नई दिल्ली: अपराध की दुनिया का एक दस्तूर है कि गुनाह की उम्र चाहे कितनी भी लंबी क्यों न हो, कानून के हाथ एक न एक दिन मुजरिम के गिरेबान तक पहुंच ही जाते हैं। ऐसा ही एक सनसनीखेज मामला दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने उजागर किया है, जिसने करीब 28 साल से पुलिस की आंखों में धूल झोंक रहे एक शातिर और घोषित अपराधी को गिरफ्तार करने में सफलता हासिल की है। यह कहानी किसी बॉलीवुड क्राइम थ्रिलर फिल्म की स्क्रिप्ट जैसी लगती है, जहां एक हत्यारा पैंतरे बदल-बदल कर समाज के बीच अपनी नई पहचान बना लेता है और लोग उसे एक सीधे-साधे डॉक्टर के रूप में जानने लगते हैं।
पकड़े गए इस शातिर अपराधी की पहचान राजिंदर बैरागी उर्फ राजिंदर सिंह यादव के रूप में हुई है, जिसे लोग “डॉ. झटका” के नाम से भी जानते थे। दिल्ली, हरियाणा और उत्तर प्रदेश में आतंक का पर्याय रहा राजिंदर हत्या, हत्या के प्रयास, दंगा और आर्म्स एक्ट जैसे आठ गंभीर मामलों में वांछित था। साल 1999 में पुलिस हिरासत से हथकड़ी समेत भागने के बाद से वह लगातार फरार चल रहा था। दिल्ली पुलिस ने जब साल 1997 के जनकपुरी थाने के दो पुराने मामलों की फाइलें दोबारा खोलीं, तब इस बड़े नेटवर्क का सुराग हाथ लगा।
शादी के जश्न में चलाई थीं गोलियां
इस खौफनाक दास्तान की शुरुआत 10 मई 1998 को हुई थी, जब हरियाणा के सोनीपत जिले के सैयां खेड़ा गांव में एक शादी समारोह चल रहा था। डीजे की धुन और खुशियों के माहौल के बीच राजिंदर का वहां मौजूद कुछ लोगों से विवाद हो गया। उस वक्त तो मामला शांत हो गया, लेकिन राजिंदर इस खुन्नस को भुला नहीं पाया। वह कुछ ही देर में अपने साथियों के साथ अवैध हथियारों से लैस होकर वापस लौटा और अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी। इस खूनी खेल में वहां मौजूद हरियाणा पुलिस के एक जवान जय भगवान की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि एक अन्य व्यक्ति गंभीर रूप से घायल हो गया। इस वारदात के बाद सोनीपत पुलिस ने राजिंदर के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कर उसे जेल भेज दिया था।
हथकड़ी के साथ गन्नौर रेलवे स्टेशन से हुआ था नौ दो ग्यारह
जेल जाने के बाद भी राजिंदर को सलाखों के पीछे रहना मंजूर नहीं था। 14 फरवरी 1999 को जब पुलिस टीम उसे गाजियाबाद जेल से पेशी के लिए सोनीपत कोर्ट ले जा रही थी, तब उसने एक दुस्साहसिक योजना को अंजाम दिया। ट्रेन जैसे ही गन्नौर रेलवे स्टेशन के पास पहुंची, राजिंदर पुलिसकर्मियों को चकमा देकर चलती ट्रेन से हथकड़ी समेत कूदकर फरार हो गया। पुलिस के आला अधिकारी हाथ मलते रह गए और इसके बाद पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया।
पीटी टीचर से लेकर फर्जी डॉक्टर बनने तक का सफर
फरार होने के बाद राजिंदर ने अपनी पुरानी जिंदगी को हमेशा के लिए दफन कर दिया और देश के अलग-अलग राज्यों में छिपता फिरा। वह सबसे पहले महाराष्ट्र पहुंचा, जहां उसने अपनी पहचान छिपाकर एक केंद्रीय विद्यालय में शारीरिक शिक्षा शिक्षक (पीटी टीचर) के रूप में नौकरी हासिल कर ली। कुछ समय वहां बिताने के बाद वह मध्य प्रदेश के अशोकनगर जिले के मुंगावली में जाकर बस गया। यहां उसने अपना नाम बदलकर राजेंद्र सिंह यादव रख लिया और स्थानीय स्तर पर बिना किसी मेडिकल डिग्री के लोगों का इलाज करना शुरू कर दिया, जिसके बाद उसका नाम ‘डॉ. झटका’ पड़ गया।
इतना ही नहीं, उसने मध्य प्रदेश में अपने नए नाम से आधार कार्ड, पैन कार्ड, वोटर आईडी और ड्राइविंग लाइसेंस जैसे सभी सरकारी दस्तावेज भी तैयार करवा लिए। साल 2003 में उसने वहां शादी कर ली और वर्तमान में उसके दो बच्चे भी हैं। वह इलाके में प्रॉपर्टी डीलिंग और ठेकेदारी के धंधे में भी पैर पसार चुका था, जिससे समाज में उसकी अच्छी साख बन गई थी और किसी को कानों-कान खबर नहीं थी कि मरीजों का इलाज करने वाला यह शख्स असल में एक पुलिसकर्मी का हत्यारा है।
क्राइम ब्रांच के जाल में ऐसे फंसा मुजरिम
दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने इस पुराने केस को सुलझाने के लिए अपने मुखबिर तंत्र और आधुनिक सर्विलांस तकनीक का एक साथ इस्तेमाल किया। पुलिस टीम को जब पुख्ता इनपुट मिला कि गाजियाबाद और सोनीपत का वांछित अपराधी मध्य प्रदेश के मुंगावली में नाम बदलकर रह रहा है, तो एक विशेष टीम का गठन किया गया। पुलिस की टीम ने बिना कोई मौका गंवाए मुंगावली में छापेमारी की और ‘डॉ. झटका’ को उसके क्लिनिक के पास से धर दबोचा। जब पुलिस ने उसकी उंगलियों के निशान और पुराने रिकॉर्ड का मिलान किया, तो उसकी 28 साल पुरानी हकीकत सामने आ गई। फिलहाल दिल्ली और हरियाणा पुलिस मिलकर उससे आगे की पूछताछ कर रही है ताकि उसके अन्य सहयोगियों के बारे में भी पता लगाया जा सके।




