वॉशिंगटन। पश्चिम एशिया में जारी सैन्य संघर्ष और अस्थाई युद्धविराम के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान को लेकर एक बार फिर सख्त रुख अख्तियार कर लिया है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि अमेरिका द्वारा दो सप्ताह से जारी बमबारी अभियान को रोक दिए जाने के बाद ट्रम्प ने स्पष्ट किया है कि वाशिंगटन और तेहरान के बीच पर्दे के पीछे बातचीत ज़रूर चल रही है लेकिन यदि कूटनीति का कोई नतीजा नहीं निकला तो अमेरिका सैन्य कार्रवाई पर वापस लौटने में एक मिनट की भी देरी नहीं करेगा।
मिशिगन में एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए ट्रम्प ने कहा कि ईरान को आसानी से समझाया नहीं जा सकता। उन्होंने कड़े शब्दों में चेतावनी देते हुए कहा –
आप उन्हें प्रलोभन देकर नहीं मना सकते, उन्हें सीधी भाषा में समझाना पड़ता है। अगर बातचीत से रास्ता नहीं निकला, तो हम वही करेंगे जो दो दिन पहले तक कर रहे थे।
दो हफ्तों की बमबारी के बाद क्यों रुकी अमेरिका की सैन्य कार्रवाई?
अमेरिकी रक्षा विभाग (पेंटागन) और शीर्ष सैन्य कमांडरों की सलाह के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति ने ईरान पर हवाई हमलों की श्रृंखला को अस्थायी रूप से निलंबित किया था।
- लक्ष्यों की कमी: पेंटागन अधिकारियों के अनुसार, दो हफ्तों के भीषण हमलों में ईरान के प्रमुख सैन्य और इंफ्रास्ट्रक्चर ठिकानों को भारी नुकसान पहुंचाया गया था, जिसके बाद नए सैन्य निशानों की संख्या सीमित हो गई थी।
- हथियारों की आपूर्ति: अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, जॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ ने हवाई युद्धक सामग्री की खपत को लेकर चिंता व्यक्त की थी, हालांकि ट्रम्प ने हथियारों की कमी के दावों को खारिज करते हुए कहा कि अमेरिका अपने गोला-बारूद के भंडार को तेजी से री-स्टॉक कर रहा है।
होर्मुज जलडमरूमध्य और मध्यस्थों के जरिए जारी बैकचैनल वार्ता
अमेरिकी हमलों के रुकने के बावजूद खाड़ी क्षेत्र में तनाव पूरी तरह शांत नहीं हुआ है। विवाद का सबसे बड़ा केंद्र होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) बना हुआ है जहां से दुनिया के कुल कच्चे तेल का एक-पांचवां हिस्सा गुजरता है। ईरान की नौसेना पर आरोप है कि वह अंतरराष्ट्रीय जहाजों की आवाजाही को बाधित कर रही है जबकि तेहरान का तर्क है कि वह अपने क्षेत्रीय जलक्षेत्र की सुरक्षा कर रहा है।
ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाघेई ने कहा कि तेहरान ने कूटनीति के रास्ते बंद नहीं किए हैं और मध्यस्थ देशों के माध्यम से संदेशों का आदान-प्रदान जारी है। हालांकि उन्होंने सीधे अमेरिका से बातचीत की अर्जी लगाने के दावों का खंडन किया है। दोनों देशों के बीच जारी इस गतिरोध का सीधा असर अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों और वैश्विक सुरक्षा पर पड़ रहा है।