काम की खबरेंहरियाणा
Haryana School Snake Advisory: हरियाणा के स्कूलों में सांप दिखने पर स्टाफ नहीं दिखाएगा बहादुरी, शिक्षा विभाग ने जारी की सख्त गाइडलाइन
हरियाणा शिक्षा विभाग ने मानसून और बारिश के बाद स्कूलों में सांपों के निकलने की घटनाओं को देखते हुए पहली बार एक विस्तृत सुरक्षा एडवाइजरी जारी की है। अब स्कूल परिसर में सांप दिखने या सर्पदंश की स्थिति में शिक्षकों और कर्मचारियों को खुद रेस्क्यू करने के बजाय विशेषज्ञों की मदद लेनी होगी। जानिए विभाग द्वारा जारी 20 बिंदुओं की सर्प-सुरक्षा चेकलिस्ट और जरूरी नियम।
चंडीगढ़: मानसून और हालिया भारी बारिश के बाद हरियाणा के सरकारी और निजी स्कूलों में सांप निकलने की बढ़ती आशंकाओं को देखते हुए शिक्षा विभाग ने एक बड़ा और अभूतपूर्व फैसला लिया है। विभाग ने इस गंभीर विषय को केवल एक सामान्य सफाई अभियान या रूटीन का मामला न मानकर, इसे अब सीधे स्कूल सुरक्षा व्यवस्था (School Safety Protocol) का एक अनिवार्य हिस्सा बना दिया है। प्रदेश के सभी सरकारी और निजी स्कूलों के लिए एक व्यापक सुरक्षा एडवाइजरी जारी की गई है, जिसमें स्पष्ट किया गया है कि यदि स्कूल परिसर में कोई सांप दिखाई देता है, तो स्कूल का स्टाफ या शिक्षक किसी भी प्रकार की बहादुरी दिखाने या खुद रेस्क्यू करने का प्रयास बिल्कुल नहीं करेंगे। ऐसी स्थिति में तुरंत प्रशिक्षित वन्यजीव विशेषज्ञों या वन विभाग के अधिकृत सर्प-राहतकर्ताओं (Snake Rescuers) को बुलाना अनिवार्य कर दिया गया है।
इस एडवाइजरी का मुख्य उद्देश्य स्कूलों में पढ़ने वाले मासूम बच्चों और शैक्षणिक स्टाफ को जहरीले जीवों के खतरे से सुरक्षित रखना है। शिक्षा विभाग ने इस प्रक्रिया को पूरी तरह से सुव्यवस्थित और जवाबदेह बनाने के लिए 20 महत्वपूर्ण बिंदुओं की एक ‘सर्प-सुरक्षा चेकलिस्ट’ भी तैयार की है, जिसके आधार पर अब स्कूलों को अपने परिसरों का नियमित रूप से बारीकी से निरीक्षण करना होगा। इसके अलावा, यदि स्कूल में सांप से संबंधित कोई अप्रिय घटना या सर्पदंश का मामला सामने आता है, तो उसकी पूरी जानकारी एक निर्धारित ‘घटना प्रतिवेदन प्रपत्र’ (Incident Reporting Form) में दर्ज करना आवश्यक कर दिया गया है।
सांप दिखने पर बच्चों को तुरंत हटाने और फोटो-वीडियो पर रोक के निर्देश
शिक्षा विभाग द्वारा जारी की गई इस नई गाइडलाइन में सुरक्षा को लेकर बेहद कड़े और व्यावहारिक निर्देश दिए गए हैं। एडवाइजरी में साफ कहा गया है कि यदि स्कूल के किसी भी हिस्से में सांप नजर आता है, तो सबसे पहला काम विद्यार्थियों को उस प्रभावित क्षेत्र से तुरंत दूर सुरक्षित स्थान पर ले जाने का होगा। विभाग ने इस बात पर विशेष बल दिया है कि कोई भी छात्र, शिक्षक या गैर-शिक्षण कर्मचारी सांप को घेरने, उसे उकसाने, छेड़ने या लाठी-डंडों से मारने की कोशिश कतई नहीं करेगा। अकसर देखा जाता है कि सांप निकलने पर लोग उत्सुकतावश भीड़ जमा कर लेते हैं और अपने मोबाइल फोन से फोटो खींचने या वीडियो बनाने लगते हैं। विभाग ने इस तरह की गतिविधियों पर पूरी तरह से रोक लगा दी है ताकि सांप उत्तेजित होकर किसी पर हमला न कर दे। जरूरत पड़ने पर केवल अधिकृत विशेषज्ञों की ही मदद ली जाएगी।
झाड़ियां, पुराना कबाड़ और दरारें बनेंगी पहली जांच का मुख्य हिस्सा
स्कूलों में सांपों के छिपने और उनके पनपने वाले संभावित ठिकानों को नष्ट करने के लिए व्यापक दिशा-निर्देश दिए गए हैं। अब स्कूलों में कक्षाओं, शौचालयों, मिड-डे मील की रसोई, स्टोर रूम और खेल के मैदानों के आसपास उगी हुई लंबी घास और जंगली झाड़ियों को नियमित रूप से काटना अनिवार्य होगा। परिसर में लंबे समय से जमा करके रखे गए ईंट-पत्थर, पुरानी लकड़ियां, बेकार पड़ा हुआ फर्नीचर और पुराने टायरों के ढेरों को तुरंत हटाने के आदेश दिए गए हैं, क्योंकि ये स्थान सांपों के छिपने के लिए सबसे अनुकूल माने जाते हैं। इसके अतिरिक्त, स्कूल की मुख्य इमारतों के दरवाजों के नीचे मौजूद खाली गैप, फर्श और दीवारों में आई दरारों के साथ-साथ पानी की निकासी वाली नालियों को भी सघन जांच के दायरे में रखा गया है। जहां भी सुरक्षा को लेकर खतरा महसूस होगा, वहां तुरंत लोहे की जाली या सुरक्षा ग्रिल लगानी होगी।
लंबे समय से बंद पड़े कमरों को खोलने के लिए विशेष सावधानी
अकसर देखा जाता है कि स्कूलों में कुछ स्टोर रूम, पुराने शौचालय या कम उपयोग में आने वाले कमरे लंबे समय तक बंद रहते हैं। नई एडवाइजरी के मुताबिक, ऐसे किसी भी बंद पड़े संवेदनशील स्थान को सीधे या बिना सोचे-समझे खोलने पर पूरी तरह पाबंदी रहेगी। किसी भी बंद कमरे को खोलने से पहले टॉर्च या पर्याप्त रोशनी की व्यवस्था के साथ उसकी अच्छी तरह से पड़ताल करनी होगी कि कहीं अंदर कोई जहरीला जीव तो आश्रय नहीं ले रहा है। विभाग ने यह भी निर्देश दिया है कि स्कूल के सभी संवेदनशील और अंधेरे वाले कोनों में रोशनी की पर्याप्त व्यवस्था हर समय सुनिश्चित की जाए।
सांपों को भगाने के लिए तेजाब, मिट्टी का तेल और केमिकल डालने पर पाबंदी
आमतौर पर लोग सांपों को दूर रखने या भगाने के लिए तेजाब, फिनैल, कीटनाशक, मिट्टी का तेल या नैफ्थलीन (कपूर) की गोलियों का अंधाधुंध इस्तेमाल करते हैं। शिक्षा विभाग ने अपने आदेशों में इन खतरनाक और जहरीले रसायनों के उपयोग पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया है। विभाग का तर्क है कि इस तरह के अत्यधिक जहरीले केमिकल का इस्तेमाल न केवल पर्यावरण और वन्यजीवों के लिए नुकसानदेह है, बल्कि स्कूल परिसर में मौजूद छोटे बच्चों के स्वास्थ्य के लिए भी बेहद घातक साबित हो सकता है। इसलिए, स्कूलों को केवल प्राकृतिक और सुरक्षित तरीकों को ही अपनाने की सलाह दी गई है।
सर्पदंश की स्थिति में झाड़-फूंक सख्त मना, सीधे अस्पताल ले जाने का आदेश
यदि तमाम सावधानियों के बावजूद किसी दुर्भाग्यपूर्ण परिस्थिति में किसी छात्र या स्कूल कर्मचारी को सांप काट लेता है, तो उसके उपचार को लेकर भी विभाग ने सख्त रुख अपनाया है। एडवाइजरी में कड़े निर्देश दिए गए हैं कि सर्पदंश की स्थिति में किसी भी तरह के अंधविश्वास, झाड़-फूंक या घरेलू नुस्खों में समय बिल्कुल भी बर्बाद नहीं किया जाएगा। पीड़ित को बिना कोई पल गंवाए सीधे नजदीकी सरकारी अस्पताल या प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) पहुंचाया जाए, जहां एंटी-स्नेक वेनम (Anti-Snake Venom) उपलब्ध हो। इसके अलावा, पुराने ढर्रे के प्राथमिक उपचार जैसे—घाव वाले स्थान पर ब्लेड से चीरा लगाना, जहर को मुंह से चूसकर बाहर निकालने की कोशिश करना या प्रभावित अंग को रस्सी से अत्यधिक कसकर बांधना जैसी गलतियों से पूरी तरह बचने को कहा गया है, क्योंकि ये तरीके मरीज की जान के लिए और अधिक जोखिम पैदा कर सकते हैं।
स्कूलों में प्रमुखता से प्रदर्शित करने होंगे आपातकालीन नंबर
प्रशासनिक स्तर पर इस व्यवस्था को चुस्त-दुरुस्त बनाए रखने के लिए सभी स्कूलों को अपने मुख्य नोटिस बोर्ड या प्रवेश द्वार जैसे प्रमुख स्थानों पर नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र, सरकारी एंबुलेंस सेवा (108) और स्थानीय वन विभाग के आपातकालीन नंबर अनिवार्य रूप से बड़े अक्षरों में प्रदर्शित करने होंगे। शिक्षा विभाग ने सभी जिला शिक्षा अधिकारियों (DEOs) और खंड शिक्षा अधिकारियों (BEOs) को विशेष जिम्मेदारी सौंपी है कि वे अपने-अपने कार्यक्षेत्र के अंतर्गत आने वाले सभी सरकारी और निजी स्कूलों में जाकर इन सुरक्षा नियमों और 20 बिंदुओं वाली सर्प-सुरक्षा चेकलिस्ट के जमीनी पालन का कड़ाई से निरीक्षण सुनिश्चित करें। लापरवाही बरतने वाले स्कूलों के खिलाफ प्रशासनिक कार्रवाई भी की जा सकती है।



