सेवानिवृत्त सरकारी कर्मचारियों ने एक बार फिर पुरानी पेंशन योजना की बहाली की माँग तेज़ कर दी है। अखिल भारतीय राज्य सरकारी पेंशनर्स फेडरेशन ने 8वें केंद्रीय वेतन आयोग के अध्यक्ष को 10 सूत्री माँगों का ज्ञापन सौंपा है। इसमें सबसे ऊपर पुरानी पेंशन योजना यानी OPS को दोबारा लागू करने की माँग रखी गई है। फेडरेशन के महासचिव वजीर सिंह ने कहा कि पेंशन ही सेवानिवृत्त कर्मचारी के सम्मानजनक जीवन का आधार है। उन्होंने आयोग से इन माँगों को अपनी अंतिम सिफ़ारिशों में शामिल करने का आग्रह किया।
पुरानी पेंशन योजना में कर्मचारी को उसके आख़िरी वेतन के आधार पर तय और गारंटीड पेंशन मिलती है। नई पेंशन योजना बाज़ार से जुड़ी है, जिसमें पेंशन की रकम तय नहीं होती। यही वजह है कि सालों से कर्मचारी संगठन पुरानी योजना की वापसी माँग रहे हैं।
ज्ञापन की बड़ी माँगें
फेडरेशन ने 100 फीसदी पेंशन समानता लागू करने की माँग की है। साथ ही वेतनमान संशोधित होने पर पेंशन का अपने आप पुनरीक्षण भी माँगा गया है।
रिटायर कर्मचारी संघ हरियाणा के सलाहकार सुभाष लांबा ने कहा कि महंगाई भत्ता 50 फीसदी होते ही उसे मूल पेंशन में मिला दिया जाए। न्यूनतम पेंशन को नए वेतन आयोग के न्यूनतम वेतन का कम से कम आधा किए जाने की माँग भी उठी।
इलाज और बुज़ुर्ग पेंशनरों पर भी ज़ोर
फेडरेशन ने कम्यूटेशन राशि की बहाली की अवधि 15 साल से घटाकर 12 साल करने का सुझाव दिया है। राज्य सरकारों के पेंशनरों को भी केंद्र के बराबर महंगाई भत्ता देने की माँग रखी गई। इसके अलावा CGHS और कैशलेस इलाज की सुविधा बढ़ाने, चिकित्सा भत्ता बढ़ाने और पारिवारिक पेंशन सुधारने की बात कही गई।
बुज़ुर्ग पेंशनरों के लिए एक ख़ास सुझाव भी दिया गया। इसमें 65 साल की उम्र से अतिरिक्त पेंशन शुरू कर, 95 साल तक इसे धीरे-धीरे बढ़ाकर 100 फीसदी तक करने की माँग है।
इसके साथ ही भेदभाव वाले प्रावधान हटाने और एक वैधानिक राष्ट्रीय वरिष्ठ नागरिक आयोग बनाने की माँग भी ज्ञापन में शामिल है।




