शुक्रवार, 7 अगस्त 2026

कलयुग की कड़वी हकीकत: जिस पिता ने पढ़ाया-लिखाया उसी के अंतिम संस्कार में नहीं आईं बेटियां, ऑनलाइन पैसे भेजकर कहा- गंगा में बहा देना अस्थियां

Written by: Vipin Zaildar

Published:

हरियाणा के सोनीपत से रिश्तों को तार-तार करने वाली एक बेहद भावुक घटना सामने आई है। महाराष्ट्र के रहने वाले बुजुर्ग कपड़ा व्यापारी शिवचरण रतन गुप्ता का वृद्धाश्रम में निधन हो गया, लेकिन उनकी तीन बेटियों में से कोई भी अंतिम संस्कार में शामिल होने नहीं पहुंची। बेटियों ने वीडियो कॉल के जरिए अंतिम दर्शन किए और ऑनलाइन पैसे ट्रांसफर कर दिए। पूरी रिपोर्ट पढ़ें।


कलयुग की कड़वी हकीकत: जिस पिता ने पढ़ाया-लिखाया उसी के अंतिम संस्कार में नहीं आईं बेटियां, ऑनलाइन पैसे भेजकर कहा- गंगा में बहा देना अस्थियां
कलयुग की कड़वी हकीकत: जिस पिता ने पढ़ाया-लिखाया उसी के अंतिम संस्कार में नहीं आईं बेटियां, ऑनलाइन पैसे भेजकर कहा- गंगा में बहा देना अस्थियां
Google News Google पर हमें चुनें

सोनीपत/हरियाणा: कहते हैं कि बेटियां पिता के सबसे करीब होती हैं और माता-पिता अपनी संतानों के सुनहरे भविष्य के लिए अपनी पूरी जिंदगी दांव पर लगा देते हैं। लेकिन हरियाणा के सोनीपत से एक ऐसी दुखद और संवेदनशील घटना सामने आई है जिसने खून के रिश्तों और मानवीय संवेदनाओं पर गहरे सवाल खड़े कर दिए हैं। एक पिता जिसने अपनी बेटियों को पाल-पोसकर बड़ा किया, उन्हें अच्छी शिक्षा दी और समाज में आत्मनिर्भर बनाया, उसे अपनी अंतिम विदाई के समय अपनों का एक कंधा तक नसीब नहीं हुआ।

यह पूरा मामला महाराष्ट्र के रहने वाले एक रईस कपड़ा व्यापारी शिवचरण रतन गुप्ता से जुड़ा हुआ है। शिवचरण जी अपने जीवन के आखिरी पड़ाव में अपनों से दूर हरियाणा के सोनीपत में स्थित एक वृद्धाश्रम में रह रहे थे। लंबी उम्र और स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतों के चलते हाल ही में वृद्धाश्रम में ही उनका निधन हो गया। जब इस बात की सूचना उनकी तीनों बेटियों को दी गई तो उम्मीद थी कि वे अपने पिता के अंतिम दर्शन के लिए तुरंत पहुंचेंगी लेकिन वहां जो कुछ भी हुआ उसने वृद्धाश्रम के कर्मचारियों से लेकर हर सुनने वाले की रूह को कंपा दिया।

वीडियो कॉल पर विदाई और ऑनलाइन ट्रांसफर

निधन की खबर मिलने के बाद भी तीनों बेटियों में से कोई भी सोनीपत पहुंचने को तैयार नहीं हुई। उन्होंने अपनी कुछ मजबूरियों का हवाला देते हुए अंतिम संस्कार में शामिल होने से इनकार कर दिया। इसके बजाय, बेटियों ने वृद्धाश्रम के संचालकों से अनुरोध किया कि वे उन्हें वीडियो कॉल के जरिए ही पिता के अंतिम दर्शन करवा दें। इतना ही नहीं, पिता के अंतिम संस्कार के खर्च और क्रिया-कर्म के लिए बेटियों ने ऑनलाइन पैसे ट्रांसफर कर दिए।

शव को मुखाग्नि देने से लेकर श्मशान घाट की तमाम रस्मों को वृद्धाश्रम के कर्मचारियों और वहां रहने वाले अन्य लोगों ने मिलकर पूरा किया। बेटियों ने फोन की स्क्रीन पर ही अपने पिता की अंतिम यात्रा देखी। रिश्तों की बेरुखी यहीं खत्म नहीं हुई; बेटियों ने बाद में वृद्धाश्रम के प्रबंधन से यह भी कह दिया कि उनके पिता की अस्थियों को भी वे खुद ही गंगा में प्रवाहित कर दें क्योंकि उनका आ पाना संभव नहीं है।

देशभर में छिड़ी एक गंभीर बहस

वृद्धाश्रम के संचालक ने जब इस पूरी घटना का विवरण साझा किया तो यह मामला सोशल मीडिया और समाज में बहुत तेजी से वायरल हो गया। इस घटना ने एक बार फिर बुजुर्गों की सुरक्षा, उनके अकेलेपन और आधुनिक होते समाज में खोती जा रही पारिवारिक कद्रों को लेकर एक नई बहस को जन्म दे दिया है। लोग सोशल मीडिया पर पूछ रहे हैं कि क्या आज की भागदौड़ भरी जिंदगी और करियर की होड़ इतनी बड़ी हो गई है कि माता-पिता को उनके आखिरी सफर में दो मिनट का समय भी नहीं दिया जा सकता?

सोनीपत की यह घटना केवल एक बुजुर्ग की मौत की कहानी नहीं है बल्कि यह बदलते पारिवारिक ढांचे और खोखले होते जा रहे रिश्तों का एक ऐसा आईना है, जिसे देखकर हर संवेदनशील इंसान का दिल बैठ जाता है।

Vipin Zaildar
लेखक के बारे में Vipin Zaildar

विपिन जैलदार 'विराट भारत न्यूज़' के मुख्य विशेष संवाददाता हैं। वे खोजी पत्रकारिता (Investigative Journalism), अपराध जगत (Crime Reporting), SOG एवं STF की विशेष कार्रवाइयों और हरियाणा व राजस्थान के क्षेत्रीय एवं जमीनी मुद्दों को गहराई से कवर करने में माहिर हैं। वे अपनी निडर और निष्पक्ष रिपोर्टिंग के लिए जाने जाते हैं। View all posts by Vipin Zaildar →

Join Us