शनिवार, 31 अक्टूबर 2026

मॉनसून में क्यों बढ़ जाते हैं सांप काटने के मामले? जानें कारण, बचाव के तरीके और सांपों से जुड़े अनोखे तथ्य

Written by: Priyanshi Rao

Published:

बारिश का मौसम शुरू होते ही एक और चीज तेजी से बढ़ने लगती है वो है सांप काटने की घटनाएं। हर साल मॉनसून के दौरान अस्पतालों में स्नेक बाइट के मामले अचानक…


मॉनसून में क्यों बढ़ जाते हैं सांप काटने के मामले? जानें कारण, बचाव के तरीके और सांपों से जुड़े अनोखे तथ्य
मॉनसून में क्यों बढ़ जाते हैं सांप काटने के मामले? जानें कारण, बचाव के तरीके और सांपों से जुड़े अनोखे तथ्य
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बारिश का मौसम शुरू होते ही एक और चीज तेजी से बढ़ने लगती है वो है सांप काटने की घटनाएं। हर साल मॉनसून के दौरान अस्पतालों में स्नेक बाइट के मामले अचानक बढ़ जाते हैं और गांव-कस्बों से लेकर शहरों तक सांप निकलने की खबरें आम हो जाती हैं। आखिर बारिश के मौसम में ही सांप इतनी बड़ी संख्या में घरों और खेतों की तरफ क्यों आ जाते हैं? जानिए इसके पीछे की असली वजह, बचाव के तरीके और सांपों से जुड़े कुछ ऐसे तथ्य जो शायद आपने पहले कभी नहीं सुने होंगे।

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मॉनसून में सांप घरों की तरफ क्यों आते हैं

सांप जमीन के अंदर बिल बनाकर रहते हैं। तेज बारिश होने पर उनके बिलों में पानी भर जाता है, जिससे उन्हें सुरक्षित और सूखी जगह की तलाश करनी पड़ती है। यही वजह है कि वे घरों की दीवारों, सीढ़ियों, बाथरूम और स्टोररूम जैसी सूखी और बंद जगहों में शरण लेने लगते हैं।

इसके अलावा बारिश के दौरान चूहे अपने बिलों से बाहर निकल आते हैं, मेंढक ज्यादा सक्रिय हो जाते हैं और कीड़े-मकौड़ों की संख्या भी बढ़ जाती है। सांपों का मुख्य भोजन यही जीव हैं, इसलिए जहां इनकी मौजूदगी बढ़ती है, वहां सांप भी अपने आप खिंचे चले आते हैं। चूंकि सांप ठंडे खून वाले (कोल्ड ब्लडेड) जीव हैं, इसलिए वे शरीर का तापमान बनाए रखने के लिए भी सूखी और गर्म जगहों को तरजीह देते हैं, और घर इसके लिए सबसे आसान ठिकाना बन जाते हैं।

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आंकड़े क्या कहते हैं

आंकड़ों पर नजर डालें तो भारत में सांप के काटने से मौत का आंकड़ा बेहद चिंताजनक है। हर साल देश में करीब 58 हजार लोगों की मौत सांप के जहर से होती है, जो दुनियाभर में सांप के काटने से होने वाली कुल मौतों का करीब आधा हिस्सा है। एक अध्ययन के मुताबिक पिछले दो दशकों में भारत में सांप काटने से 12 लाख से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है जिनमें करीब आधे मामले 30 से 69 साल की उम्र के लोगों के हैं और करीब एक-चौथाई मामलों में पीड़ित बच्चे रहे हैं।

स्थानीय स्तर पर भी यह ट्रेंड साफ दिखता है। कई जिलों में स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक मॉनसून शुरू होते ही स्नेक बाइट के मामलों में कई गुना उछाल दर्ज किया जाता है, जिसके बाद अस्पतालों को अलर्ट पर रहना पड़ता है।

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सांप काटने पर क्या करें

  • घबराएं नहीं, मरीज को शांत रखें और ज्यादा हिलने-डुलने न दें।
  • काटे गए हिस्से को कम से कम हिलाएं, ताकि जहर शरीर में तेजी से न फैले।
  • जितनी जल्दी हो सके, मरीज को नजदीकी सरकारी अस्पताल ले जाएं जहां एंटी स्नेक वेनम (ASV) उपलब्ध हो।
  • घाव को साफ कपड़े से हल्के से ढक दें।

सांप काटने पर क्या न करें

  • झाड़-फूंक, तंत्र-मंत्र या घरेलू नुस्खों में समय बर्बाद न करें, इससे जान को खतरा बढ़ सकता है।
  • काटे गए स्थान को चाकू या ब्लेड से न काटें।
  • मुंह से जहर चूसने की कोशिश बिल्कुल न करें।
  • काटे गए अंग के ऊपर कसकर रस्सी या कपड़ा न बांधें।

घर में सांप न आए, इसके लिए ये सावधानियां बरतें

  • दरवाजों और दीवारों की दरारों को अच्छी तरह सील करवा लें।
  • नालियों पर जाली लगाएं ताकि सांप अंदर न घुस सकें।
  • घर के आसपास उगी झाड़ियों और कचरे के ढेर को साफ रखें।
  • चूहों की संख्या को नियंत्रित रखें, क्योंकि यही सांपों को घर तक खींच लाते हैं।
  • अगर घर में सांप दिख जाए तो दरवाजा बंद कर दें, दूरी बनाए रखें और उसे पकड़ने या मारने की कोशिश खुद न करें, बल्कि प्रशिक्षित वन्यजीव रेस्क्यू टीम को बुलाएं।

सांपों से जुड़े कुछ अनोखे तथ्य

  • सांपों के बाहरी कान नहीं होते, फिर भी वे अपने जबड़े की हड्डी के जरिए हल्की-हल्की कंपन महसूस कर आवाजों को “सुन” लेते हैं।
  • कुछ जहरीले सांप अपने शिकार के हिसाब से जहर की बनावट बदल देते हैं, ताकि शिकार जल्दी मर जाए या आसानी से पच सके।
  • सांपों के दांत जिंदगीभर टूटते और दोबारा उगते रहते हैं, कई प्रजातियां अपने जीवनकाल में सैकड़ों दांत बदल लेती हैं।
  • खतरा महसूस होने पर ईस्टर्न हॉगनोज प्रजाति का सांप मरने का नाटक करता है और बदबूदार गंध तक छोड़ देता है, ताकि शिकारी उसे मरा समझकर छोड़ दे।
  • ब्लैक मांबा सांप की रफ्तार करीब 15 किलोमीटर प्रति घंटा तक हो सकती है, जो इसे दुनिया का सबसे तेज सांप बनाती है।
  • किंग कोबरा दुनिया का इकलौता सांप है जो अपने अंडों के लिए खासतौर पर घोंसला बनाता है।
  • रेटिकुलेटेड पाइथन जैसी प्रजातियां लंबाई में 10 मीटर तक पहुंच सकती हैं, यानी एक डबल-डेकर बस से भी ज्यादा लंबी।
  • समुद्री सांपों में खास ग्रंथियां होती हैं, जिनकी मदद से वे शरीर से अतिरिक्त नमक बाहर निकाल पाते हैं और समुद्री पानी में आसानी से रह लेते हैं।

बहरहाल, मॉनसून के मौसम में सतर्कता ही सबसे बड़ा बचाव है। घर और आसपास की सफाई का ध्यान रखें, रात में टॉर्च लेकर ही बाहर निकलें और सांप दिखने पर घबराने की बजाय तुरंत विशेषज्ञों की मदद लें। सही जानकारी और समय पर इलाज से जान बचाई जा सकती है।

Priyanshi Rao
About the Author Priyanshi Rao

प्रियांशी यादव 'विराट भारत न्यूज़' में वरिष्ठ राजनीति एवं अंतरराष्ट्रीय मामलों की विश्लेषक हैं। वे राष्ट्रीय राजनीति, चुनावी रणनीतियों, संसदीय कार्यवाहियों और वैश्विक कूटनीति पर पैनी नज़र रखती हैं। उनके विश्लेषणात्मक लेख पाठकों को जटिल राजनीतिक और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों की सरल समझ प्रदान करते हैं। View all posts by Priyanshi Rao →

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