विशेष रिपोर्ट (न्यूज़रूम डेस्क): जिन हाथों पर गरीबों के आशियाने की मरम्मत की जिम्मेदारी थी, उन्हीं हाथों ने सरकारी खजाने से करोड़ों रुपये डकारने का ताना-बाना बुन डाला। हरियाणा के अंबाला से सामने आई भ्रष्टाचार की एक सनसनीखेज दास्तान ने पूरी राज्य मशीनरी को हिलाकर रख दिया है। अनुसूचित जाति (SC) और गरीबी रेखा से नीचे (BPL) जीवन यापन करने वाले परिवारों की टूटी छतों को सुधारने के लिए आई ₹31.40 करोड़ की राशि में बड़े पैमाने पर हेराफेरी का खुलासा हुआ है।
राज्य के एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने मामले की तह तक जाते हुए भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम और IPC की गंभीर धाराओं में 16 लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की है। इस कार्रवाई में सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि आरोपी सूची में केवल बिचौलिए ही नहीं, बल्कि अंबाला के पूर्व और वर्तमान जिला कल्याण अधिकारी (DWO), दो पूर्व तहसील कल्याण अधिकारी और कल्याण विभाग का एक डिप्टी सुपरिटेंडेंट भी नामजद हैं।
जांच में खुली परतें: 59 में से सिर्फ 4 मिले हकदार
ACB की जांच टीमों ने जब योजनाओं के कागजात खंगालना शुरू किया, तो अफसरों और दलालों की साठगांठ का डरावना चेहरा सामने आया।
प्राथमिक जांच के दौरान जब ब्यूरो ने 59 रैंडम आवेदनों का ग्राउंड वेरिफिकेशन किया, तो उनमें से सिर्फ 4 आवेदन ही नियमों पर खरे उतरे। बाकी 55 लाभार्थी पूरी तरह से अपात्र पाए गए, जिन्हें सांठगांठ करके सरकारी फंड जारी किया गया था।
यह घोटाला साल 2018-19 से लेकर 2021-22 के बीच ‘डॉ. बी.आर. आंबेडकर आवास नवीनीकरण योजना’ के तहत अंजाम दिया गया। इस योजना का मकसद आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को मकान की मरम्मत के लिए मदद देना था। लेकिन हकीकत में, अधिकारियों ने दलालों के साथ मिलकर एक ऐसा सिंडिकेट बनाया जो योजना की गाइडलाइंस की धज्जियां उड़ाता रहा।
दलाली का ’50-50′ फॉर्मूला और एक ही घर में कई बार बांट दी ग्रांट
जांच रिपोर्ट के मुताबिक, इस पूरे खेल का ढांचा बेहद शातिराना था:
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आधा-आधा कट: बिचौलिए फर्जी या अपात्र लोगों के दस्तावेज तैयार करवाकर आवेदन मंजूर करवाते थे। जैसे ही ₹50,000 से ₹80,000 की ग्रांट लाभार्थी के खाते में आती, उसका लगभग 50% हिस्सा कमीशन के रूप में वसूल कर लिया जाता था।
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एक ही छत पर बार-बार मेहरबानी: नियम-कायदों को ताक पर रखकर एक ही घर में रहने वाले परिवार के 2 से 3 सदस्यों के नाम पर अलग-अलग ग्रांट पास की गई।
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दोगुना फायदा: कम से कम 6 लाभार्थियों को तो महज एक ही साल के भीतर दो बार सरकारी मदद जारी कर दी गई।
आंकड़ों के अनुसार, इस समयावधि में कुल 3,922 लाभार्थियों को ₹17 करोड़ से अधिक की राशि बांटी गई थी, जिसमें से बड़ा हिस्सा अपात्रों के खातों में जमा कराकर वापस ऐंठ लिया गया।
सिस्टम में गहराई तक धंसा दलाली का जाल
ACB निरीक्षक राजेश कुमार की शिकायत पर दर्ज हुई FIR से यह साफ होता है कि यह कोई अनजाने में हुई चूक नहीं, बल्कि सोची-समझी साजिश थी। कल्याण विभाग के दफ्तरों में सीधे आम आदमी की फाइलें आगे नहीं बढ़ती थीं, बल्कि एजेंटों का एक पूरा नेटवर्क सरकारी कुर्सियों पर बैठे अफसरों के साथ तालमेल बिठाकर फर्जीवाड़े की फाइलें क्लियर कराता था।
फिलहाल ACB ने अंबाला के संबंधित अधिकारियों, 9 बिचौलियों और 2 अपात्र लाभार्थियों के खिलाफ मामला दर्ज कर आगे की छापेमारी और कड़ाई से पूछताछ शुरू कर दी है। इस खुलासे के बाद राज्य के अन्य जिलों में भी इसी तरह की कल्याणकारी योजनाओं के ऑडिट की मांग उठने लगी है।



