने ऐसा चेहरा चुनने की चुनौती है जो एक तरफ कार्यकर्ताओं को साथ लेकर चले और दूसरी तरफ जिले के अलग-अलग राजनीतिक समूहों के बीच संतुलन बनाए रखे।

संगठन सृजन अभियान की मूल प्रक्रिया में भी पार्टी ने कार्यकर्ताओं की राय को महत्व देने की बात कही थी। पर्यवेक्षकों को अलग-अलग विधानसभा क्षेत्रों में जाकर फीडबैक लेने की जिम्मेदारी दी गई थी। हिसार में यह प्रक्रिया चार सदस्यीय पर्यवेक्षक टीम के माध्यम से आगे बढ़ाई गई थी।

नरेश सेलवाल को जिम्मेदारी मिली तो क्या बदलेगा?

अगर कांग्रेस हाईकमान नरेश सेलवाल को हिसार जिला संगठन की कमान सौंपता है तो यह इसलिए महत्वपूर्ण होगा क्योंकि वह मौजूदा विधायक हैं। इससे जिला संगठन का नेतृत्व सीधे विधानसभा स्तर के निर्वाचित प्रतिनिधि के हाथ में आ जाएगा।

इसका एक संभावित फायदा यह हो सकता है कि विधायक के रूप में उनके राजनीतिक संपर्क और संगठनात्मक जिम्मेदारी के बीच बेहतर तालमेल बने। दूसरी तरफ, उनके सामने जिले के अलग-अलग विधानसभा क्षेत्रों के नेताओं और कार्यकर्ताओं के बीच संतुलन कायम रखने की चुनौती भी होगी।

यही वजह है कि सेलवाल के नाम की चर्चा को केवल एक पद के संभावित बदलाव के तौर पर नहीं देखा जा रहा। फैसला होने की स्थिति में यह हिसार कांग्रेस के भीतर नेतृत्व के अगले समीकरण का संकेत भी दे सकता है।

लेकिन अभी फैसला हुआ नहीं है

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि नरेश सेलवाल को हिसार जिला कांग्रेस अध्यक्ष बनाए जाने की आधिकारिक घोषणा अभी नहीं हुई है। इसलिए उनके नाम को फिलहाल संभावित दावेदारी या राजनीतिक चर्चा के तौर पर ही देखा जाना चाहिए।

संगठन सृजन अभियान के दौरान AICC ने जिलाध्यक्ष चयन के लिए फीडबैक आधारित प्रक्रिया अपनाने की बात कही थी। ऐसे में अंतिम निर्णय से पहले पार्टी नेतृत्व के पास संगठनात्मक रिपोर्ट, कार्यकर्ताओं का फीडबैक और स्थानीय राजनीतिक समीकरण जैसे कई आधार होंगे।

फिलहाल हिसार कांग्रेस में सबसे बड़ा सवाल यही है कि पार्टी संगठन को आगे बढ़ाने के लिए किस चेहरे पर भरोसा करती है। नरेश सेलवाल का नाम चर्चा में जरूर आया है, लेकिन अंतिम तस्वीर कांग्रेस हाईकमान के फैसले के बाद ही साफ होगी।

अगर सेलवाल को जिम्मेदारी मिलती है तो उकलाना के विधायक से हिसार जिला संगठन के प्रमुख तक उनका राजनीतिक दायरा बढ़ेगा। वहीं किसी दूसरे नेता को चुने जाने की स्थिति में कांग्रेस यह संदेश दे सकती है कि वह जिला संगठन के लिए अलग संगठनात्मक नेतृत्व को प्राथमिकता दे रही है।

Vipin Zaildar

विपिन जैलदार 'विराट भारत न्यूज़' के मुख्य विशेष संवाददाता हैं। वे खोजी पत्रकारिता (Investigative Journalism), अपराध जगत (Crime Reporting), SOG एवं STF की विशेष कार्रवाइयों और हरियाणा व राजस्थान के क्षेत्रीय एवं जमीनी मुद्दों को गहराई से कवर करने में माहिर हैं। वे अपनी निडर और निष्पक्ष रिपोर्टिंग के लिए जाने जाते हैं।

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